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गोरखपुर: बाढ़ का पानी उतरा, अब सामने आया चुनौतियों का पहाड़

Tue, 28 Sep 2021 10:13 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

बाढ़ के पानी में डूबा अनाज, बिस्तर समेत घर का ज्यादातर समान खराब हो चुका है। राप्ती की बाढ़ में डूबे बहरामपुर, कोलिया समेत अन्य गांवों का यही हाल है।
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर में राप्ती की बाढ़ में डूबे बहरामपुर और कोलिया गांव के लोग पानी हटने के बाद घर लौट आए हैं। अब इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती गृहस्थी को दोबारा पटरी पर लाने की है। घर में रखा अधिकतर सामान भीगकर खराब हो चुका है। सबसे बड़ा संकट कपड़े, बिस्तर व अनाज के लिए है। बाढ़ से प्रभावित अन्य गांवों में भी यही हालात हैं।

अगस्त के अंतिम सप्ताह में जब राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया तो नदी के तटवर्ती इलाकों बहरामपुर, बहरामपुर दक्षिणी, हनुमानचक, कोलिया उत्तरी व दक्षिणी समेत कई गांवों के लोग जरूरी सामान के साथ बंधों पर आ गए थे। पानी दो-चार दिन में कम होने की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति सामान्य होने में करीब महीने भर का वक्त लग गया। पानी कम हुआ तो बंधे पर शरण लिए लोग घर लौट आए। बहरामपुर गांव में अपने घर से भीगा सामान निकाल रहीं सुशीला का कहना है कि घर में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़ा सब खराब हो चुका है। अधिकतम तीन से चार फुट तक पानी लगने का अनुमान था, लेकिन इस बार पूरा मकान डूब गया था। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ पीड़ित बोले
बहरामपुर निवासी कन्हई ने कहा कि पानी इतना अधिक बढ़ेगा, इसका अंदाजा नहीं था। अचानक जब स्थिति गंभीर हुई तो केवल पहने हुए कपड़े व कुछ सामान समेत बाहर निकल पाए थे। बिस्तर, अनाज, कागज सब भीगकर खराब हो चुका है। अब सब कुछ नए सिरे से इंतजाम करना पड़ रहा है।

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बहरामपुर निवासी अनुज ने कहा कि नदी की तलहटी में बसा होने के चलते हर साल बरसात में डूबने और बाद में दोबारा जीवनचर्या शुरू करना हमारे लिए अब सामान्य बात है। इस डूबने-उबरने में हर साल पूरी कमाई चली जाती है। अब हर घर को नए सिरे से सारी व्यवस्था करनी होगी।

 

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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बहरामपुर निवासी शारदा देवी ने कहा कि हर साल गांव बाढ़ में डूब जाता है, लेकिन मजबूरी है कि पूर्वजों के जमाने से यहीं बसे हैं। और कहीं न तो घर बनाने की जमीन है और न खेती लायक। लिहाजा सब कुछ बर्दाश्त कर यहीं जिंदगी की गाड़ी को दौड़ाना है। जो डूब गया वह हमारी किस्मत में नहीं था।

 
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गोरखपुर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बहरामपुर निवासी रामकेवल ने कहा कि बाढ़ का पानी अब उतर चुका है। लोग लौटने लगे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि घर का सारा सामान खराब हो चुका है। कई घरों के बर्तन बाढ़ में बह गए हैं। गृहस्थी का सामान दोबारा खरीदना पड़ेगा। जिंदगी सामान्य बनाने में कम से कम एक महीने का समय लगेगा।
 
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