गोरखपुर में राप्ती की बाढ़ में डूबे बहरामपुर और कोलिया गांव के लोग पानी हटने के बाद घर लौट आए हैं। अब इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती गृहस्थी को दोबारा पटरी पर लाने की है। घर में रखा अधिकतर सामान भीगकर खराब हो चुका है। सबसे बड़ा संकट कपड़े, बिस्तर व अनाज के लिए है। बाढ़ से प्रभावित अन्य गांवों में भी यही हालात हैं।
अगस्त के अंतिम सप्ताह में जब राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया तो नदी के तटवर्ती इलाकों बहरामपुर, बहरामपुर दक्षिणी, हनुमानचक, कोलिया उत्तरी व दक्षिणी समेत कई गांवों के लोग जरूरी सामान के साथ बंधों पर आ गए थे। पानी दो-चार दिन में कम होने की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति सामान्य होने में करीब महीने भर का वक्त लग गया। पानी कम हुआ तो बंधे पर शरण लिए लोग घर लौट आए। बहरामपुर गांव में अपने घर से भीगा सामान निकाल रहीं सुशीला का कहना है कि घर में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़ा सब खराब हो चुका है। अधिकतम तीन से चार फुट तक पानी लगने का अनुमान था, लेकिन इस बार पूरा मकान डूब गया था। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...