कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के बाद थाने की जीडी (जनरल डायरी) में इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह ने पहले दरोगा अक्षय मिश्रा को बीमार बताकर रवाना किया था। इसके बाद खुद बीमारी के बहाने फरार हो गया था। पूछताछ में सामने आया कि वह मामले को हादसा साबित करना चाहता था। लेकिन मामले ने तूल पकड़ लिया और एसआईटी की जांच में जेएन सिंह एंड कंपनी के सारे झूठ पकड़ लिए गए। सीन रीक्रिएट, 35 लोगों के बयान के बाद इसके पुख्ता सबूत एसआईटी के हाथ लग गए थे कि 27 सितंबर की रात में होटल कृष्णा पैलेस के कमरे में मारपीट हुई थी। खुद को फंसता देख ही रविवार को जगत नारायण और अक्षय कोर्ट में सरेंडर करने की फिराक में थे। जानकारी के मुताबिक, कानूनी दांव पेच को बारीकी से समझने वाले जगत नारायण सिंह ने सारा तानाबाना बुना था। सर्विस रिवाल्वर और सरकारी सीयूजी को उसने इसी वजह से जीडी में रवाना होने से पहले सुपुर्द कर दिया था, ताकि उसके खिलाफ सरकारी रिवाल्वर लेकर फरार होने का आरोप न लगे। उसने पूरी साजिश इस तरह से रची कि वह मामले में पाक-साफ हो जाए और आसानी से नौकरी में लौट आए। लेकिन जब मामले में एसआईटी कानपुर ने जांच पड़ताल शुरू की तो सचाई सामने आने लगी और उसके बचने के सभी रास्ते बंद हो गए। इसके बाद ही उसने अदालत में सरेंडर करने की सोची और पकड़ा गया।
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रामगढ़ताल थाने पर तैनात पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर पुलिस की हुई खूब किरकिरी
आरोपी पुलिस वालों के फरार होने पर गोरखपुर पुलिस की खूब किरकिरी हुई। यही वजह है कि पहले साक्ष्य जुटाने की दलील देने वाली गोरखपुर पुलिस इस कदर सक्रिय हो गई थी कि उसका एक ही मकसद था कि किसी तरह से आरोपियों को कानपुर पुलिस से पहले दबोच लिया जाए, ताकि दामन पर लगे दाग को धोया जा सके। इसमें वह सफल हुई है और उसके हाथ दोनों मुख्य आरोपी लग गए हैं।
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आरोपी दरोगा विजय यादव
- फोटो : अमर उजाला।
हाईकोर्ट में स्टे के लिए पहुंचा था विजय यादव
मामले में नामजद आरोपी दरोगा विजय यादव कुछ दिन पहले हाईकोर्ट में स्टे लेने के लिए पहुंचा था। इसके पीछे का मकसद था कि वह यह बता देगा कि उसकी न तो होटल के कमरे की फोटो है और न ही वह अंदर दाखिल हुआ था। मगर जिस दिन वह गया था उसी दिन से हाईकोर्ट में दशहरा के उपलक्ष्य में छुट्टी हो गई थी। इस कारण वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया।
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आरोपी जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा में गहरी दोस्ती
जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा में गहरी दोस्ती थी। यही वजह थी कि दोनों साथ में रहते थे। जिस रात घटना हुई उस रात भी अक्षय मिश्रा का होटल जाना दोनों की दोस्ती की गवाही देता है। अक्षय मिश्रा फलमंडी चौकी का इंचार्ज था जबकि होटल कृष्णा पैलेस आजाद नगर चौकी क्षेत्र में पड़ता है। चूंकि दोनों हमेशा साथ रहते थे इस वजह से जेएन सिंह के साथ अक्षय मिश्रा भी चेकिंग के नाम पर होटल गया था।
मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर व दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
मीडिया की नजरों से बचाकर कोर्ट ले गई पुलिस
आमतौर पर बदमाशों को मीडिया के सामने पेश किया जाता है। थोड़ी देर पहले कोर्ट के नियम को दर्शाते हुए नकाब लगाया जाता है, लेकिन इस मामले में पुलिस बचती रही। दोनों आरोपितों को भारी फोर्स के बीच मीडिया से बचाते हुए कोर्ट में लेकर गई। इस दौरान पुलिस के अलावा पीएसी भी बुला दी गई थी। आरोपितों को जिला अस्पताल में मेडिकल के लिए भी लेकर पुलिस नहीं गई। थाने में ही मेडिकल करा दिया गया।