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मिलकर लड़ेंगे कोरोना से जंग: उद्योगों की आकांक्षाएं हुईं पूरी, उद्यमियों को बेहतरी की उम्मीद

Thu, 14 May 2020 12:37 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई
उद्योगपतियों के साथ आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि 20 लाख करोड़ रुपए के इस आर्थिक पैकेज से देश की अर्थव्यवस्था फिर से ना केवल पटरी पर आ जाएगी बल्कि आने वाले कुछ महीनों में रफ्तार भी पकड़ लेगी। आइए जानते हैं गोरखपुर के उद्यमियों ने क्या कहा...

 
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चंद्र प्रकाश अग्रवाल और ओम प्रकाश जालान। - फोटो : अमर उजाला।
छोटे उद्योगों को तत्काल राहत की जरूरत थी। एक महीने से उद्योग बंद थे। इस दौरान बड़ा नुकसान हुआ, फिर भी कर्मचारियों का वेतन दिया गया। बैंकों का ब्याज और बिजली का फिक्स चार्ज जस के तस हैं। हां, कर्ज में राहत जरूर दी गई है। भविष्य के लिहाज से यह कदम अच्छा है। बैंकों से कर्ज लेकर जो उद्योग चला पाएंगे, वह आगे बढ़ेंगे। बड़े उद्योगों के लिए अभी कुछ नहीं आया है।  
- चंद्र प्रकाश अग्रवाल, प्रबंध निदेशक गैलेंट समूह

जितनी उम्मीद थी, उस हिसाब नहीं मिल पाया है। बैंकों के ब्याज में छूट की उम्मीद थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तीन महीने की छूट मिलती तो उद्योगों को तेज गति से चलाया जा सकता था। आर्थिक पैकेज से उद्योगों की रफ्तार धीमी रहेगी लेकिन लंबे समय और संघर्ष के बाद लोगों को फायदा मिलेगा। कर्ज लेने की सीमा को बढ़ाना अच्छा कहा जा सकता है। पीपीएफ का भुगतान करना भी अच्छा है। उद्योगों को संभलने में छह महीने का समय लगेगा। एक वर्ष के पीपीएफ के भुगतान की जिम्मेदारी ली जाती तो ज्यादा अच्छा नतीजा सामने आ सकता था।
- ओम प्रकाश जालान, प्रबंध निदेशक जालान कान कास्ट
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अमर तुलस्यान और विक्की कुकरेजा। - फोटो : अमर उजाला।
राहत पैकेज से न सिर्फ सूक्ष्म, छोटे, मझोले और मध्यम उद्योग गति पकड़ सकेंगे बल्कि नए नए उद्योग भी स्थापित होंगे। अगर बैंकिंग सपोर्ट बेहतर ढंग से मिलता है तो इसका फायदा भी जल्द आने लगेगा। ये उद्योग नई नई तकनीक को अपनाएंगे, जो आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित होगा।
- अमर तुलस्यान, प्रबंध निदेशक, शुद्ध प्लस एवं नाइन

अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। पैकेज से समस्या का समाधान हो सकेगा। आर्थिक सहयोग भी दिया गया था। अब उद्योग, व्यापार, बिल्डर और कर्मचारियों को आर्थिक पैकेज का तोहफा दिया है। उद्योग स्थापित होंगे या फिर पूरी क्षमता से चलेंगे तो रोजगार विकसित होगा। बेरोजगारी की चुनौती से निपटा जा सकेगा।
- विक्की कुकरेजा, निदेशक न्यू रवि ट्रेडिंग कंपनी 

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निखिल जालान और एसके अग्रवाल । - फोटो : अमर उजाला।
आर्थिक पैकेज से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार एमएसएमई सेक्टर को और ज्यादा मजबूत बनाना चाह रही है। लेकिन सरकार को बड़े उद्योगों के लिए भी पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। साथ ही नए निवेश को कैसे आकर्षित किया जाए इस दिशा में भी कदम उठाने की आवश्यकता है। जब नए निवेश होंगे तब ही प्रधानमंत्री का स्वदेशी का कंसेप्ट ना सिर्फ आगे बढ़ेगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ साबित होगा।
- निखिल जालान निदेशक अंकुर उद्योग

 एमएसएमई के सामने बहुत बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। उनके सामने न सिर्फ पूंजी की कमी है बल्कि लॉकडाउन के वजह से बंद पड़े उद्योगों को फिर से चलाने के लिए नए सिरे से कवायद करने की जरूरत है। वित मंत्री की ओर से आर्थिक पैकेज का जो ब्यौरा दिया गया है वह काफी हद तक उद्योगों के लिए राहत भरा कदम साबित होगा। इसमें जो 200 करोड़ रुपये तक के टेंडर को ग्लोबल नहीं करने की बात कही गई है। इससे देश की कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।
- एसके अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज   
 
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आरएन सिंह व कामेश्वर सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
भले ही उद्योगों को डायरेक्ट बेनिफिट नहीं दिया गया है, लेकिन आर्थिक पैकेज उद्योगों को नई गति प्रदान करेगा। एमएसएमई सेक्टर को ब्याज रहित एक साल का लोन देने के प्रस्ताव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बाजार में पूंजी का सरकुलेशन बढ़ेगा। इससे देश की ठहरी हुई अर्थव्यवस्था न सिर्फ चल पड़ेगी बल्कि आने वाले साल डेढ़ साल में रफ्तार भी पकड़ लेगी।
- आरएन सिंह निदेशक वेल्ड इंडिया

मेक इन इंडिया का संकल्प पूरा होगा
भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। आर्थिक पैकेज मेक इन इंडिया के संकल्प को पूरा करेगा। स्वदेशी को बढ़ावा मिलेगा। -कामेश्वर सिंह, प्रदेश मंत्री भाजपा

 
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डॉ. सैय्यद जमाल व वीरेंद्र पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।
आम व्यक्ति की क्रय शक्ति बढ़ना जरूरी
जब तक आम जनता की क्रय शक्ति नहीं बढ़ेगी, तब तक घोषणाओं का बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 15000 रुपये मासिक वेतन वालों के ईपीएफ भुगतान का बड़ा फायदा किसी को नहीं मिलने वाला है। आयकर रिटर्न और टीडीएस में कटौती से मजदूर, प्रवासियों का ज्यादा वास्ता नहीं पड़ता है। एकमुश्त घोषणा करने के पीछे की मजबूरी सरकार को बतानी चाहिए।- डॉ. सैय्यद जमाल, सदस्य कांग्रेस

आंकड़ों की बाजीगरी है आर्थिक पैकेज
केंद्र सरकार का 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज आंकड़ों की बाजीगरी है। मजदूरों की मूल समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया। सब गोलमाल जैसा है। आम जनता को इससे कोई खास राहत नहीं मिलने वाला है। - वीरेंद्र पांडेय, सेक्टर प्रभारी बसपा गोरखपुर
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नगीना प्रसाद साहनी व बृजेश त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला।
कारपोरेट के लिए काम करती है भाजपा
 यह मजबूर वर्ग के साथ धोखा है। पहले 15 लाख का जुमला अब  20 लाख करोड़ का झूठा दावा। इस पर कोई कैसे एतबार कर सकता है। बात लोकल की करना और काम कारपोरेट समाज के लिए करना, यह दोहरा चरित्र भाजपा का हमेशा से रहा है। - नगीना प्रसाद साहनी, जिलाध्यक्ष, सपा

निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी
 यूपी बिजली निगम को आर्थिक पैकेज मिलने से अबाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। बिल पर सभी तरह के टैक्सों को माफ कर दिया गया है। ऐसे में अगर फंड नहीं मिलता तो आने वाले समय में बिजली की समस्याएं बढ़ सकती थीं। - बृजेश त्रिपाठी, केंद्रीय उपाध्यक्ष उप्र राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ

 

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विकास केजरीवाल व शोभित मोहन दास अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला।
एक साल पीछे हो गया रीयल एस्टेट सेक्टर
50 दिन से अधिक के लॉकडाउन की वजह से रियल एस्टेट का सेक्टर कम से कम एक साल पीछे हो गया। अभी यह भी नहीं मालूम की लॉक डाउन कब तक चलेगा। जब तक पूरी तरह से पाबंदी नहीं खत्म होती, निर्माण पूरी तेजी के साथ शुरू कर पाना मुमकिन नहीं है। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए छह महीने की छूट बहुत छोटी है। ज्यादातर मजदूर घर लौट गए हैं। जो हैं, वह लॉक डाउन खत्म होते ही घर चले जाएंगे। ये मजदूर कब लौटेंगे, यह बता पाना कठिन है। ऐसे में एक साल के भीतर यह रियल एस्टेट का कारोबार पटरी पर आना बहुत मुश्किल दिख रहा है।-विकास केजरीवाल, निदेशक, पॉम पैराडाइज

कोई आर्थिक छूट मिली नहीं, छह महीने का समय भी कम

भारी भरकम आर्थिक पैकेज में कुछ सेक्टर के लिए बहुत सी राहत दी गई हैं। मगर रियल एस्टेट सेक्टर को कोई विशेष राहत नहीं दी गई। सरकार समेत तमाम विशेषज्ञ खुद मान रहे हैं कि सब कुछ सामान्य होने में कम से कम एक साल का समय लग जाएगा। जीवन कब पूरी तरह सामान्य होगा। कब काम शुरू होंगे ऐसे बहुत से सवालों के अभी किसी के पास जवाब नहीं हैं। -शोभित मोहन दास अग्रवाल, अध्यक्ष, क्रिडाई यूपी

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कृष्णमूर्ति राय व प्रवीण अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला।
आर्थिक पैकेज से होगा नए भारत का निर्माण
यहां से नए भारत के उदय का रास्ता निकलता है। अब उद्यमियों को बैंकों से बिना गारंटी आसानी से लोन मिल सकेगा, दूसरी ओर टैक्स देने वालों को टैक्स में राहत देना यह बताता है कि अब लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जो हमारी अर्थव्यवस्था को संजीवनी का काम करेगा। इस राहत पैकेज में सरकार ने सभी को उम्मीद से ज्यादा राहत दी है। इससे विकास का जो पहिया करोना की वजह से रुक गया था उसके फिर से चल पड़ने की उम्मीद काफी बढ़ गई है।- कृष्णमूर्ति राय, वित्त सलाहकार

सरकार की मंशा लॉकडाउन की वजह से ठप पड़े उद्योगों को फिर से उठ खड़ा करने के लिए राहत देने की कोशिश है। इसका फायदा यह होगा कि बाजार में पूंजी का प्रसार बढ़ेगा। इसका फायदा ऐसे कई उद्योगों को होगा, जो मात्र थोड़ी सी पूूंजी बढ़ने की वजह से उनकी श्रेणी बदल जाती थी। विवाद से विश्वास स्कीम को 31 दिसंबर तक और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की तारीख 30 नवंबर तक बढ़ाए जाने से आम लोगों के साथ उद्योगपतियों को भी काफी फायदा होगा। प्रवीण अग्रवाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट
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प्रो. संजीत कुमार गुप्ता व राहुल चौधरी। - फोटो : अमर उजाला।
ठेकेदार जितना कमाएगा भारतीय बाजार में खर्च करेगा
200 करोड़ रुपये के ठेके भारतीय फर्मों को देने का फैसला स्वागत योग्य है। ठेकेदार इससे जितना भी कमाएगा, खर्च तो भारतीय बाजार में ही करेगा। बाहरी कंपनियां काम लेकर अपना प्रॉफिट लेती थीं और चलती बनती थीं। बड़ी फर्मों को आज भी अपने नाम पर ही लेकर पेटी ठेके में बदल देती थी। नई व्यवस्था में ठेकेदार खुद काम कराएगा। इससे रोजगार भी बढ़ेगा। - राहुल चौधरी, ऋषि ट्रेडिंग कंपनी

आत्मनिर्भर भारत अभियान वास्तव में इतनी बड़ी जनसंख्या वाले भारतवर्ष के लिए वरदान सिद्ध होगी। सभी नागरिक अपनी सोच लोकल अर्थात स्थानीय ,स्वदेशी वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे। साथ ही ऐसे कौशल का विकास करेंगे, जिससे हम इतनी बड़ी जनसंख्या का उपयोग कर पूरे विश्व के लिए वस्तुओं के मांग के बड़े निर्यातक बनेंगे। गुणवत्तापूर्ण निर्माण, तकनीकी के उपयोग से भारत इस महामारी के बाद सशक्त राष्ट्र के रूप में पूरे विश्व के सामने आएगा। राहत ,सहायता के साथ यह आर्थिक पैकेज अर्थव्यवस्था के इम्यूनिटी को बढ़ाने जैसा है तभी हम विश्व के अन्य राष्ट्रों की दौड़ में आगे निकल सकेंगे।-प्रो. संजीत कुमार गुप्ता, आचार्य वाणिज्य विभाग, गोविवि
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