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गोरखनाथ मंदिर के प्रसाद की रोचक है कहानी, यहां सालों से जल रही है एक धूनी

Mon, 30 Nov 2020 02:37 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
आज हम आपको गोरखनाथ मंदिर से जुड़ी एक खास बात बताने जा रहे हैं। इसमें हम गोरखनाथ मंदिर में दिए जाने वाले प्रसाद के बारे में बताएंगे। इसकी कहानी बहुत ही रोचक और दिलचस्प है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
 
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बाबा गोरखनाथ की आरती करते सीएम योगी। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने गोरखनाथ मंदिर में जलने वाले अखंड धूनी के बारे में बताया कि गुरु गोरखनाथ हिमाचल स्थित कांगड़ा में ज्चाला देवी के दरबार पहुंचे तो देवी ने उन्हें अपने वहां भोजन के लिए आमंत्रित किया। तब गुरु गोरखनाथ ने कहा कि देवी मैं योगी हूं। भिक्षाटन करके जो लेकर आता हूं, उसे ही बनाकर खाता हूं।
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
उन्होंने आगे कहा कि यहां पर बलि दी जाती है। यहां पर वह भोजन नहीं कर सकता हूं। आप पानी गरम कीजिए मैं खिचड़ी मांग कर लाता हूं। यह कह कर गुरु गोरखनाथ वहां से निकले और चलते हुए यहां आ गए, यहां पर उस समय चारों तरफ जंगल था। गुरु गोरखनाथ ने यहां पर धूनी रमा दी।

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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
योगी के बारे में कहा जाता है कि योगी किसी के घर भोजन नहीं करते हैं न ही किसी के घर रुकते हैं। उनके पास त्रिशूल, चमचा, झोला, खप्पर उनके साथ रहता है। जहां पर रुकते हैं अपनी धूनी रमाते हैं।
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gorakhnath temple - फोटो : आनंद चौधरी।
गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाई गई धूनी गोरखनाथ मंदिर में आज भी जलती है। उसमें मंदिर के पुजारी लकड़ी और गाय का कंडा डालते हैं। उस धूनी की भभूत ही गोरखनाथ मंदिर का प्रमुख प्रसाद है। उसकी भभूत मंदिर में आए हर भक्तों को दी जाती है।

 
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बाबा गोरखनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
तिवारी के मुताबिक यहां पर चारो तरफ जंगल था। इस नाते गुरु गोरखनाथ यहां पर रुके थे। वह कहते हैं कि इसके अगल-बगल के पचास से अधिक गांव ऐसे हैं जिनका नाम आज भी जंगल से जुड़ा है। जैसे जंगल कौड़िया, जंगल तिकोनियां, जंगल सालिगराम जैसे अनेक ऐसे गांव हैं। गुरु गोरखनाथ द्वारा जलाया गया धूनी आज भी उसी तरह से अनवरत जल रहा है। उसे जलाने के लिए वन विभाग की तरफ से लकड़ी दी जाती है।
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