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जानिए 2600 साल में कितनी बार बदला है गोरखपुर का नाम, रोचक है इसका इतिहास

Mon, 08 Feb 2021 03:46 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर का इतिहास। - फोटो : अमर उजाला।
वर्तमान में गोरखपुर शहर का नाम आठ पड़ाव पार करने के बाद 'गोरखपुर' तक पहुंचा है। पिछले 2600 साल के दौरान गोरखपुर का नाम 8 बार बदल चुका है। इस नाम तक पहुंचने में कई रोचक कहानियां गढ़ी गई हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...

 
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पहले ऐसा दिखता था गोरखपुर रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला
प्राचीन भारत के इतिहासकारों के अनुसार गोरखपुर का नाम कभी रामग्राम भी हुआ करता था जो कालांतर में दुनिया को योग से परिचित कराने वाले गुरु गोरक्षनाथ के नाम से होते हुए गोरखपुर पर आकर ठहर गया। दुनिया को योग से परिचित कराने वाले गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर का मौजूदा नाम 217 साल पुराना है।
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गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
इसके पहले नौवीं शताब्दी में भी इसे गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर ‘गोरक्षपुर’ के नाम से जाना जाता था। बाद की सदियों में शासकों की हुकूमत के साथ इस क्षेत्र का नाम भी बार-बार बदलता रहा। कभी सूब-ए-सर्किया के नाम से जाना गया, कभी अख्तर नगर, कभी गोरखपुर सरकार तो कभी मोअज्जमाबाद के नाम से। अंतत: अंग्रेजों ने 1801 में इसका नाम ‘गोरखपुर’ कर दिया जो नौवीं शताब्दी के ‘गोरक्षपुर’ और गुरु गोरक्षनाथ पर आधारित है।

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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।
साहित्यकार डॉ. वेदप्रकाश पांडेय द्वारा संपादित किताब ‘शहरनामा’ के अनुसार मुगलकाल में जब जौनपुर में सर्की शासक हुए तो इसका नाम बदलकर सूब-ए-सर्किया कर दिया गया। एक समय में इसका नाम अख्तरनगर भी था। फिर वह दौर आया जब इसे गोरखपुर सरकार कहा गया।

 
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मुगल बादशाह औरंगजेब - फोटो : Facebook/Nilofer A J
औरंगजेब के बेटे के नाम पर हुआ मोअज्जमाबाद
औरंगजेब के शासन (1658-1707) के दौरान इसका नाम मोअज्जमाबाद पड़ा। औरंगजेब का बेटा मुअज्जम यहां शिकार के लिए आया था। वह कुछ वक्त तक यहां ठहरा। उसी के नाम पर शहर का नाम मोअज्जमाबाद कर दिया गया। 1801 में अंग्रेजों ने एक बार फिर गुरु गोरक्षनाथ के नाम पर शहर का नाम बदलकर गोरखपुर कर दिया। तबसे आज तक इसका नाम यही है।

 
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रामगढ़ ताल। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर विवि के प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. राजवंत राव के अनुसार जहां रामगढ़झील है वहां 2600 साल पहले रामग्राम हुआ करता था। यह कोलियों की राजधानी थी। भौगोलिक आपदा के चलते रामग्राम धंसकर झील में बदल गया। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में इस क्षेत्र को पिप्पलिवन के नाम से भी जाना गया। गुरु गोरक्षनाथ के बढ़ते प्रभाव के चलते नौवीं शताब्दी में इसका नाम गोरक्षपुर हुआ।

 
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गोरखपुर शहर। - फोटो : अमर उजाला
कब रहा कौन सा नाम
  • रामग्राम, छठवीं शताबदी ईसा पूर्व
  • पिप्पलीवन-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व
  • गोरक्षपुर-नौवीं शताब्दी
  • सूब-ए-सर्किया-13वीं, 14वीं शताब्दी
  • अख्तरनगर-14वीं शताब्दी के बाद किसी कालखंड में
  • गोरखपुर सरकार-17वीं शताब्दी से पूर्व किसी कालखंड में
  • मोअज्जमाबाद-17वीं शताब्दी में
  • गोरखपुर-1801 से अब तक
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