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बाढ़ का खौफ: तबाही की तरफ बढ़ रही सिद्धार्थनगर की ये नदियां, बांध टूटे तो चारों तरफ नजर आएगा खौफनाक मंजर

Mon, 30 Aug 2021 06:29 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, सिद्धार्थनगर।
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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सिद्धार्थनगर जिले में राप्ती एवं बूढ़ी राप्ती नदियों के लाल निशान से कई दिनों से ऊपर बहने के साथ ही लगातार बढ़ने के कारण कई बांधों पर खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे सूपा एडवांस बांध में हो रहे रिसाव को रोकने में ग्रामीणों समेत विभागीय अधिकारियों के पसीने छूट रहे थे। अशोगवा-नगवा बांध, ककरही गोनहा बांध और राप्ती नदी किनारे सोनखर बांध की हालत रिसाव से नाजुक बनी हुई है।

जिन बांधों पर कई गांवों के लाखों लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वह खुद रैन कट और रैट होल से जर्जर है। वर्तमान में नदियों के तेजी से बढ़ रहे जलस्तर के दबाव से कराह रहे यह जर्जर बांध अगर टूटे तो चारों तरफ सिर्फ तबाही का मंजर ही दिखेगा। ऐसे में बाढ़ से सुरक्षा के लिए इन बांधों पर निर्भर गांव के लोग बेहद डरे हुए हैं। अमर उजाला की टीम ने जब बांसी क्षेत्र के बांधों की पड़ताल की तो बांध किनारे बसे गांव के लोग अफरा-तफरी के माहौल में अपने घर और गांव को बचाने का जतन करते नजर आए। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...
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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सोमवार की सुबह नौ बजे सोनखर हाटा बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से सोनखर गांव के पास पानी बांध के लेवल को छूने लगा, यह देख गांव में अफरा-तफरी मच गई, लोग बचाव कार्य में लग गए। यही नहीं इस स्थल से पचास मीटर की दूरी पर बांध पर बनी सड़क में दरार व रिसाव देख गांव के लोग चिंतित और परेशान नजर आए। सूचना मिलने पर पहुंचे सिचाई विभाग के ठेकेदार ने बांध के किनारे बोरे में मिट्टी भरवा कर रखवाई तथा रिसाव को रोकने का प्रबंध किया। बांध में आई दरार को देख गांव के लोगों ने एहतियात के तौर पर बांध पर एक पेड़ को गिराकर भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया है। इसी बीच भंवारी गांव के पश्चिम बांध में रिसाव शुरू हुआ जिसे रोका गया। यहां से सौ मीटर के बीच बांध में एक सप्ताह से एक के बाद दूसरे स्थान पर अनवरत रिसाव हो रहा है। एक स्थान पर रिसाव बंद हो रहा है तो दूसरे स्थान पर रिसाव होने लग रहा है।
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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
सोनखर गांव निवासी हीरालाल लोधी का कहना है कि सौ मीटर के बीच बांध काफी जर्जर है। बरसात से पूर्व सिचाई विभाग का कोई जिम्मेदार अभियंता बांध की स्थिति को देखने नहीं आया और न ही कोई काम हुआ जिसका परिणाम है कि बांध में जगह- जगह रिसाव हो रहा है। इन्होंने कहा कि हम सब भगवान भरोसे हैं, बांध की स्थिति देखकर रात में नींद नहीं आ रही है। पूरी रात जागकर ईश्वर से बांध की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।

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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बताया कि बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ते ही नदी के दक्षिणी तट पर स्थित असोगवा नगवा बांध में खैरहवा गांव के पास शनिवार की शाम रिसाव होने लगा। इस रिसाव को रोकने का जतन शुरू हुआ तो एक से बढ़कर कई स्थान पर रिसाव होने लगा। रविवार की सुबह यहां रिसाव बंद हुआ तो दोपहर में इसी बांध पर सूपा गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास रिसाव शुरू हुआ। गांव वालों के साथ ठेकेदार के मजदूर रिसाव को बंद करने के प्रयास में लग गए। बांधों की हालत देख आसपास के गांव के लोग काफी चिंतित हैं। भगौतापुर गांव निवासी डॉ. अफजल व क्षेत्र निवासी महंत लोधी का कहना है कि बांध क्षेत्र के सभी बांध जर्जर हैं, बरसात से पहले विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं ने जायजा लेना भी गंवारा नहीं समझा, अब बाढ़ आने पर सब दिखाई दे रहे हैं।
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सिद्धार्थनगर में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
रिसाव होने पर शुरू हुई सफाई और मरम्मत
सोनखर हाटा बांध व असोगवा नगवा बांध में जगह- जगह रिसाव होने के बाद अब इन बांधों में उगे झाड़ व नरकट को काटने का काम शुरू किया गया है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं की लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि क्षेत्र की नदियां उफान पर हैं और सभी बांधों पर काफी झाड़ व नरकट उगे हुए हैं इसे साफ नहीं कराया गया। सोनखर निवासी मुन्नी लाल लोधी का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले बांध में उगे झाड़- झंखाड़ व नरकट को साफ कर उसमें जो भी खामी होती थी उसे ठीक किया जाता था। लेकिन इस वर्ष कोई काम नहीं हुआ, यहां तक कि झाड़ व नरकट की कटाई भी समय से नहीं की गई।
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