गोरखपुर में प्रतिमा विसर्जन।
- फोटो : अमर उजाला।
शास्त्रों में विसर्जन की यह है प्रक्रिया
जानकारों की मानें तो शास्त्रीय विधि के अनुसार मूर्ति, पंच महाभूतों से बनी होती है। इसलिए इसे पंच महाभूतों में विलीन कर देना ही मूर्ति विसर्जन कहलाता है। शास्त्रों में इसकी प्रक्रिया है। प्रतिमा चाहें दुर्गा की हो या गणेश की। उसे पानी में लेकर उतरते हैं। फिर धीरे-धीरे जल में अर्पित कर देते हैं। विसर्जन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि मूर्ति खंडित न हो। प्रतिमा के खंडित होना शुभ नहीं माना जाता है।