जरा सोचिए, छह-आठ साल पहले तक इस शहर की सूरत कैसी थी। उबड़-खाबड़ सड़कें और हर तरफ जाम, लेकिन आज चौड़ी सड़कें, ऊंची इमारतें, मॉल-कांप्लेक्स, जगह-जगह फ्लाईओवर और कल-कारखाने...। फर्राटे से वाहन दौड़ते हैं और शहर के चौराहे भी सुंदर और आकर्षक हो गए हैं। विस्तार लेते शहर में लंबे समय बाद लौटने वाले अपने घर को जाने वाले चौड़े रास्तों को पहचान भी नहीं पाते हैं। शायद इसीलिए हर किसी की जुबान पर एक ही बात सुनाई देने लगी है..गोरखपुर बदल रहा है। यहां दिल्ली-एनसीआर का अक्स झलकने लगा है। विदेशों में ही नहीं दिल्ली-नोएडा और दूर-दराज रहने वाले गोरक्षनगरी वासी भी पल-पल अपनों से पूछते हैं... और क्या-क्या बदल रहा है।