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Diwali 2021: दीपावली पर बन रहे हैं खास योग, बढ़ेगा आपसी सौहार्द, रोगों से मिलेगी मुक्ति

Thu, 28 Oct 2021 12:24 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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diwali 2021 - फोटो : istock
इस बार की दिवाली प्रीति और आयुष्मान योगों के कारण बेहद शुभ रहने वाली है। प्रीति योग के कारण जहां आपसी सौहार्द बढे़गा, वहीं आयुष्मान योग से तमाम तरह के रोगों से मुक्ति मिलेगी। इस तरह दीप पर्व हर किसी की जिंदगी को खुशियों की रोशनी से जगमग करने वाला साबित हो सकता है। दीपोत्सव पांच दिनों तक चलेगा। दिवाली चार नवंबर को मनाई जाएगी।

वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, चार नवंबर को दिवाली के दिन सूर्योदय 6:30 बजे और अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात में 3:32 बजे तक है। चित्रा नक्षत्र सुबह 8:12 बजे तक है। इसके बाद स्वाती नक्षत्र, प्रीति योग दिन में 12:40 बजे तक है। फिर आयुष्मान योग है। जानकार बताते हैं कि प्रीति योग से लोगों में आपसी सौहार्द बढ़ेगा। जबकि आयुष्मान योग से लोगों को रोगों से छुटकारा मिलेगा।
 
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पंडित शरद चंद्र मिश्र। - फोटो : अमर उजाला
क्यों मनाते हैं दिवाली
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद इसी दिन अयोध्या लौटे थे। तब अयोध्यावासियों ने इस दिन को उत्सव की तरह मनाया था। रात में दीपमालाएं प्रज्ज्वलित की थीं। उसी समय से भारत में यह पर्व दीप पर्व के रूप में मनाया जाता है। इसी तरह द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध किया तो ब्रज में दीपमालाएं प्रज्ज्वलित की गईं। इस कारण भी इस दिन दीप जलाएं जाते हैं। समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या पर महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इस कारण भी इस दिन दीप जलाएं जाते हैं और लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
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diwali 2021 - फोटो : अमर उजाला
क्या है महत्व
दिवाली के दिन महालक्ष्मी के साथ-साथ महा सरस्वती और महाकाली की पूजा की जाती है। कारोबारी दिवाली से नववर्ष का आरंभ मानते हैं, इसलिए इस दिन नए बही खातों का पूजन, तुला (तराजू) तिजोरी, व्यवसाय स्थान पर प्रयुक्त मशीनरी आदि का पूजन किया जाता है।
 

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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि दिवाली के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पितृगण एवं देवताओं का पूजन करें। संभव हो तो उपवास या फलाहार करके गोधूलि बेला में या वृष, सिंह, वृश्चिक आदि स्थिर लग्न में श्री गणेश कलश षोडश मातृका एवं महालक्ष्मी का षोडषोपचार पूजन करें। पूजन थाली में 26 दीये और एक अतिरिक्त चौमुखा दीप प्रज्ज्वलित कर दीपमालिका का पूजन करें। गणेश और लक्ष्मी की मूर्ति की चांदी आदि के सिक्के से पूजन शुभ माना जाता है। चौमुखा दीपक को रात भर जलने-जलाने की व्यवस्था करनी चाहिए। अंत में दवात के रूप में माता काली, कलम बही के रूप में मां लक्ष्मी और सरस्वती तथा कुबेर की तुला रूप में पूजन करना फलदायी होगा।
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diwali 2021 - फोटो : istock
पूजन मुहूर्त
  • लक्ष्मी पूजन मुहूर्त- शाम 06:10 से 08:06 तक
  • प्रदोष काल- 05:34 से 08:10
  • वृषभ काल-06:10 से 08:06
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