मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी ने रविवार देरशाम बीआरडी मेडिकल कॉलेज जाकर जांच-पड़ताल की। जिस ट्रामा सेंटर में मनीष को ले जाया गया था, उसका सीसीटीवी कैमरा खराब मिला।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के बाद रामगढ़ताल पुलिस ने बड़ा 'खेल' किया था। पहले मनीष को अज्ञात बताकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का पर्चा कटवाया था। हालांकि पांच मिनट बाद ही कारोबारी के नाम से भर्ती का दूसरा पर्चा कटवा दिया गया। अब सवाल उठता है कि मनीष ने अपना फोटोयुक्त पहचान पत्र जमा करके होटल का कमरा बुक कराया था। घटना के बाद जो पर्स मिला था, उसके पास ही मनीष का पहचान पत्र पड़ा था, फिर पुलिस ने अज्ञात बताकर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने का पहला पर्चा क्यों कटवाया? क्या पुलिस कारोबारी को अज्ञात बताकर कुछ और साबित करना चाहती थी? इसका जवाब अब गोरखपुर पुलिस को देना पड़ेगा।
मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच कर रही एसआईटी ने रविवार देरशाम बीआरडी मेडिकल कॉलेज जाकर जांच-पड़ताल की। जिस ट्रामा सेंटर में कानपुर के कारोबारी को ले जाया गया था, उसका सीसीटीवी कैमरा खराब मिला। इसके बाद एसआईटी ने पूरा ध्यान भर्ती कराने वाली फाइल पर लगा दिया। पता चला कि कारोबारी को भर्ती कराने के लिए दो अलग-अलग पर्चे कटवाए गए थे।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
सूत्रों के मुताबिक, भर्ती कराने का पहला पर्चा 27 सितंबर की रात 2:10 बजे कटवाया गया था। बाद में रामगढ़ताल पुलिस को गलती का एहसास हुआ, फिर देर रात 2:15 बजे दूसरा पर्चा कटवाया गया।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
अब एसआईटी इसका कारण तलाशने में जुटी है। इस सिलसिले में मेडिकल कॉलेज के कुछ स्टाफ के बयान दर्ज किए गए हैं। एसआईटी के मुखिया ने प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार से आवास पर जाकर मुलाकात की।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में जांच करती एसआईटी।
- फोटो : अमर उजाला।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ सारी सूचना एसआईटी को उपलब्ध करा दी गई है। मनीष को भर्ती कराने से संबंधित दस्तावेजों की प्रति भी एसआईटी साथ लेकर गई है।
...तो ट्रामा सेंटर ले जाने के लिए नहीं मिला था स्ट्रेचर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर के सीसीटीवी कैमरे खराब मिले हैं। एसआईटी को यह पता चला है कि मनीष को ट्रामा सेंटर तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला था। हालांकि इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। एसआईटी रविवार शाम 5:24 बजे मेडिकल कॉलेज पहुंची थी। करीब एक घंटे तक रिकॉर्ड को खंगाल कर यह जानने की कोशिश की गई कि मनीष को लेकर घटना की रात पुलिस कितने बजे पहुंची थी? कितने देर तक और किस तरह का इलाज किया गया? मौत की पुष्टि होने से पहले किस तरह के घाव उनके शरीर पर नजर आए थे?