कोरोना वैक्सीन के आने से पहले से ही साइबर अपराधियों ने डार्क वेबसाइटों पर कोरोना वैक्सीन और दवाओं का बाजार सजा दिया है। इंटरनेट पर साइबर अपराधियों के इस जाल की खबर लगते ही साइबर सेल ने अलर्ट जारी कर दिया है। सेल की सलाह है कि स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर आने वाली सूचनाओं को ही गंभीरता से लें और उन्हें ही सही मानें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : pixabay
जानकारी के मुताबिक, प्रदेश की राजधानी में ऐसे कुछ मामले सामने आने के बाद शासन की तरफ से भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। यह अलर्ट फर्जी वेबसाइट के माध्यम से वैक्सीन के अलावा कोरोना से निजात दिलाने के लिए अन्य दवाओं के नाम पर ऑनलाइन ठगी को लेकर है। पता चला है कि साइबर अपराधी डार्क नेट के माध्यम से वेबसाइट पर आपकी सुविधा और जरूरत को देखते हुए कोरोना की दवाओं और वैक्सीन की उपलब्धता बताकर फ्रॉड करने में जुट गए हैं। इसके बदले वे लोगों से ऑनलाइन भुगतान मांग रहे हैं। जानकारी मिली है कि भुगतान होने के बाद ये वेबसाइटें बंद हो जाती है या गूगल सर्च इंजन से गुम हो जाती हैं। रुपये भुगतान करने वाले कुछ दिनों के इंतजार के बाद खुद को ठगा मानकर शांत बैठ जाते, या साइबर सेल में इसकी शिकायत भी करते हैं। ऐसे कुछ मामले लखनऊ साइबर क्राइम सेल के पास पहुंच भी गए हैं। इसके बाद, इसे लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी कर दिया गया।
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गोरखपुर साइबर सेल के प्रभारी निरीक्षक सूर्यभान सिंह ने बताया कि इन निजी वेबसाइटों पर भरोसा करना गलत है। दवाओं या वैक्सीन के आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही पंजीकरण कराने के बाद वैक्सीन या अन्य दवाओं के लिए आवेदन किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल ऐसे मामले गोरखपुर में सामने नहीं आए हैं, लेकिन इसे लेकर अलर्ट किया गया है। साइबर सेल गूगल व बिंग सर्च इंजन पर नजर बनाए हुए हैं। इन फर्जी वेबसाइटों की पड़ताल करके उनको भी सूचीबद्ध किया जाएगा।
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जानिए क्या है डार्क नेट
इंटरनेट पर कई वेबसाइटें होती हैं जो आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले गूगल या बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउजिंग की पहुंच में नहीं होती है। इन्हें ही डार्क नेट या डीप नेट कहते हैं। सामान्य वेबसाइटों से अलग यह एक ऐसा नेटवर्क होता है, जिस तक चुनिंदा समूहों की ही पहुंच होती है। इसका नियंत्रण पूरी तरह उन्हीं के हाथों में होता है। इसका प्रयोग मुख्य रूप से इंटरनेट के माध्यम से गलत कामों या डेबिट क्रेडिट कार्ड प्रयोग कर ठगी करने में किया जा रहा है।
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एसपी त्रिवेणी सिंह।
- फोटो : अमर उजाला।
साइबर क्राइम सेल एसपी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम सेल में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। देश और प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी पर ही भरोसा करें। इसके अलावा किसी अन्य साइट पर भरोसा न करें। जालसाज इंजेक्शन लगाने, पहले वैक्सीन लगाने, नकली वैक्सीन को बेचने के लिए डार्क नेट का सहारा लेते हैं। इसे लेकर पूरे प्रदेश में अलर्ट जारी किया गया है।
खतरे में पड़ सकती है जिंदगी
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि कोरोना की कोई भी वैक्सीन भारत में इस्तेमाल के लिए फिलहाल उपलब्ध नहीं है। विदेशों में भी यह हाथों-हाथ उपलब्ध नहीं है। कुछ देशों में एक निश्चित प्रक्रिया के तहत ही वैक्सीन लगाई जा रही है। ऐसे में इंटरनेट पर कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता पूरी तरह से फ्रॉड है। इसके झांसे में कतई न आएं। आर्थिक नुकसान तो होगा ही, संभव है कि साइबर अपराधी आपको वैक्सीन के नाम पर कोई और इंजेक्शन बेंच दें। ऐसे इंजेक्शन का इस्तेमाल आत्मघाती साबित हो सकता है।