जब आंखों के सामने पिता की मृत्यु हो जाए, बेटा मुखाग्नि दे और लाश को छू तक न पाए तो उसके दिल पर क्या बीतेगी? पंकज त्रिपाठी ने कुछ ऐसी ही असह्य वेदना भोगी। उनके पिता दरोगा बलराम त्रिपाठी गुरुवार को कोरोना के शिकार हो गए। पाल पोसकर बड़ा कर नौकरी योग्य बनाने वाले पिता की मौत के बाद उनके शव से वे लिपटकर रो भी नहीं सके।