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Exclusive: सीएम योगी ने तरेरी आंखें तो ढहा दिए गए कब्जे, पर नहीं दबोचे भू-माफिया

Sat, 07 Aug 2021 12:57 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
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फरियादी की पीड़ा सुन नाराज हुए मुख्यमंत्री। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में जमीन के मामलों में कब्जे की शिकायतें मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पहुंचने के बाद सीएम ने आंखें तरेरी तो कब्जे ढहा दिए गए, मगर कब्जा करने वाले के खिलाफ नजीर बनने लायक कोई कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक की उनकी गिरफ्तारी तक नहीं हुई। नतीजा, भू-माफिया आज भी स्वच्छंद हैं। उनकी फ्रेंचाइजी लेकर, छुटभैया, कमजोर लोगों की जमीनों पर कब्जे कर ले रहे हैं। जबरन एग्रीमेंट, औने-पौने दाम पर एग्रीमेंट के बाद पूरी रकम देने की बजाए प्रताड़ित करने की अनगिनत कहानियां लोगों की जुबान पर हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर के पॉश इलाके गोलघर के खोवा मंडी गली में कब्जा का मामला हो या किनारे बसी अमरूद मंडी का, सभी जगहों पर भू-माफिया द्वारा जमीन कब्जा करने के मामले सामने आ चुके हैं।

इनमें भी भू-माफिया जेल नहीं गए, बल्कि कब्जे को खाली करा दिया गया। खैर, कब्जा हटने के बाद पीड़ितों को भी लगता है कि उनका काम हो गया, इस वजह से वे भी फिर पैरवी नहीं करते। रोजाना ही पुलिस और प्रशासनिक अफसरों तक पहुंचने वाली शिकायतों में से 30 फीसदी जमीन के विवाद से जुड़ी होती हैं। पुलिस वाले प्रशासनिक मामला बताकर, वहां पर शिकायत की दलील देते हैं तो प्रशासनिक अमला वापस पुलिस के पास भेज देता है। एकदम फुटबाल की तरह। क्या गोरखपुर में अब भी रह गए हैं, भू-माफिया?, हिंदू सेवाश्रम में आयोजित जनता दर्शन में गुरुवार को सीएम योगी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से तल्खी से पूछे गए इस सवाल से तमाम पीड़ितों के मन में उम्मीद जागी है कि शायद अब कुछ होगा। लेकिन, अब तक के मामलों में हुई कार्रवाई से इसकी धुंधली सी उम्मीद भी नहीं जगाती।
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जनता दरबार में लोगों की फरियाद सुनते सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।
लंबे समय तक जमीन कब्जे का दंश झेलने के बाद हाल ही में सीएम के जनता दर्शन से राहत पाने वाले रायगंज के विजय कसेरा कहते हैं कि सीएम का तेवर देखकर अब तक अफसरान सीएम को दिखाने के लिए पंजीकृत भू-माफिया के खिलाफ हुई कार्रवाई की फाइलों से धूल झाड़ने लगे होंगे। उन्होंने उनके मंतव्य को नहीं समझा होगा कि जो भी जमीन कब्जा करने वाले हैं, वो भू-माफिया हैं और उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

लब्बोलुआब यह है कि दावे चाहे जितने कर लिए जाएं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उन्हीं मामलों में हो पा रही है, जिनमें फरियादी मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गया हो या किसी भले पुलिस-प्रशासनिक अफसर ने पीड़ित की बात ध्यान से सुन ली हो। वरना, बाकी मामलों में पीड़ित की अर्जी पुलिस और प्रशासन के बीच ही घूमती रहती है। ..और वह न्याय पाने के लिए खजनी तहसील के साधु शरण की तरह भटकते-भटकते दम तोड़ दे रहा है।
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वकील दिनेश चंद्र चौधरी। - फोटो : अमर उजाला।
वकील दिनेश चंद्र चौधरी कहते हैं कि पीड़ित शब्दजाल में उलझा दिए जाते हैं। अमूमन, किसी भी जमीन पर कब्जा करने वाले को बोलचाल में लोग भू-माफिया बोल देते हैं। जबकि, पुलिस भू-माफिया के लिए कानून की परिभाषा खोलकर उसके पैमाने पर नापने-जोखने लग जाती है। यहीं से जमीन कब्जा करने वालों के लिए राहत और पीड़ित के लिए अंतहीन धक्के खाने का रास्ता खुल जाता है।

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जनता दरबार में सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।
जमीन के दस्तावेज मंगाए गए, जांच शुरू
ताजा मामला गुरुवार को मुख्यमंत्री के जनता दरबार में सामने आया था। एक महिला ने कैंट इलाके के एक शख्स को भू-माफिया बताते हुए जमीन कब्जा करने का आरोप लगाया। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन से दस्तावेज मंगाए गए हैं, ताकि जांच की जा सके। एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु बताते है कि जांच कर जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से राजेंद्र यादव को मिला था न्याय। - फोटो : अमर उजाला।
केस एक
5 फरवरी 2021 को खोवा मंडी से सीएम के आदेश के बाद आनन फानन अवैध कब्जा को खाली कराया गया था। तब वहां रहने वाले राजेंद्र ने बताया था कि उनकी जमीन पर कब्जा था और प्रशासन से साठगांठ कर भू-माफिया ने जमीन पर कब्जा जमा लिया था। राजेंद्र की फरियाद के बाद सीएम ने नाराजगी जताई तब जाकर कब्जा हटाया गया और राजेंद्र को फिर से काबिज किया गया था, लेकिन इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई थी।
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पूर्व पार्षद को भगोड़ा घोषित करती पुलिस।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
केस दो
जनवरी 2021 में खजनी के बरी गांव निवासी अनीता देवी पत्नी धर्मवीर सिंह की जमीन को कब्जा करने के लिए पूर्व पार्षद रविंद्र निषाद ने बाउंड्रीवाल तोड़ दी थी। जमीन पर कब्जा भी जमा लिया था। इसकी शिकायत आने पर तत्कालीन एसएसपी जोगेंद्र कुमार के आदेश पर कब्जा खाली कराया गया था। तब पुलिस ने थोड़ी सख्ती की और पूर्व पार्षद को भगोड़ा तक घोषित किया था। इसके बाद फिर से जांच थम-सी गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
फैक्ट फाइल
पंजीकृत भू-माफिया- 31
कुल आई शिकायतें - 72
गलत पाई शिकायतें- 29
न्यायालय में विचाराधीन- 12
जांच जारी मामले-31
दर्ज राजस्व वाद- 19
दर्ज कराई गई एफआईआर- 2
 
दुरुस्त ही करते रहते हैं भू-माफिया की सूची
एंटी भू-माफिया अभियान की शुरुआत 2017 में हुई थी। लंबे समय बाद 29 नाम सामने आए, जिसमें 16 बेदाग लोगों को शामिल कर लिया गया था। तब प्रशासन और पुलिस वाले यही नहीं समझ पाए कि असल में भू-माफिया की सूची में शामिल करना किसे है, यही वजह है कि बाद में अफसरों को बैकफुट पर आना पड़ा और फिर 16 नाम निकालने पड़े। तब से यह सूची रोजाना ही घटती बढ़ती रहती है, लेकिन असल में कागजी निगरानी के अलावा इन मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। जब कभी कोई पुलिस अफसर के पास फरियाद लेकर आता है तो केस दर्ज कर पुलिस कार्रवाई कर देती है।
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