फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिवभक्तों की आस्था का केंद्र है तामेश्वरनाथ धाम, 350 साल पहले ऐसे हुआ था निर्माण, देखें तस्वीरें

Sat, 30 May 2020 07:49 AM IST
vivek shukla दीन दयाल शुक्ल, संतकबीरनगर।
विज्ञापन
1 of 6
तामेश्वरनाथ नाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
संतकबीरनगर जिले में स्थित ऐतिहासिक तामेश्वरनाथ धाम शिवभक्तों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है। अलौकिक और पौराणिक मान्यताओं को समेटे यह स्थान सामाजिक गतिविधियों का एक उदाहरण भी रहा है। यहां करीब एक माह तक चलने वाले महाशिवरात्रि मेले में चालिस वर्ष पहले लोगों के शादी के रिश्ते भी पक्के हुआ करते थे। इस मंदिर के देखरेख का जिम्मा यहां रह रहे भारती परिवार संभालते हैं। जो अपनी बारी के हिसाब से मंदिर की देखरेख करने के साथ ही उससे होने वाली आमदनी को खर्च करने के अधिकारी होते हैं।
विज्ञापन

2 of 6
तामेश्वरनाथ नाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
भारती परिवार से ताल्लुक रखने वाले बुजुर्ग बलदेव भारती ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह का निर्माण आज से करीब 350 वर्ष पूर्व बांसी के तत्कालीन राजा ने कराया था। उस समय भारती परिवार के पूर्वज सन्यासी टेकधर भारती के जिम्मे मंदिर का देखरेख सौंपा गया था। उन्होने बताया कि तामेश्वरनाथ में रह रहे भारती परिवार मूल रूप से हरनही तहसील के जैसरनाथ भरोहिया के निवासी हैं। गर्भगृह निर्माण के बाद जैसे-जैसे श्रद्धालु यहं आते गए मंदिर निर्माण का कार्य चलता रहा।

आज परिसर में मुख्य शिव मंदिर सहित करीब सोलह छोटे बड़े शिवालय और हनुमान मंदिर भी हैं। हर वर्ष श्रावणमास के महीने भर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचती है। इसी तरह पुरुषोत्तम मास में भी शिव भक्तों का यहां जमावड़ा होता है। महाशिवरात्रि में एक महीने तक अनवरत यहां मेले का आयोजन होता है। जिसमें लाखों श्रद्धालु शिव जी को जलाभिषेक करते हैं।
विज्ञापन

3 of 6
तामेश्वरनाथ नाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
महात्मा बुद्ध ने यहीं करवाया था अपना मुंडन संस्कार
ग्राम प्रधान नरेंद्र नाथ भारती बताते हैं कि महात्मा बुद्ध ने अपना मुंडन संस्कार यहीं कराया था। ऐसा उनके पूर्वज बताते थे। मंदिर परिसर में स्थित एक अर्धनारीश्वर मंदिर की आकृति भी बुद्ध कालीन मंदिर की ही तरह बना हुआ है। इस बात की तस्दीक मंदिर पर पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम ने भी किया था। आज भी लोग अपने बच्चो का मुंडन संस्कार यहां करवाते हैं।  

4 of 6
तामेश्वरनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला।
द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान कुंती ने किया था शिवलिंग की स्थापना
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडव अपनी माता कुंती के साथ तामेश्वरनाथ धाम में पहुंचे थे। जहां शिव की आराधना के लिए कुंती ने शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर से थोड़ी दूर रामपुर में स्थित एक पोखरे का निर्माण भी पांडवों ने कराया था। जो आज द्वापरा के नाम से जाना जाता है। लोगों का ऐसा मानना है कि इस पोखरे का निर्माण द्वापर युग में होने के वजह से इसका नाम द्वापर रहा होगा। पोखरे के निर्माण में प्रयुक्त ईंट भी अपनी ऐतिहासिक स्थिती को बयां करते है।
विज्ञापन

5 of 6
तामेश्वरनाथ नाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
अस्सी के दशक में महाशिवरात्रि मेले मे शादी के रिश्ते भी होते थे पक्के
आज से करीब चालिस वर्ष पूर्व तामेश्वरनाथ धाम में आयोजित महाशिवरात्रि मेले में शादी के रिश्ते भी पक्के होते थे। बलदेव भारती, रामकृष्ण भारती, गंगेश भारती ने बताया कि महाशिवरात्रि मेले में दूर दराज से आए लोग यहीं पर अपने बेटे और बेटियों के लिए रिश्ते भी पक्के करते थे। मेला परिसर में अलग अलग बिरादरी की जमात इकट्ठा होती थी। जहां रिश्तेदारों के जरिए रिश्ते पक्के होते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
तामेश्वरनाथ नाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला।
महाशिवरात्रि मेले में अन्य प्रांतों से आने वाली दुकाने होती हैं आकर्षण का केंद्र
तामेश्वरनाथ धाम के महाशिवरात्रि मेले में बुलंदशहर, नानपारा, बहराइच की खजले की दुकानें और बिहार प्रांत के पटना शहर से आई मिठाई की दुकानों के साथ झूले और मौत का कुंआ लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहता है। मेले का लुफ्त उठाने के साथ ही लोग गृह उपयोगी सामान जिनमें लोहे के बर्तन, लकड़ी के सामान, बक्सा, आलमारी आदि की खरीदारी भी करते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें