फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजस्थान के कीमती पत्थरों से बना है यह मंदिर, दर्शन के लिए विदेशों से आते हैं लोग, तस्वीरें

Fri, 29 May 2020 05:20 PM IST
vivek shukla विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
विज्ञापन
1 of 5
jain temple - फोटो : अमर उजाला।
खुखुंदू का प्राचीन नाम काकंदी रहा है। यहां जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ का विशाल मंदिर और उसमें स्थापित भगवान की ऊंची मनमोहक प्रतिमा पूरे विश्व में जैन धर्मावलंबियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां विदेशों में बसे भारतीय मूल के जैन धर्म के अनुयायी भी भगवान के दर्शन के लिए आते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
jain temple - फोटो : अमर उजाला।
इस मंदिर के प्रति हिंदू धर्म के लोगों की आस्था भी कुछ कम नहीं है। वह भी भगवान के दर्शन और मंदिर के आकर्षण को देखने के लिए आते रहते है। देश, विदेश में बसे जैन धर्मावलंबी मंदिर के महत्व और विशेषता को समझ कर यहां पूजन-अर्चन करने पहुंचते रहते है। भगवान पुष्पदंत नाथ की जन्मस्थली होने से ही खुखुंदू का नाम चहुंओर प्रसिद्ध हैं।
विज्ञापन

3 of 5
jain temple - फोटो : अमर उजाला।
मंदिर का इतिहास कुछ इस तरह से है
खुखुंदू काकंदी नगरी राज्य से विख्यात था। मंदिर में स्थापित कीर्ति स्तंभों और शिलापट्टों पर अंकित मान्यताओं के अनुसार यहां इक्ष्वाकुवंशीय क्षत्रिय महाराजा सुग्रीव (रामायण वाले नहीं) व उनकी रानी जयरामा थी। रानी जयरामा के गर्भ से ही करोड़ों वर्ष पूर्व नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ काकंदी में जन्म हुआ। जन्म के समय सौधर्म इंद्र आदि देव-देवियों ने यहां रत्न की वर्षा कर प्रभु के कल्याणक महोत्सव मनाएं।

भारत के दिगंबर जैन-1 में काकंदी नगर का विस्तृत विवेचना मिलता है। 1871 में प्रकाशित कनिघम के सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी इस स्थान का विवेचना मिलता है। यहां के घने जंगलों में भगवान पुष्पदंत नाथ ने वर्षों तपस्या किया। वे जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर हुए। बताया जाता हैं कि जैन धर्म में महावीर स्वामी 24वें तीर्थंकर है। जबकि पुष्पदंत नाथ को नौवां स्थान प्राप्त है। उनकी महिमा पढ़कर जैन धर्म के लोग यहां पहुंचे और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया।
 

4 of 5
jain temple - फोटो : अमर उजाला।
जैन साध्वी की प्रेरणा से एक दशक पूर्व हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धार
खुखुंदू। जैन साध्वी ज्ञानमती माता एक दशक पूर्व भगवान पुष्पदंत नाथ के जन्मोत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लेने अन्य जैन धर्म अनुयायियों के साथ यहां आई।उन्होंने प्राचीन मंदिर को जीर्णशीर्ण देख जीर्णोद्धार की प्रेरणा दी। उनके मार्ग दर्शन में जैनधर्मावलंबियों के सहयोग से तत्काल मंदिर का नवीनीकरण शुरू हो गया। राजस्थान से मंगाए गए कीमती पत्थरों और कलाकारों ने मंदिर को भव्यता प्रदान किया। जबकि भगवान की प्रतिमा के लिए कीमती ग्रेनाइड पत्थर कर्नाटक से मंगाकर जयपुर में कलाकारों ने प्रतिमा को अंतिम रूप दिया।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
jain temple - फोटो : अमर उजाला।
यहां भगवान का 52फिट ऊंचा कीर्ति स्तंभ है।जिसके चारों तरफ भगवान पुष्पदंतनाथ की स्थापित मनमोहक प्रतिमा दूर से ही लोगों को आकर्षित करती है।यहां हर वर्ष नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ की जयंती पर जैन अनुयायियों का भारी रेला उमड़ता है। यह कार्यक्रम कई दिनों तक चलता है।जिसमें विभिन्न प्रांतों से बड़े पैमाने पर अनुयायियों का आना होता है।

जैनमंदिर प्रबंधक/ पुजारी बसंत कुमार जैन ने कहा कि केन्या,अमेरिका,ब्रिटेन समेत अन्य देशों में बसे भारतीय मूल के जैन धर्म के अनुयायी भगवान पुष्पदंत नाथ के दर्शन के लिए आते रहते हैं।हालही में केन्या से आएं जैन धर्म के अनुयायी श्रेयस प्रफुल्ल चंद राजा और हरीश ने भगवान पुष्पदंत नाथ की जन्मस्थली पर पहुंच भगवान की प्रतिमा का विधि पूर्वक पूजन अर्चन किया था।इसके अलावा महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली सहित देश के कोने कोने से श्रध्दालु दर्शन के लिए आते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें