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गोरखपुर: आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे प्रदेश के सभी आयुष कॉलेज, पाठ्यक्रमों में होगी एकरूपता

Sat, 28 Aug 2021 06:07 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

विश्वविद्यालय में होगी आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, सिद्धा आदि की पढ़ाई, 299 करोड़ की लागत से 52 एकड़ में बनेगा सूबे का पहला आयुष विश्वविद्यालय, दो साल में तैयार हो जाएगा
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आयुष विश्वविद्यालय का प्रस्तावित ले- आउट। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश में आयुष विधा के वर्तमान में 94 कॉलेज अलग-अलग विश्वविद्यालयों/ संस्थानों से संबद्ध हैं। इन आयुर्वेद के 67 यूनानी के 15 कॉलेज तथा होम्योपैथी के 12 कॉलेज शामिल हैं। आयुष विश्वविद्यालय के बन जाने के बाद ये सभी कॉलेज समन्वित रूप से आयुष विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिए जाएंगे। एक जगह संबद्धता होने से इन कॉलेजों के डिग्री व डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में एकरूपता रहेगी और सत्र का नियमन भी आसान होगा।

अब तक उत्तर प्रदेश के भीतर आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग, सिद्धा की चिकित्सा पद्धति, जिन्हें समन्वित रूप में आयुष कहा जाता है इसके लिए अलग-अलग संस्थाएं रही हैं। मगर अब इन सभी आयुष पद्धतियों की भटहट के पिपरी स्थित प्रदेश के पहले आयुष श्विविद्यालय के एक ही परिसर में पढ़ाई होगी। करीब 299 करोड़ की लागत से 52 एकड़ में बनने वाला यह विश्वविद्यालय मार्च 2023 तक संचालित होने लगेगा।
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आयुष विश्वविद्यालय का प्रस्तावित ले- आउट। - फोटो : अमर उजाला।
विश्वविद्यालय की चहारदीवारी निर्माण के लिए 2.4 करोड़ रुपये तथा मिट्टी भराई के लिए 3.99 करोड़ रुपये सरकार ने अवमुक्त भी कर दिए हैं। विश्वविद्यालय का वास्तुशिल्प भारतीय संस्कृति के अनुरूप होगा। इसके परिसर में एकेडमिक भवन, प्रशासनिक भवन, आवासीय भवन, छात्रावास, गेस्ट हाउस के अलावा ऑडिटोरियम और सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक भी होगा। अनुमान है कि आयुष विश्वविद्यालय के संपूर्ण प्रोजेक्ट पर तकरीबन एक हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

 
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आयुष विश्वविद्यालय का प्रस्तावित ले- आउट। - फोटो : अमर उजाला।
पठन-पाठन के साथ इलाज भी होगा
आयुष विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी और योग चिकित्सा की पढ़ाई और उस पर शोध कार्य तो होगा ही, लोगों को 'नो साइड इफेक्ट' वाली इन पद्धतियों से इलाज की सुविधा भी मिलेगी। यही नहीं आयुष विश्वविद्यालय, औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देकर किसानों के जीवन में खुशहाली भी लाएगा। विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की देखरेख में वह औषधीय खेती के लिए प्रेरित होंगे। विश्वविद्यालय परिसर में भी अलग से औषधीय पादप उद्यान विकसित किया जाएगा।

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आयुष विश्वविद्यालय का प्रस्तावित ले- आउट। - फोटो : अमर उजाला।
होम्योपैथिक कॉलेजों में हैं 1176 सीटें
यूपी होम्योपैथिक के निदेशक डॉ मनोज यादव और संयुक्त निदेशक डॉ विजय पुष्कर ने भी आयुष विश्वविद्यालय के निर्माण से जुड़ी जानकारी प्राप्त की है। दोनों अफसर शुक्रवार को लखनऊ से गोरखपुर आए, फिर तैयारियों को अंतिम रूप दिया। संयुक्त निदेशक डॉ विजय पुष्कर ने बताया कि यूपी में होम्योपैथिक के नौ राजकीय व दो निजी मेडिकल कॉलेज हैं। इनमें 1176 सीटें हैं।

 
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आयुष विश्वविद्यालय का (ले आउट) और गोरखनाथ विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
तीन राजकीय होम्योपैथिक कॉलेजों में एमडी की 53 सीटें हैं। इन सबकी संबऌता आयुष विश्वविद्यालय से होगी। आयुर्वेदिक कॉलेजों की संख्या 75 है। इसमें से आठ राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज हैं। यूनानी कॉलेजों की भी संबऌता रहेगी। इस मौके पर आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी डॉ राघवेंद्र मिश्रा व डॉ आशीष त्रिपाठी मौजूद रहे।
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