गोरखपुर में बारिश के कारण लगातार बढ़ते जलस्तर की वजह से राप्ती और रोहिन नदी खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। राप्ती नदी शुक्रवार को निशान से 91 सेंटीमीटीर ऊपर बह रही थी वहीं रोहिन नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। वह खतरे के निशान से 54 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई है। गोर्रा नदी भी खतरे के निशान से 61 सेमी ऊपर बह रही है। नदियों के पानी का दबाव तटबंधों पर दिखने लगा है। कई स्थानों पर नदी कटान कर रही है। घाघरा नदी के भी बढ़ने का क्रम जारी है। वह भी खतरे के निशान से 26 सेमी ऊपर पहुंच गई है। उसके बाढ़ की वजह से गोला तहसील के बहुत से गांव प्रभावित हुए हैं।
कैंपियरगंज क्षेत्र में सरुआताल उफान पर है। ताल के पानी ने ओवरफ्लो कर तबाही मचाना शुरू दिया है। जहां सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है वहीं मूसाबार-छतहरी मार्ग पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हो गया है। उधर, नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या हर रोज बढ़ती जा रही है। प्रशासन की तरफ से बाढ़ प्रभावित गांवों में हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जा रहीं हैं। बाढ़ में फंसे लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इस लिए 178 नावों को लगाया गया है। हर स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ व पीएसी के जवान अपने संसाधनों के साथ तैयार हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
नेपाल की पहाड़ियों से लेकर मैदानी इलाकों में तेज हुई बारिश का असर जिले में दिखने लगा है। नदियां खतरे के निशान से लगातार ऊपर की तरफ जा रही हैं। जैसे- जैसे नदियों का जलस्तर ऊपर पहुंच रहा है रोज नए गांव बाढ़ के पानी से घिरते जा रहे हैं।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ प्रभावित गांवों का आंकड़ा बढ़ कर 145 हो गया है। इससे 1,62,280 लोग प्रभावित हुए हैं। 6500 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। सबसे अधिक गोला तहसील के 53 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
उसके बाद सदर तहसील के 37 गांव बाढ़ से घिरे हैं। सहजनवां के 23 खजनी के 18 जबकि बांसगांव के सात, चौरीचौरा के छह तथा सबसे कम कैंपियरगंज का एक गांव बाढ़ से प्रभावित है। बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमें दौरा कर रही हैं। गांव गांव जाकर बीमार लोगों का उपचार कर रही हैं। इसके लिए 5 मेडिकल टीमें लगाई गईं थीं।