कोरोना की दूसरी लहर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती जिन 14 मरीजों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है, उनमें से 10 की मौत हो चुकी है। सिर्फ चार मरीज ही स्वस्थ होकर घर गए। मरने वालों में छह मरीज गोरखपुर के ही रहने वाले थे। जबकि चार अन्य जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। कॉलेज प्रशासन ने इसकी सूचना संबंधित जिले के सीएमओ को दी है।
जानकारी के मुताबिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने जीनोम सीक्वेसिंग के लिए अप्रैल और मई माह में कोरोना पीड़ितों के 30 नमूने आईजीआईबी (इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी) को भेजे थे। इनमें 27 मरीजों में डेल्टा, दो मरीजों में खतरनाक डेल्टा प्लस और एक मरीज में कप्पा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके बाद से जिले में हड़कंप है। इस बीच बीआरडी ने शुक्रवार को इन मरीजों का मिलान किया तो पता चला कि डेल्टा वैरिएंट के 27 मरीजों में 14 का इलाज मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में हुआ था। इनमें 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। इन मरीजों में छह गोरखपुर, एक सिद्धार्थनगर, एक देवरिया और एक कुशीनगर का रहने वाला था। जबकि कुल 30 मरीजों की बात करें तो 16 गोरखपुर के, छह देवरिया, दो संतकबीरनगर, दो कुशीनगर, एक बलिया और एक लखनऊ के रहने वाले हैं। इनमें 13 मरीजों की मौत की जानकारी मेडिकल कॉलेज के पास है। अन्य मरीजों की जानकारी के लिए बीआरडी ने संबंधित जिले के सीएमओ को सूची भेज दी है। माइक्रोबायोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि कोरोना के सभी वैरिएंट खतरनाक हैं। ऐसे में अभी भी लोग सतर्कता बरतें। क्योंकि दूसरी लहर अभी समाप्त नहीं हुई है। अगर लोग लापरवाही करेंगे तो इसका खामियाजा आने वाले दिनों में भुगतना पड़ेगा
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कोरोना का नया वैरिएंट।
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डेल्टा वैरिएंट भी रहा खतरनाक
अब तक जहां डेल्टा प्लस वैरिएंट को खतरनाक माना जा रहा था। वहीं मौत के आंकड़े देखने के बाद जिले में डेल्टा वैरिएंट को भी खतरनाक माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि डेल्टा के 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि डेल्टा प्लस के दो मरीजों में एक मरीज की मौत हुई है। एक मरीज स्वस्थ होकर घर पर है। वहीं, कप्पा वैरिएंट के भी एक मरीज की मौत हो चुकी है।
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कोरोना टीकाकरण
- फोटो : पीटीआई
वैक्सीनेशन ने बचाई जान
डेल्टा प्लस वैरिएंट की दूसरी मरीज एमबीबीएस की छात्रा है। वह मई माह में संक्रमित हुई थी, लेकिन उससे पहले उसने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली थी। इसकी वजह से वह गंभीर रूप से बीमार नहीं हुई। होम आइसोलेशन में रहकर वह ठीक हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन डेल्टा प्लस पर कितनी असरदार है। इस पर शोध चल रहा है। लेकिन एमबीबीएस की छात्रा के स्वस्थ होने के बाद इसकी उपयोगिता सिद्ध हुई है। ऐसे में लोग टीका जरूर लगवाएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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संक्रमितों में 16 युवा थे शामिल
जिन 30 मरीजों की जीनोम सीक्वेसिंग की रिपोर्ट आई है। उनमें 16 मरीज ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 से लेकर 42 साल के बीच है। इनमें पांच मरीजों की मौत हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी लहर में सबसे अधिक संक्रमित युवा ही हुए। इनकी मौत भी हुई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : istock
सामान्य संक्रमितों की तरह ही होगा नए वैरिएंट के संक्रमितों का इलाज
कोरोना के नए वैरिएंट के मरीजों का इलाज सामान्य कोविड मरीजों की तरह ही किया जाएगा। इन मरीजों को कोविड संक्रमितों के इलाज में जो दवाएं दी जा रहीं थीं, वही दी जाएंगी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि जब तक शासन से निर्देश नहीं आता तब तक पुराने इंतजाम ही रहेंगे। कोविड प्रोटोकॉल नए वैरिएंट के इलाज में भी सक्षम है। इस वैरिएंट से प्रभावित एक मरीज तो होम आइसोलेशन में ही ठीक हो गई है। बताया कि कोविड के प्रोटोकाल व इलाज के मानकों का सही से पालन हो तो इन वैरिएंट का इलाज संभव है। जब तक कोई नया निर्देश नहीं आएगा। तब तक इलाज के प्रोटोकाल में कोई बदलाव नहीं होगा।
प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ गणेश कुमार।
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि मई और जून माह में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती 14 मरीजों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इनमें 10 मरीजों की मौत हो चुकी है। इन मरीजों में छह गोरखपुर के रहने वाले हैं। जबकि अन्य अलग-अलग जिलों के हैं। इसकी सूचना संबंधित सीएमओ को भेज दी गई है।