फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुसीबत: कोरोना से ठीक होने के बाद धमनियों में जम रहा खून का थक्का, अब तक 27 मरीजों का हो चुका है ऑपरेशन

Fri, 09 Jul 2021 06:48 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना की दूसरी लहर में ब्लैक फंगस के मरीजों में गंभीर बीमारी का पता चला है। मरीजों के धमनियों में रक्त का थक्का जम रहा है। इसे वैज्ञानिक भाषा में आर्टरियल थ्रॉम्बोसिस नाम की बीमारी कहते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पोस्ट कोविड वार्ड में सात ऐसे मरीजों का ऑपरेशन हो चुका है। इन मरीजों के आंखों की धमनियों में ब्लड क्लॉटिंग हो गई थी, जिसे समय से हटा दिया गया। वरना उनकी आंखें निकलनी पड़ती। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि अगर ब्लैक फंगस का लक्षण दिखें तो तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें, वरना किसी भी अंग को काटना पड़ सकता है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष व पोस्ट कोविड वार्ड के नोडल प्रभारी डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि कोरोना के कारण नसों में खून का थक्का जमने के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन अब धमनियों में ब्लड क्लॉट के मामले सामने आ रहे हैं। बीआरडी में सात ऐसे मरीजों का ऑपरेशन भी किया गया है। इन मरीजों में ब्लैक फंगस की शिकायतें थी। जांच में उनकी धमनियों में रक्त का थक्का जमा मिला। इन मरीजों की उम्र 45 वर्ष के अंदर है।
विज्ञापन

2 of 5
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
फंगस की वजह से उनकी आंखों में इंजेक्शन लगाना पड़ा। ऐसे मरीजों को सलाह दी गई है कि वह तीन महीने तक अपने आंखों की समय-समय पर जांच कराते रहे। क्योंकि ब्लैक फंगस होने से ठीक होने के बाद भी लोगों में फंगस होने का दोबारा डर लगा रहता है। बताया कि ऑर्टरी में क्लॉट से दूसरे अंगों को भी खतरा रहता है।

 
विज्ञापन

3 of 5
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
देरी पर काटना पड़ सकता हैं अंग
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि अगर धमनियों में रक्त का थक्का जम रहा है। ऐसे मरीजों का सही समय पर इलाज शुरू हो जाता है, तो उनके अंगों को नुकसान नहीं पहुंचता है। लेकिन जरा भी देरी हुई तो उन अंगों को काटना पड़ सकता है। शुरूआती आठ से छह घंटे लक्षण के बाद अहम माने जाते हैं। यही वजह है कि यह बेहद खतरनाक है।

 

4 of 5
ऑपरेशन। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
27 मरीजों का हो चुका है ऑपरेशन
डॉ. राम कुमार जायसवाल ने बताया कि अब तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पोस्ट कोविड वार्ड में 115 से अधिक मरीज ब्लैक फंगस, व्हाइट फंगस की शिकायतें लेकर पहुंच चुके हैं। इनमें 27 मरीजों का ऑपरेशन भी किया गया है। सात मरीज ऐसे मिले, जिनकी धमनियों में रक्त का थक्का जमा था। इसके अलावा 10 मरीज ऐसे थे, जिनके जबड़े गल गए थे। इन सभी मरीजों को सलाह दी गई है कि वह तीन महीने तक अपने स्वास्थ्य पर पूरी नजर रखें।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कोरोना टेस्ट - फोटो : ट्विटर
नस और धमनी के अंतर को समझें
धमनी (आर्टरी) हृदय में शुद्ध रक्त ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा होती है। यह उसे शरीर के अंगों तक ले जाकर ऑक्सीजन पहुंचाती है। इसके बाद खून में ऑक्सीजन कम होता है, जिसे डीऑक्सीजनेटेड ब्लड कहते हैं। यह खून के नसों से होते हुए हृदय में वापस आता है। जबकि खून में ऑक्सीजन का स्तर पर्याप्त होने पर उसका रंग लाल होता है। ऑक्सीजन कम होने पर खून नीले और बैगनी रंग का दिखता है।

धमनियों में थक्के होने के लक्षण
  • पैरों में दर्द समय के साथ बढ़ता ही जाएगा।
  • अंगुलियों व अंगूठे का सुन्न पड़ना।
  • पैरों की गतिशीलता कम होना या बंद होना ।
  • ऑक्सीजन की कमी से शरीर पीला दिखना।
  • समस्या बढ़ने पर पल्स का पता नहीं चलना।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें