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'रामायण' के पहले एपिसोड को बनाने में लगे थे 15 दिन, जानिए किस्से

Mon, 13 Apr 2020 08:53 AM IST
Avinash Pal एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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Ramayan Serial - फोटो : twitter
दूरदर्शन पर पुराने कार्यक्रमों की वापसी के साथ ही दूरदर्शन का सुनहरा दौर भी वापस लौट आया है। रामायण से सर्कस तक, दर्शक इन कार्यक्रमों को बेहद पसंद कर रहे हैं। ऐसे में अमर उजाला अपने पाठकों को इन कार्यक्रमों से जुड़े कुछ न कुछ किस्से बता रहा है। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए आज बात करते हैं रामायण की।    
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Ramayan - फोटो : social media
रामानंद सागर की रामायण में दीपिका चिखलिया ने सीता का किरदार निभाया था। कुछ साल पहले एक साक्षात्कार में दीपिका ने रामायण की बात करते हुए बताया था, 'जब यह धारावाहिक शुरू हुआ था तो मेरी उम्र अधिक न थी और तब इस बात का तनिक भी अहसास नहीं था कि हम नया इतिहास रचने जा रहे हैं।'
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Ramayan - फोटो : twitter
दीपिका ने आगे कहा था, 'रामचरित मानस में तुलसीदास ने राम और सीता की वेशभूषा के बारे में बताया है और हमें वैसा ही दिखना था। यह पहली बार था जब टेलीविजन पर रामायण को दिखाया जा रहा था। उस समय टेलीविज़न पर दिखना कोई बहुत अच्छी बात नहीं मानी जाती थी।'

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रामानंद सागर की रामायण का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दीपिका ने आगे कहा था, 'पहला एपिसोड एक घंटे का था और उसे बनाने में करीब 15 दिन का समय लगा। मैं महीने में 27 दिनों तक वहां रहती थी। वहां मेकअप स्टूडियो होता था तो हम यहीं रहते थे और कोई भी मुंबई नहीं लौटता था।'
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Ramayan - फोटो : twitter
दीपिका ने आगे कहा था, 'एक अभिनेता के तौर पर सबने बेहतरीन प्रदर्शन किया और सबने इसे पसंद किया। छह महीने बीतते-बीतते हमें इस बात का अहसास हो गया था कि हम बड़े स्टार हो गए हैं। वो एक ऐसा समय था जब राम और सीता के किरदार भारतीयों के लिए महाराजा और महारानी की तरह हो गए थे।'
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रामायण - फोटो : सागर आर्ट्स और सोशल मीडिया
दीपिका ने बताया था, 'हम पूरी दुनिया में अपने सीरियल को प्रमोट करने गए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हमें सम्मानित करने के लिए दिल्ली बुलाया। हमें हर जगह पहचान मिली। वो ऐसा समय था जब टीवी सेट किसी धार्मिक स्थल में तब्दील हो जाते थे और हर रविवार को सुबह लोग रामायण देखने के लिए टीवी सेटों के इर्द-गिर्द इकट्ठा हो जाते थे। जब हम बाहर निकलते थे तो लोग हमारे पैर छूते थे। वो समझते थे कि हम वाक़ई राम और सीता हैं। आज भी जब हम बाहर जाते हैं तो लोग हमें पहचान लेते हैं।'
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