मुनव्वर फारूकी इंटरव्यू
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मुनव्वर फारूकी ने 'बिग बॉस 17' की ट्रॉफी उठाने के अनुभव को साझा करते हुए कहा, 'यह एहसास अवास्तविक था, जिस तरह से मेरी यात्रा रही है, वह पल ऐसा था कि मैं उस ट्रॉफी का वजन महसूस कर सकता था। इस ट्रॉफी की मुझे बहुत कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन यह इसके लायक है। अंत में, जो महत्वपूर्ण था वह सिर्फ ट्रॉफी को घर ले जाना नहीं था, बल्कि बहुत सी चीजें थीं।' मुनव्वर ने ट्रॉफी अपनी मां को समर्पित करते हुए एक खूबसूरत शायरी बोली, 'तू साथ न मां, पर साथ तेरा साया था, कितना मशहूर रुतबा एक कमाया था, वो तोड़ने आए थे मेरा मिट्टी का महल, लेकिन बेटा मुमताज का उनका ताज छीन के आया था।'