मनमोहन देसाई की जब भी चर्चा होती है तब हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का जिक्र जरूर होता है। मनमोहन देसाई ने अपने करियर में ज्यादातर फिल्में अमिताभ बच्चन को ही लेकर निर्देशित की हैं और ‘गंगा जमुना सरस्वती’ व ‘तूफान’ को छोड़कर सारी फिल्में हिट रही हैं। लेकिन, क्या आपको पता है कि मनमोहन देसाई ने बिना अमिताभ बच्चन के भी खूब सारी हिट फिल्में दी हैं और वह भी एक या दो नहीं, पूरी दस! चलिए बताते हैं आपको ‘मनजी’ के नाम से मशहूर रहे निर्देशक मनमोहन देसाई की इन फिल्मों के बारे में...
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छलिया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
छलिया (16 सितंबर 1960)
साल 1960 में रिलीज 'छलिया' फिल्म से ही मनमोहन देसाई की बॉलीवुड में अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की। इस फिल्म का निर्माण उनके बड़े भाई सुभाष देसाई ने किया था। इस फिल्म में राज कपूर, नूतन और प्राण मुख्य भूमिकाओं में थे। संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी के संगीतबद्ध गीत ‘छलिया मेरा नाम’ और ‘डम डम डिगा डिगा’ उन दिनों काफी लोकप्रिय हुए थे। इस फिल्म से पहले राज कपूर की फिल्मों के संगीत शंकर-जयकिशन दिया करते थे।
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बदतमीज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बदतमीज (1 जनवरी 1966)
मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी फिल्म 'बदतमीज' का निर्माण जगदीश वर्मा ने किया था। साल 1963 में रिलीज फिल्म 'ब्लफ मास्टर' के बाद शम्मी कपूर ने इस फिल्म में मनमोहन देसाई के निर्देशन में दूसरी बार काम किया था। इस फिल्म में शम्मी कपूर के अपोजिट साधना की लीड भूमिका थी। यह फिल्म उस वर्ष की दस सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में शामिल थी।
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किस्मत
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किस्मत (31 दिसंबर 1968)
फिल्म 'किस्मत' एक रोमांटिक पारिवारिक थ्रिलर फिल्म थी। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण कमल मेहरा ने किया था। इस फिल्म में विश्वजीत, बबीता और हेलेन की मुख्य भूमिकाएं थी। फिल्म की कहानी देश भर में सिलसिलेवार बम धमाकों से शुरू होती। पुलिस कमिश्नर इस बात से हैरान हैं कि इन हमलों के पीछे कौन है। कमिश्नर को एक गुमनाम कॉल आती है जहां कॉल करने वाला कहता है कि वह जानता है कि विस्फोटों के पीछे के मास्टरमाइंड कौन हैं और उनके सहयोगी कौन हैं। यह फिल्म उस साल की सफल फिल्मों में से एक थी।
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सच्चा झूठा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सच्चा झूठा (1 मई 1970)
फिल्म 'सच्चा झूठा' एक एक्शन कॉमेडी फिल्म थी। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण विनोद दोषी ने किया। इस फिल्म में राजेश खन्ना मुमताज और विनोद खन्ना की मुख्य भूमिकाएं थी। इस फिल्म में राजेश खन्ना ने दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी एक साधारण युवक भोला की है जिसका हमशक्ल रंजीत कुमार उसकी सादगी का फायदा उठाता है। यह फिल्म साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। राजेश खन्ना के अभिनय को इस फिल्म में समीक्षकों द्वारा सराहा गया।
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रामपुर का लक्ष्मण
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रामपुर का लक्ष्मण (26 जुलाई 1972)
फिल्म 'रामपुर का लक्ष्मण ' का एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी इस फिल्म का निर्माण एए नाडियाडवाला ने किया था। इस फिल्म में रणधीर कपूर, रेखा और शत्रुघ्न सिन्हा की मुख्य भूमिकाएं थी। इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा ने राम भार्गव और कुमार की दोहरी भूमिका निभाई थी। यह साल 1972 की सफल फिल्मों में से एक रही। इस फिल्म का रीमेक तमिल में ‘मंगुडी माइनर’ नाम से किया गया।
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भाई हो तो ऐसा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
भाई हो तो ऐसा (11 मई 1972)
फिल्म 'भाई हो तो ऐसा' में जितेंद्र, हेमा मालिनी और शत्रुघ्न सिन्हा की मुख्य भूमिकाएं थीं। यह फिल्म साल 1966 की तेलुगु फिल्म 'अस्तिपारुलु' की रीमेक है,जिसे पहले तमिल में 1968 में 'एन थंबी' के नाम से बनाया गया था । फिल्म 'भाई हो तो ऐसा' साल की हिट फिल्म रही है। इस फिल्म की सफलता के बाद मनमोहन देसाई ने अपनी फिल्मों में ज्यादातर में दो भाइयो या मां-बेटे के मिलने-बिछड़ने की कहानी को दिखाया।
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आ गले लग जा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आ गले लग जा (16 नवंबर 1973)
फिल्म 'आ गले लग जा' एक रोमांटिक फिल्म थी। इस फिल्म की कहानी मनमोहन देसाई की पत्नी जीवनप्रभा देसाई ने के बी पाठक और प्रयाग राज के साथ मिलकर लिखी थी। फिल्म की कहानी प्रीति नाम की एक युवा चिकित्सक की है जो गर्मियों की छुट्टियों में शिमला आती है जहां पर उसकी मुलाकात प्रेम से होती है। शुरुआत में प्रीति, प्रेम से बहुत चिढ़ती है, लेकिन बाद में उससे प्यार हो जाता है। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शशि कपूर , शर्मिला टैगोर और शत्रुघ्न सिन्हा की मुख्य भूमिकाएं थी। यह फिल्म साल 1973 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म थी।
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रोटी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
रोटी (18 अक्टूबर 1974)
फिल्म 'रोटी' मनमोहन देसाई की कालजयी फिल्मों में से एक रही है। इस फिल्म का निर्माण राजेश खन्ना ने खुद ही रजनी देसाई के साथ मिलकर किया था। मंगल सिंह के किरदार में राजेश खन्ना और बिजली के किरदार में मुमताज की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। वही मनमोहन देसाई के करियर की यह सबसे सफल फिल्मों में से एक रही है। ये वो दौर था जब राजेश खन्ना सुपरस्टार थे। उस साल की यह सबसे सफल फिल्म रही है।
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चाचा भतीजा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
चाचा भतीजा (11 जनवरी 1977)
साल 1977 मनमोहन देसाई के लिए बहुत ही लकी साल रहा है। 'चाचा भतीजा' के अलावा इस साल उनकी 'परवरिश', 'धरम वीर', और 'अमर अकबर एंथनी' जैसी फिल्में हिट रही। फिल्म 'चाचा भतीजा' धर्मेंद्र और रणधीर कपूर की जोड़ी पहली बार एक अलग अवतार में दिखी। चाचा-भतीजा बनकर दोनों ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी ये फिल्म उनकी पिछली फिल्मों से बिल्कुल अलग थी। कहानी में परिवारवाद को देसाई ने बेहद खूबसूरती से दिखाया था।
फिल्म 'धरम वीर' एक एक्शन-ड्रामा फिल्म थी। इस फिल्म में मनमोहन देसाई ने धर्मेन्द्र और जितेंद्र को एक साथ एक फिल्म में लाकर बाकी फिल्म मेकर्स को चौंका दिया था। दोनों ही उस जमाने के बड़े स्टार थे। इस फिल्म का निर्माण मनमोहन देसाई के बड़े भाई सुभाष देसाई ने किया था। इस फिल्म में धर्मेंद्र और जीतेन्द्र के अलावा जीनत अमान, नीतू सिंह और प्राण की मुख्य भूमिकाएं थी। इस फिल्म में बॉबी देयोल ने अपने पिता के बचपन की भूमिका में नजर आए थे। यह फिल्म उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी।