संदीप और पिंकी फरार
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘संदीप और पिंकी फरार’ हिंदी सिनेमा के निर्देशकों की उस सोच की फिल्म है जिसमें कोई निर्देशक एकाएक खुद को एक अलग तरह का फिल्मकार मानने लगता है। उसे लगता है कि उनसे इतना वर्ल्ड सिनेमा देख लिया है कि वह गलत हो ही नहीं सकता। लेकिन, ‘संदीप और पिंकी फरार’ के दर्शक गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, मुरादाबाद, पटना, पुणे और जयपुर के दर्शक हैं। न्यूजर्सी के नहीं। ये उतावले दर्शक हैं। इन्हें हरियाणवी पुलिस अफसर ‘पाताललोक’ जैसा चाहिए। पिंकी जैसा नकली नहीं। संदीप वालिया उर्फ सैंडी में बैंकर फिर भी दिबाकर ने ठीक ठाक छाप लिया है। लेकिन, फिल्म की कहानी और इसका निर्देशन इसकी सबसे कमजोर कड़ियां हैं।