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Movie Reviews of The Week: बीते हफ्ते की रिलीज में ‘पटना शुक्ला’ रही नंबर वन, यहां पढ़ें सारे मूवी रिव्यूज

Mon, 01 Apr 2024 09:44 AM IST
मोहम्मद फायक अंसारी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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मूवी रिव्यूज ऑफ द वीक - फोटो : अमर उजाला
मार्च के महीने के आखिरी हफ्ते में सिनेमाघरों से लेकर ओटीटी तक किस्म-किस्म की कहानियों को देखने का मौका दर्शकों को मिला। बड़े परदे पर तब्बू, करीना कपूर और कृति सेनन की कॉमेडी फिल्म ‘क्रू’ ने दर्शकों का दिल जीता तो ओटीटी पर उससे भी आगे रही इकलौते रवीना टंडन के कंधों पर टिकी फिल्म ‘पटना शुक्ला’। हॉलीवुड फिल्मों के शौकीनों की लॉटरी लगी फिल्म ‘गॉडजिला x कॉन्ग’ से। मलयालम सिनेमा और भोजपुरी सिनेमा ने भी इस दौरान हिंदी भाषी दर्शकों का दिल जीतने की कोशिशें की, लेकिन ये प्रयास उतना कामयाब नहीं रहा, जितने की उम्मीद इनके निर्माताओं ने की होगी। ओटीटी पर सबसे खराब कार्यक्रम बीते हफ्ते का रहा ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’। घिसी पिटी पटकथा के चलते इसका पहला एपिसोड ही दर्शकों ने नकार दिया। इन सारी फिल्मों और सीरीज के रिव्यू आप पढ़ सकते हैं, यहां एक साथ, एक ही क्लिक में...
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पटना शुक्ला रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
अव्वल नंबर ‘पटना शुक्ला’
फिल्म ‘पटना शुक्ला’ अपनी चंद लेखकीय और निर्देशकीय खामियों के बावजूद अगर एक दर्शनीय फिल्म और सामाजिक सिनेमा बन पाती है तो उसमें फिल्म की कहानी, इसकी पृष्ठभूमि और इसकी मुख्य कलाकार रवीना टंडन का अभिनय सबसे अहम है। ये फिल्म कुछ कुछ उसी पृष्ठभूमि पर है जिस पर हालिया रिलीज फिल्म ‘भक्षक’ बनी। खान सितारों का भी ये दूसरा दौर चल रहा है। आमिर खान ‘लापता लेडीज’ बना रहे हैं। शाहरुख खान ने ‘भक्षक’ बनाई। और, सलमान खान ने हालांकि अपनी भांजी को लेकर ‘फर्रे’ बनाई लेकिन आमिर और शाहरुख के सामाजिक सिनेमा को आगे बढ़ाया है सलमान के भाई अरबाज खान ने अपनी इस नई फिल्म ‘पटना शुक्ला’ में। फिल्म का शीर्षक इसकी मुख्य कलाकार के किरदार के लोकप्रिय होने से मिला नाम है। फिल्म में इस किरदार का नाम है तन्वी शुक्ला।
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फिल्म क्रू - फोटो : अमर उजाला
‘क्रू’ का कॉमेडी कमाल
तो जिस देश में हवाई जहाज चलाने वाली कंपनियों के बंद होते जाने का लंबा इतिहास रहा हो और जहां खूबसूरत परियों के बीच रहने वाले शहजादे जैसा एक हवाई जहाज कंपनी का मालिक अपनी सारी दौलत विदेश में ले जाकर मजे कर रहा हो, वहां एक ‘सच्ची’ सी घटना पर एक मजाकिया फिल्म बनाना आसान काम नहीं है। सिनेमा यही है। ये समाज की सच्चाई दिखाता है। बहुत चतुराई से दर्शकों को देश की असल नब्ज पकड़ाता है और खुद उनके साथ सिनेमाहाल की कुर्सियों पर बैठकर ठहाके लगाता है। हास्य और व्यंग्य की बहुत बारीक लकीर पर संतुलन बनाकर चलती निर्देशक राजेश ए कृष्णन की फिल्म ‘क्रू’ बहुत कमाल फिल्म हो, ऐसा नहीं है लेकिन ये फिल्म कोई दो घंटे का समय हंसी खुशी पार करा देती है और आज के समय में यही किसी फिल्म निर्देशक की सबसे बड़ी जीत है।
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'आडुजीवितम - द गोट लाइफ' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पृथ्वीराज की ‘गोट लाइफ’
मलयालम सिनेमा स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म 'आडुजीवितम - द गोट लाइफ' सत्य घटना पर आधारित है। मलयालम साहित्य की दुनिया में सबसे लोकप्रिय और सबसे ज्यादा बिकने वाले बेन्यामिन के लिखे उपन्यास 'आडुजीवितम' की कहानी को परदे पर फिल्म के निर्देशक ब्लेस्ली ने उतारा है। मूलरूप से मलयालम में  बनी यह फिल्म मलयालम के अलावा हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। फिल्म की कहानी एक मलयाली अप्रवासी मजदूर की है जो कमाने के लिए सऊदी अरब जाता है और वहां फंस जाता है।
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गॉडजिला एक्स कॉन्ग – द न्यू एम्पायर - फोटो : अमर उजाला
गॉडजिला और कॉन्ग के कारनामे
विदेशी फिल्मों का शौकीन शायद ही कोई ऐसा दर्शक होगा, जिसने आज तक गॉडजिला पर बनी एक भी फिल्म न देखी हो। फिल्म इतिहास की ये सबसे लंबे समय से चली आ रही फ्रेंचाइजी है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इसका नाम इसी बात के लिए दर्ज है। साल 1954 में रिलीज हुई पहली फिल्म से लेकर अब इस हफ्ते आई फिल्म तक लगातार 70 साल से ये दैत्याकार जीव दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। डर के प्रति आकर्षण का ये तिलिस्म जापान से चला और अब अमेरिका स्थित कंपनियां इसे खूब भुना रही हैं। करीब 1125 करोड़ रुपये की लागत से बनी फिल्म ‘गॉडजिला एक्स कॉन्ग – द न्यू एम्पायर’  दैत्याकार जीवों की काल्पनिक दुनिया यानी मॉन्स्टरवर्स के दो जानी दुश्मनों को एक साथ लाने की कहानी है और ये एक तरह से इनकी क्रॉसओवर फिल्म है।
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महादेव का गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला
रवि किशन का सनातनी साहस
फिल्म 'महादेव का गोरखपुर' की कहानी की शुरुआत साल 1525 से होती है। आयुध पूजा के दिन विदेशी आक्रमणकारी शिव मंदिर पर हमला करके कई शिव भक्तों को मार देते हैं। इससे पहले कि विदेशी आक्रमणकारी शिवलिंग को क्षति पहुंचाएं, आचार्य शिवलिंग समेत जल समाधि लेते हैं। फिल्म की आगे की कहानी पुनर्जन्म से जुड़ी हैं। आचार्य और वीरभद्र का पुनर्जन्म होता है और ये अपने पिछले जन्म के अधूरे काम को पूरा करते हैं। इस फिल्म के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है जब-जब शिवलिंग को क्षति पहुंचाने की कोशिश की गई, भगवान शिव के रूद्र अंश भारत की भूमि पर अवतरित हुए और विदेशी आक्रमणकारी से हमेशा शिवलिंग की रक्षा की।
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द ग्रेट इंडियन कपिल शो - फोटो : अमर उजाला
कपिल का फीका पड़ता करिश्मा
लीड राइटर, सीनियर राइटर, राइटर और असिस्टेंट राइटर मिलाकर कोई 10 लोगों ने ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ का पहला एपीसोड लिखा है, जिसमें नीतू कपूर बताती है कि ऋषि कपूर ने कभी ऊंची आवाज में किसी से बात नहीं की और यही संस्कार उनके दोनों बच्चों रणबीर और ऋद्धिमा में भी हैं। थोड़ी ही देर बाद रणबीर अपने पिता की वे यादें साझा करने लगते है जिसमें एक लेखक को उन्होंने बीच रास्ते अपनी कार से उतार दिया था, या फिर उन्हें अपने पापा की पहली ‘टपली’ उस दिन पड़ी थी, जब वह आर के स्टूडियो की पूजा में चप्पल पहनकर चले गए थे। जब तक ये बातचीत कपूर परिवार और कपिल के बीच चलती रहती है, मामला यूं सधा रहता है कि मानो अभी कुछ बड़ा और होने वाला है।
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