मैं सोलह बरस की
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हुआ यूं कि देव आनंद के तमाम चाहने वालों ने उनके खैरमकदम के लिए वहां एक पार्टी रखी थी और एक लड़की ने वहां देव आनंद की फिल्मों के हिट गानों पर ऐसा डांस किया कि लोग हैरान रह गए। उसका नाचना बंद हुआ तो लोग देर तक खड़े होकर तालियां बजाते रहे और लोगो को देख देव आनंद से भी रहा नहीं गया। वह खड़े हुए, इशारे से बच्ची को अपने पास बुलाया और वहीं सबके सामने एलान कर दिया कि वह उसे अपनी अगली फिल्म की हीरोइन बना रहे हैं।
‘मैं सोलह बरस की’ तब तक न कहानी तय थी, न बाकी कोई स्टार कास्ट। देव आनंद ने इससे पहले एक बहुत ही खूब खराबे वाली फिल्म ‘गैंगस्टर’ बनाई थी और एक फिल्म ‘रिटर्न ऑफ ज्वैल थीफ’ वह बना रहे थे। तो उन्होंने तय किया कि इसके बाद जो फिल्म इस नई लड़की के साथ वह बनाएंगे, उसमें नफरत, अदावत और बगावत की कोई जगह न होगी, वह फिल्म बस प्यार मोहब्बत की बातें करेगी। सुरीले तराने सुनाएगी और लोगों को एक बदलती रंगत का एहसास कराएगी। देव आनंद ने अभिनेत्री तनूजा से बात की। नवकेतन में उनकी ये तीन दशक बाद की वापसी की फिल्म बनी। तमाम सीनियर सितारे भी वह इस फिल्म में ले आए, मसलन ए के हंगल, सत्येन कप्पू, शशिकला, उर्मिला भट्ट आदि। लेकिन, हीरो? फिल्म की जो हीरोइन देव आनंद ने वैंकूवर में तलाशी उसका नाम था, नीरू बाजवा और हीरो का मौका इस फिल्म में मिला जस अरोरा को।
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