परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म शुरू होने पर जो कलाकार रिक्शा चलाता दिखता है वह आदिल हुसैन है। असम से निकलकर दिल्ली के एनएसडी और लंदन के ड्रामा स्टूडियो तक पहुंचने से पहले इस इंसान ने फिल्मी सितारों की मिमिक्री खूब की है। लेकिन, किसी रिक्शा वाले की मिमिक्री करना आसान नहीं है और आदिल ने यहां वह करके दिखाया है। 'दामुल', 'पार', 'सारांश', 'अर्धसत्य' और 'आक्रोश' जैसी फिल्मों जितनी लंबी एक लाइन अदाकारी की आदिल ने यहां खींची है। नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स की ज्यूरी ने ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्मों को अगले साल के पुरस्कारों में शामिल किया तो आदिल हुसैन बेस्ट एक्टर के दमदार दावेदार साबित होंगे। आप कितनी भी बढ़िया साइकिल, स्कूटर, कार या हवाई जहाज चला लेते हों लेकिन रिक्शे का हैंडिल पकड़कर सौ मीटर भी उसे चला लेना कमाल होता है। आदिल ने यहां सात-आठ बच्चों को बिठाकर रिक्शा खींचा है। किसी किरदार में उतर जाने की ये मेहनत ही इस फिल्म की जान है। बुच्ची हवालात में हो, स्कूल में हो, बीवी संग हो या बच्चे के साथ हो, बुच्ची ही लगता है।