विजय देवरकोंडा
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विजय ने कहा, "मेरी जिंदगी बहुत बदल गई है, लेकिन मेरे दिमाग में मैं अभी भी वही मध्यम वर्ग का लड़का हूं। मुझे अभी भी शैंपू की बोतल लगभग खाली होने पर पानी डालने की आदत है, इसलिए मैं बोतल में पानी डालकर फिर से इसका इस्तेमाल करता हूं। इसे फेंकने से पहले मैं देख लेता हूं कि अभी इसका और इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। इसी क्रम में चिरंजीवी ने कहा कि वह भी खत्म हो गए साबुन को फेंकने के बजाय एक और सप्ताह के लिए उपयोग करने के लिए छोटे साबुन के टुकड़ों को मिलाते हैं।"