वो सात दिन
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अनिल कपूर की हालत उन दिनों घर में छोरा गांव में ढिंढोरा वाली थी। वह चाहते थे ये रोल करना लेकिन बोनी से कह नहीं पा रहे थे। फिर फिल्म के डायरेक्टर बापू ने इसके लिए बात छेड़ी। रोल अनिल कपूर की उम्र और अनुभव के हिसाब से बड़ा था लेकिन उन्होंने इसे एक चुनौती समझा। खूब तैयारी की, खूब मेहनत की और बन गए प्रेम प्रताप पटियालेवाला। फिल्म में पहले प्रेम को यूपी के किसी शहर का होना था लेकिन अनिल को हरियाणवी बोलना ज्यादा आसान लगा हालांकि नाम के हिसाब से उनकी जुबान पंजाबी होनी चाहिए थी। लेकिन दिक्कतें अभी कहां खत्म होने वाली थी।
बोनी कपूर की पिछली फिल्म हम पांच की कमाई देखकर तमाम फाइनेंसर उनकी अगली फिल्म पर निगाहें जमाए बैठे थे। पद्मिनी कोल्हापुरे के बतौर हीरोइन साइन होने की खबरें भी उन तक पहुंच चुकी थी। सब इस गुंताड़े में थे कि प्रेमरोग और विधाता जैसी फिल्मों की हीरोइन की फिल्म में पैसा लगाकर उनके वारे न्यारे हो जाएंगे। लेकिन, जैसी ही बोनी ने ये एलान किया कि वो 7 दिन में पद्मिनी के साथ हीरो उनका छोटा भाई अनिल कपूर होगा, एक दो बड़े फाइनेंसर्स ने उनका फोन ही उठाना बंद कर दिया। लेकिन, बोनी ठहरे बोनी। भाई को हीरो बनाने के लिए कह दिया तो बस कह दिया। उन्होंने तमाम जुगाड़ लगाकर फिल्म का फोकस ठीक करने के लिए नसीरूद्दीन शाह से बात की।
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