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बाइस्कोप: जब माटुंगा में मिथुन से मिलने के लिए पब्लिक ने तोड़ दिए थे शीशे, और आ पहुंचा एक नया स्टार

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सुरक्षा - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला
मुंबई के माटुंगा स्थित सिनेप्लेक्स बादल, बरखा, बिजली में उस रात जमकर हंगामा हुआ। हुआ यूं कि 'सुरक्षा' के फर्स्ट डे नाइट शो में मिथुन अपने दो करीबी लोगों के साथ दर्शकों का रिएक्शन देखने पहुंच गए। इंटरवल में वह चुपचाप आकर मैनेजर के केबिन में बैठ गए और किसी ने खबर उड़ा दी कि मिथुन आया है। बस फिर क्या था पब्लिक शीशे तोड़कर मैनेजर के केबिन में घुस गई। एक दिन पहले गुरुवार तक मिथुन इसी इलाके में सरे राह यूं ही निकल जाया करते थे। फिर उस शुक्रवार को एक नए स्टार का जन्म हुआ। फिल्म 'सुरक्षा' ने मिथुन चक्रवर्ती को हिंदी सिनेमा का नया स्टार बना दिया था।

हिंदी सिनेमा में यशराज फिल्म्स की पेशकश एक था टाइगर और टाइगर जिंदा है के अलावा मेगाबजट जासूसी फिल्मों के नाम तलाशे जाएं तो गिनती दहाई के अंक तक भी नहीं पहुंचती है। ए वेडनेसडे जैसी चुस्त फिल्म बनाकर अपना करियर शुरू करने वाले नीरज पांडे की स्पेशल छब्बीस, नाम शबाना, बेबी और अय्यारी जैसी फिल्मों के अलावा जो फिल्में तुरंत जेहन में आती हैं, वे हैं महेंद्र संधू की एजेंट विनोद, सैफ अली खान की एजेंट विनोद, विश्वरूपम, रोमियो अकबर वॉल्टर और राजी।

लेकिन, जब हिंदी सिनेमा के दर्शक के पास न ओटीटी था, न रंगीन टीवी था और न ही था इंटरनेट पर मौजूद इफरात फिल्मों का गोदाम, तो वह बस परदे पर आंखें, फर्ज, कीमत और सुरक्षा जैसी जासूसी फिल्में देखकर खुश हो लेता था। इनमें से आखिर की तीनों फिल्में एक ही निर्देशक रविकांत नगाइच की बनाई हुई हैं, जो मशहूर सिनेमैटोग्राफर भी रहे हैं। मिथुन चक्रवर्ती के साथ बनाई उनकी पहली फिल्म सुरक्षा ही हमारी आज के बाइस्कोप की फिल्म है। जैसे फिल्म फर्ज ने जीतेंद्र के सुस्त पड़े करियर को फुर्ती का करंट लगा दिया था, वैसा ही कुछ फिल्म सुरक्षा ने मिथुन चक्रवर्ती के साथ 1979 में किया जो साल 1976 में अपनी पहली ही फिल्म में बेस्ट एक्टर का नेशनल अवार्ड जीतने के बाद भी स्ट्रगल ही कर रहे थे।
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सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म सुरक्षा मिलने के समय तक मिथुन चक्रवर्ती का करियर रफ्तार नहीं पकड़ पाया था और इस फिल्म की हीरोइन रंजीता तब तक ऋषि कपूर के साथ फिल्म लैला मजनू करके सुपरस्टार बन चुकी थीं। रंजीता को तब यही लगता था कि उन्होंने एक स्ट्रगलिंग एक्टर के साथ फिल्म साइन करके गलती कर ली। ऐसा इसलिए भी उन्हें लगता था क्योंकि अपनी दूसरी ही फिल्म अंखियों के झरोखे से में उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्फेयर अवार्ड नॉमीनेशन मिल गया था। इसी साल उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड की बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस कैटेगरी में भी नामांकन मिला फिल्म पति पत्नी और वो के लिए।

फिल्म पति पत्नी और वो में रंजीता तब के सुपरस्टार्स में गिने जाने वाले संजीव कुमार की हीरोइन बनी थीं। ऋषि कपूर, सचिन और संजीव कुमार के साथ काम करने के बाद रंजीता को मिथुन के साथ काम करना अपने स्तर से थोड़ा कम लग रहा था लेकिन, उन्हें क्या पता था कि इसी साल एक और फिल्म भयानक में भी उन्हें मिथुन के साथ देख दर्शक दोनों की जोड़ी इतनी पसंद करने लगेंगे कि आगे चलकर दोनों की जोड़ी हिंदी सिनेमा की हिट जोड़ियों में शुमार हो जाएगी। सुरक्षा के हिट होने के बाद मिथुन और रंजीता ने तमाम हिट फिल्मों में काम किया। शादी के बाद रंजीता कोई 15 साल के ब्रेक के बाद जब 2005 में फिल्मों में लौटीं तो उन्होंने एक फिल्म मिथुन के साथ भी साइन की। इस फिल्म का नाम था, जिंदगी तेरे नाम। 2012 में रिलीज हुई ये फिल्म रंजीता के करियर की अब तक की आखिरी फिल्म है।
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सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
इसे मिथुन की मेहनत का नतीजा कहें या उनकी मेहनत का फल कि जिस साल मिथुन की फिल्म सुरक्षा रिलीज हुई, उसी साल जेम्स बॉन्ड सीरीज की एक फिल्म ऑक्टोपसी की शूटिंग भी भारत में हो रही थी। हॉलीवुड फिल्मों के सितारे जब किसी दूसरे देश जाते हैं या किसी दूसरे देश के पत्रकारों से मुखातिब होते हैं तो वहां की कुछ लोकप्रिय चीजों के बारे में पहले से रिसर्च करके रखते हैं। उदयपुर में जब रोजर मूर से उनकी हिंदी फिल्मों की जानकारी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाम लिया मिथुन चक्रवर्ती का और कहा कि उन्हें पता चला है कि एक जासूस यहां भारत में भी अच्छा काम कर रहा है। मूर ने मिथुन को इंडियन जेम्स बॉन्ड कहा और ये भी कहा मिथुन की कद काठी और शरीर सौष्ठव उनसे बेहतर है। रोजर मूर के इस बयान ने मिथुन का नाम रातोंरात मशहूर कर दिया। मिथुन के फैंस के लिए रोजर मूर का इंटरव्यू किसी जश्न के न्यौते से कम नहीं था। अखबार तब इतना फिल्मों की खबरें छापते नहीं थी और पत्रिकाएं भी घर घर आती नहीं थीं, लेकिन मिथुन का नाम फिल्म सुरक्षा के साथ ही घर घर पहुंचने लगा था।

मिथुन की शुरुआती सफलता में उनकी फिल्मों के म्यूजिक और उनके डांस ने बहुत मदद की। मिथुन ने नाचने का अपना एक अलग अंदाज विकसित किया था। बेलबॉटम की मोहरी में चेन का आधा हिस्सा सिलवाने का फैशन यहीं से शुरू हुआ और यहीं से छोकरों ने मोटे सोल वाले जूते भी पहनने शुरू किए। जो अमिताभ, राजेश खन्ना, जीतेंद्र, धर्मेंद्र के फैन थे, वे मिथुन के फैन्स से जलते थे। लेकिन, सिनेमा में समाजवाद मिथुन से ही शुरू हुआ माना जाता है। वह सर्वहारा समाज के हीरो थे।

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सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जो युवा जमाने के पैमाने पर खूबसूरत नहीं थे, ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे, तीसमार खां नहीं थे, जिनके पास कार या मोटरसाइकिल नहीं थी, सब मिथुन के फैन होते गए। मिथुन ने रिक्शावालों, साइकिल चलाने वालों, मजदूरों और कामगारों की एक नई इमेज बनाई और लोगों को लगने लगा कि ये सुहाग वाला अमित कपूर उनका हीरो नहीं बल्कि धूप में तपकर काला हुआ ये गोपी ही उनके आसपास से निकला हीरो है। हजारों-लाखों लोगों को ये अपने बीच का लड़का लगा। इन्हीं भावनाओं ने आगे चलकर मिथुन को डिस्को डांसर बनाया और देश का हाइएस्ट इनकम टैक्स पेयर भी। और, डिस्को पर थिरकने की मिथुन की शुरूआत होती है, फिल्म सुरक्षा के इस गाने से..



बप्पी लाहिड़ी और एनेट पिंटो के गाए फिल्म सुरक्षा के इस गाने को उन दिनों के मशहूर गीतकार फारुख कैसर ने लिखा था। फारुख कैसर का जिक्र हाल ही में मैंने फिल्म कुर्बानी के बाइस्कोप में भी किया था। फिरोज खान, विनोद खन्ना की फिल्म कुर्बानी में फारुख ने तुझ पे कुर्बा मेरी जान, मेरा दिल मेरा ईमान, यारी मेरी कहती है यार पे कर दे सब कुर्बान, गाना लिखा था। और, यहां फारुख कैसर का लिखा जो गाना मिथुन पर हिट हुआ तो मिथुन ने फारुख कैसर को अपनी आने वाली तमाम फिल्मों में इज्जत के साथ अपने साथ रखा। यही वो पहला गाना है जो बप्पी लाहिड़ी का हिंदी फिल्मों के लिए गाया पहला गाना माना जाता है और इसी गाने के साथ मिथुन और बप्पी लाहिड़ी का एक अनोखा रिश्ता भी बना जो बरसों बरस तक तमाम फिल्मों में चलता चला गया।
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सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मिथुन के बालों का जो खास स्टाइल फिल्म सुरक्षा से जमाने के लाखों युवाओं का स्टाइल बना, वो स्टाइल बनाया था हेयर स्टाइलिस्ट शिराज ने। शिराज तब से ही मिथुन चक्रवर्ती के पर्सनल हेयर स्टाइलिस्ट रहे हैं। मिथुन चक्रवर्ती को अपने इर्द गिर्द संघर्ष के दिनों के साथी बनाए रखने का अब भी बहुत लगाव है। उनका स्टाफ अब भी वही है जो संघर्ष के दिनों का है। इसी स्टाफ ने उनके सुपरस्टारडम के दिन भी देखे और यही स्टाफ अब जब मिथुन एकांतवास में जीते हैं तो भी उनके साथ है।

फिल्म सुरक्षा की कहानी राजवंश की लिखी कहानी है। दिल्ली में सीबीआई के मुख्यालय में खबर आती है कि उनका एक काबिल जासूस मारा गया है, मामले की छानबीन के लिए एजेंट गोपी उर्फ गन मास्टर जी9 को बुलाया जाता है जो जेम्स बॉन्ड की तरह लड़कियों के साथ अय्याशी कर रहा है। लेकिन, एक बार मिशन संभालने को मिलता है तो गोपी सीरियस होकर काम करने निकलता है। कैप्टन कपूर के साथ हुए हादसे और एजेंट जैकसन का पता निकालने के बीच उसे प्रिया मिलती है। प्रिया को शक है कि गोपी ही उसके पिता का कातिल है। लेकिन, सच सामने आने पर दोनों साथ काम करते हैं और हीरालाल तक पहुंचते हैं। इसके बाद गोपी को मिलता है डॉक्टर शिवा का पता जो तबाही के तमाम इंतजाम करके बैठा है।
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सुरक्षा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रमेश पंत की लिखी फिल्म की पटकथा और संवाद बिल्कुल जेम्स बॉन्ड की फिल्मों की तरह आगे बढ़ती है और रविकांत नगाइच परदे पर इसे उसी अंदाज में पेश करने की कोशिश तो करते हैं लेकिन उनका बजट बार बार उनकी कल्पना को वास्तविकता बताता रहता है। फिल्म में आपको तमाम सीन ऐसे दिखेंगे जिनमें बच्चों के खेलने वाले खिलौनों की मदद ली गई है, लेकिन रविकांत नगाइच का निर्देशन इसे खराब नहीं लगने देता। देसी जुगाड़ से देसी जेम्स बॉन्ड बनाने की जो कोशिश रविकांत और उनकी टीम ने इस फिल्म में की, लोगों ने उसकी तारीफ की, उन्होंने फिल्म में दिखीं अजीबोगरीब चीजों पर ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया।

ये दौर अमिताभ बच्चन की सुहाग और मिस्टर नटवर लाल जैसी फिल्मों का था। ऋषि कपूर भी अपनी सरगम जैसी फिल्मों से जमाने में अपना जलवा बरकरार रखे हुए थे। मिडिल क्लास इंसान अमोल पालेकर की गोलमाल देखकर मनोरंजन कर रहा था। तो अपर क्लास और मिडिल क्लास को खुश रखने वाले इस सिनेमा के सामने मिथुन का सिनेमा चवन्नी क्लास यानी कि फर्स्ट क्लास में बैठने वाले दर्शकों के लिए बनना शुरू हुआ। और, मिथुन ने अपनी फिल्मों का कद धीरे बढ़ाना शुरू किया और जल्द ही पहले फैमिली क्लास और फिर बालकनी क्लास तक अपना दर्शक वर्ग बना लिया। साल 1979 में रिलीज हुई फिल्मों में फिल्म सुरक्षा टॉप 10 कमाई करने वाली फिल्मों में नौवें नंबर पर रही। और, यहीं से मिथुन का करियर एक नए सफर पर चल निकला। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।

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