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Imteyaz Hussain: कभी नहीं भूल सकता विधु विनोद की ये हरकत, मैंने विरोध किया तो दी करियर बर्बाद करने की धमकी

सार

नेटफ्लिक्स पर निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ की रिलीज के बाद से ही कभी उनके उस्ताद रहे निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा अपने इस शागिर्द को खूब निशाना बना रहे हैं। 
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इम्तियाज हुसैन - फोटो : अमर उजाला

नेटफ्लिक्स पर निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ की रिलीज के बाद से ही कभी उनके उस्ताद रहे निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा अपने इस शागिर्द को खूब निशाना बना रहे हैं। तंज कसते हुए हाल ही में उन्होंने ये भी कहा कि संजय को फिल्म संपादन बिल्कुल नहीं आता था और फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ का पहला ट्रेलर भी उन्होंने बहुत खराब काटा था।

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1942 ए लव स्टोरी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
गौरतलब है कि ‘हीरामंडी’ का संपादन संजय लीला भंसाली ने खुद ही किया है। इसी कार्यक्रम में विधु ने ये भी कहा कि संजय तब सिर्फ संजय भंसाली थे, संजय लीला भंसाली नहीं बने थे। लेकिन, क्या आपको पता है कि खुद विधु विनोद चोपड़ा भी पहले विधु विनोद ही थे, विधु विनोद चोपड़ा नाम उन्होंने फ्रांसिस फोर्ड कोपोला जैसा भारी भरकम असर लाने के लिए बाद में अपनाया। यही नहीं विधु ने अपने करियर का टर्निंग प्वाइंट बनी फिल्म ‘परिंदा’ के कैसेट पर उसके संवाद लेखक का नाम तक हटा दिया था!
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परिंदा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘परिंदा’ के संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन ‘अमर उजाला’ को एक खास बातचीत में बताते हैं, “जब मैं इस फिल्म का हिस्सा बना तो मुझे फिल्म की पटकथा का 16वां ड्राफ्ट मिला था। फिल्म में विलेन का नाम था पाट्या और इसे परेश रावल करने वाले थे। ये रोल नाना के पास कैसे गया इसका भी दिलचस्प किस्सा है। दो भाइयों की इस कहानी में बड़े भाई किशन का रोल सबसे पहले नसीरुद्दीन शाह को करना था। लेकिन, पूरी फिल्म सुनने के बाद उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी।”
 

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खामोश-विधु विनोद चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
विधु विनोद चोपड़ा की सिनेमाघरों में रिलीज हुई पहली फिल्म ‘खामोश’ का पोस्टर अगर देखेंगे तो उसमें फिल्म के नाम के ऊपर लिखा है, रिटेन, प्रोड्यूस्ड एंड डायरेक्टेड बाय विधु विनोद। इम्तियाज बताते हैं, ‘फ्रांसिस फोर्ड कोपोला जैसा भारी भरकम नाम रखने के लिए ही उन्होंने अपना पूरा नाम विधु विनोद चोपड़ा लिखना शुरू किया। संजय भंसाली को भी यहीं से ये ख्याल आया और उन्होंने अपनी शुरुआती फिल्मों के बाद अपनी मां का नाम बीच में लगाना शुरू किया। लेकिन नाम में क्या रखा है, इसका एहसास मुझे तब हुआ जब फिल्म ‘परिंदा’ के संवादों के ऑडियो कैसेट बाजार में आए।’

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इम्तियाज हुसैन-जैकी श्रॉफ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इम्तियाज बताते हैं, “फिल्म ‘शोले’ के बाद ‘परिंदा’ ऐसी दूसरी फिल्म है जिसके डॉयलॉग्स का कैसेट जारी हुआ। इस कैसेट के कवर पर छपा था ‘रिटेन, प्रोड्यूस्ड एंड डायरेक्टेड बाय विधु विनोद चोपड़ा’। ये कैसेट देखकर हिंदी सिनेमा के मशहूर निर्देशक शक्ति सामंत ने मुझे बुलाया और कहा, ‘ये कैसेट देखने के बाद कौन तुम्हें ‘परिंदा’ का डॉयलॉग राइटर मानेगा। मशहूर निर्देशक बी आर इशारा ने भी इसे लेकर विधु विनोद चोपड़ा को लंबा पत्र लिखा था।”


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इम्तियाज हुसैन-विधु विनोद चोपड़ा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जिस फिल्म को हिट कराने में उसके संवादों का सबसे बड़ा हाथ रहा हो और उसके लेखक का ही नाम कैसेट पर न हो, इसे देखकर इम्तियाज को बहुत गुस्सा आया। वह बताते हैं, “विधु का दफ्तर शक्ति सामंत के दफ्तर के बगल में ही था तो मैं कैसेट लेकर वहां चला गया और विधु से इस बारे में बात की। मैंने दफ्तर में मौजूद तमाम लोगों के सामने उन्हें खूब जलील किया और कहा कि मैं अब तुम्हारे साथ कभी काम नहीं करूंगा। मैं दफ्तर से ये कहकर बाहर निकला तो विधु ने पीछे से आवाज लगाई और धमकी दी कि जो तुमने किया है, उसके बाद कहीं काम नहीं मिलेगा।”

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इम्तियाज हुसैन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
संवाद लेखक इम्तियाज हुसैन को भी पहली मर्तबा तो विधु विनोद चोपड़ा की इस धमकी से डर लगा। वह अपने करियर को लेकर आशंकित भी हुए लेकिन तदबीर पर भरोसा करने वालों का तकदीर हमेशा साथ देती है। इम्तियाज चहकते हुए बताते हैं, “जिस दिन मैंने विधु को उनके ही दफ्तर में खरी खरी सुनाई, उसी दिन हेमा मालिनी के यहां से मुझे फोन आया। वह मुझसे अपनी बतौर निर्देशक पहली फिल्म ‘दिल आशना है’ के संवाद लिखवाना चाहती थीं। उन्होंने पूरा सम्मान और भरपूर पैसा भी दिया। इसके बाद तो मैंने धुआंधार फिल्में लिखीं। संजय दत्त की ‘वास्तव’ सुपर हिट रही। फिर ‘अस्तित्व’ के संवाद लिखी। नाना पाटेकर का पूरा किरदार ही फिल्म ‘परिंदा’ में मेरा रचा हुआ था। उनकी हिट फिल्म ‘गुलाम ए मुस्तफा’ के संवाद भी सुपरहिट रहे।” इम्तियाज हुसैन ने हाल फिलहाल में सतीश कौशिक निर्देशित आखिरी फिल्म ‘कागज’ के भी संवाद लिखे थे।

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