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जन्मदिन विशेष: पिता को ऑपरेशन टेबल पर छोड़ शूटिंग पर आ जाने वाले जॉनी की ये हैं अनसुनी कहानियां

Fri, 14 Aug 2020 10:56 AM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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हास्यकार जॉनी लीवर - फोटो : अमर उजाला
तीन सौ से ज्यादा हिंदी फिल्मों में काम करने वाले कॉमेडी अभिनेता जॉनी लीवर का बेशक कोई ताल्लुक फिल्म इंडस्ट्री से नहीं रहा। लेकिन, फिर भी वह कभी किसी सिफारिश के मोहताज नहीं रहे हैं। पर्दे पर उनकी उपस्थिति ही काफी थी लोगों को पर्दे से चिपकाने के लिए। किरदार तो उन्होंने कुछ गंभीर भी किए लेकिन उनकी पहचान और सही मायनों में उन्हें सफलता कॉमिक किरदारों में ही मिली। उनकी खास बात यह रही कि उनकी तारीफ अपने समय में सबसे बड़े कॉमेडियन रहे जगदीप, महमूद और जॉनी वॉकर भी दिल से करते थे। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ रोचक किस्से सुनाते हैं।
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जॉनी लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
मिमिक्री करके रेलगाड़ियों में पेन बेचे
फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले जॉनी का नाम जॉन राव हुआ करता था। वह अपने एक दोस्त केदार के साथ कुछ बनने के लिए पुणे चले गए। वहां उन्हें काम तो मिला नहीं इसलिए वह ट्रेनों में पेन बेचने लगे। जॉनी ने खुद एक बातचीत में बताया कि पेन बेचने का विचार उनके एक सिंधी दोस्त ने उन्हें दिया था। जॉनी अपने सिंधी दोस्त और केदार के साथ ट्रेनों में पेन बेचते थे। जब लोग पेन लेते नहीं थे तो जॉनी के दिमाग में विचार आया है कि क्यों न अभिनेताओं की मिमिक्री करके पेन बेचा जाए। तब से जॉनी अशोक कुमार और जीवन कुमार जैसे अभिनेताओं की मिमिक्री करने लगे और उनकी पेन की बिक्री तीन से चार गुना बढ़ गई।
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जॉनी लीवर - फोटो : instagram
किन्नरों से कम्पटीशन
जॉनी बचपन से ही बहुत शरारती थे। जब उनके मोहल्ले में किसी बच्चे का जन्मदिन या फिर कोई भी समारोह हुआ करता था तो अक्सर उस समारोह को करवाने वाले लोग उन्हें बुलाया करते थे। जो नहीं बुलाता था तो जॉनी अपने दोस्त केदार के साथ उस समारोह में घुस जाया करते थे। उनका सिर्फ एक ही मकसद था कि जो प्रोग्राम हो रहा है उसमें स्टेज पर माइक पकड़कर लोगों का मनोरंजन करना था। एक किस्सा याद करते हुए जॉनी के दोस्त केदार कहते हैं, 'एक बार एक समारोह में कुछ किन्नर आ गए और वह अपना राग गाते हुए पैसे मांगने लगे। जॉनी भाई ने उनके साथ जमकर कंपटीशन किया। अंत में किन्नर बोले कि जॉनी आप हमारे ग्रुप में आ जाओ। जॉनी ने इस कंपटीशन में काफी पैसे इकट्ठे कर लिए थे। वहीं सारे पैसे झाड़े और बोले कि यह रहे तुम्हारे पैसे। तुम रखो। और मैं चला।'

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जॉनी लीवर - फोटो : Twitter
अपने मोहल्ले में ही बनाए गुरु
जॉनी उस वक्त कुछ 15 से 16 साल के रहे होंगे तब उन्होंने अपने मोहल्ले में ही कुछ कार्यक्रम करना शुरू कर दिए थे। इसके लिए उन्होंने अपने मोहल्ले के ही प्रताप जानी नाम के अपने से बड़े शख्स को गुरु बनाया था। प्रताप से मिलने से पहले जॉनी उत्पल दत्त जैसे कलाकारों की मिमिक्री करते थे। उनकी इस प्रतिभा को देखकर ही प्रताप ने जॉनी को अपना शिष्य बनाया। जॉनी के सामने भाषा की बड़ी दिक्कत थी। वह सिर्फ टपोरी भाषा जानते थे। वह प्रताप जानी ही थे जिन्होंने जॉनी को सभ्य भाषा का ज्ञान दिया। प्रताप के ही कुछ कार्यक्रम करके जॉनी को अपने मोहल्ले में पहचान मिलना शुरू हो गई थी। जॉनी अभी भी प्रताप को अपना उस्ताद मानते हैं।
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जॉनी लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
जॉन राव से जॉनी लीवर बनने का किस्सा
अपने शुरुआती दिनों में जॉनी लीवर हिंदुस्तान लीवर कंपनी में काम करते थे। एक बार कंपनी में एक समारोह का आयोजन किया गया। जॉनी कंपनी में काम करते हुए अपनी मिमिक्री के लिए भी मशहूर थे। उन्होंने उस समारोह में अपने साथ काम करने वाले अपने वरिष्ठ अधिकारियों की मिमिक्री करके वहां काम कर रहे सभी लोगों का खूब मनोरंजन किया। इस बात से खुश होकर जॉनी के यूनियन लीडर ने स्टेज पर चढ़कर बोला, 'जिस आदमी ने पूरी लीवर की ऐसी तैसी कर डाली। आज से इसका नाम लीवर होगा।' जब जॉनी ने सिनेमा में कदम रखा तो उन्होंने अपना नाम जॉनी लीवर ही रखा।
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जॉनी लीवर - फोटो : Twitter
कल्याणजी-आनंदजी के शो से मिली पहचान
हिंदी सिनेमा की जानी मानी संगीत निर्देशक जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी उस समय कुछ स्टेज शोज किया करते थे। इनसे जॉनी की मुलाकात अभिनेत्री तबस्सुम ने करवाई थी। तबस्सुम का अपना एक अलग ग्रुप था जिसमें जॉनी भी शामिल थे। एक बार एक बहुत बड़ा शो किया गया जिसमें बप्पी लहरी, कल्याणजी-आनंदजी और आर डी बर्मन जैसे संगीतकार मौजूद थे। शो में प्रस्तुति देने वाले भी सभी बड़े बड़े सितारे थे। शो में एक खाली जगह को भरने के लिए आनंद ने जॉनी को स्टेज पर जाने के लिए कहा। जॉनी की मिमिक्री सुनकर उनके प्रशंसक तो पहले से ही बन चुके थे। जैसे ही जॉनी स्टेज पर पहुंचे तो जॉनी... जॉनी... की आवाजें आना शुरू हो गईं। तब से फिल्मी सितारे भी जान गए कि जॉनी क्या चीज हैं।
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जॉनी लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
अब्बास मस्तान की फिल्मों में खास किरदार
फिल्म निर्देशकों की जोड़ी अब्बास मस्तान की ज्यादातर फिल्मों में जॉनी लीवर नजर आते थे। एक इंटरव्यू में अब्बास मस्तान ने खुद बताया था कि वह अपनी फिल्में जॉनी लीवर का किरदार अलग से लिखा करते थे। बाजीगर, दरार, खिलाड़ी, बादशाह जैसी फिल्मों में जॉनी के अच्छे खासे किरदार हैं। 'बादशाह' फिल्म के दौरान के एक किस्से का जिक्र करते हुए अब्बास मस्तान ने बताया, 'एक दिन शूटिंग के एक सीन में जॉनी भाई मूड में नहीं नजर आए। पैकअप के बाद जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके पिताजी का एक बड़ा ऑपरेशन हुआ था। हमने सोचा कि अगर हमें पहले पता चल जाता तो आज शूटिंग कैंसिल की जा सकती थी। लेकिन उन्होंने कहा कि नहीं। काम बंद नहीं रहना चाहिए। शो मस्ट गो ऑन।'

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जॉनी लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
गुड्डी मारुति से जुड़ा मजेदार किस्सा
जॉनी लीवर की फिल्मों में उनकी सह कलाकार रही अभिनेत्री गुड्डी मारुति ने वर्ष 1988 की फिल्म 'कसम' के दौरान का एक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया, 'जॉनी अपनी ताकत की बहुत डींगें मारा करते थे। वह बताते थे कि वह बहुत बॉडी बिल्डिंग करते हैं। जब इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी जिसमें कादर खान और अरुणा ईरानी डांस कर रहे थे। तब एक सीन था जिसमें जॉनी मुझे उठाने वाला था। उस वक्त मेरा वजन कोई 120 किलो के आसपास रहा होगा। जॉनी को पूरा भरोसा था कि वह उठा लेगा। हालांकि, उसने मुझे उठाया लेकिन उस सीन के जब छह रीटेक हुए तो जॉनी की हालत बहुत पतली हो गई। दूसरे दिन जॉनी शूटिंग पर ऐसे आए जैसे हाथों में दो बाल्टी लटका कर ला रहे हों।'
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जॉनी लीवर और सुजाता लीवर - फोटो : सोशल मीडिया
छुट्टी के दिन वाले जॉनी
जॉनी जितने अच्छे कलाकार हैं उतने अच्छे इंसान भी हैं। यह बात उनको करीब से जानने वाले सभी लोग कहते हैं। जगदीप, महमूद, जॉनी वॉकर, गोविंदा, जूही चावला जैसे कलाकार इस मामले में इनकी बहुत तारीफ करते हैं। दरअसल जॉनी की जिस दिन काम से छुट्टी होती है उस दिन वह उन कलाकारों से मिलने का समय निकालते हैं जिन्हें दुनिया ने भुला दिया है। वह उनसे जाकर मिलते हैं और अपनी बातचीत से उनका खूब मनोरंजन करते हैं। इस काम के लिए जॉनी को खूब दुआएं भी मिलती हैं। यह काम उनका नियमित है।

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