“यकीन नहीं होता कि इस महीने के आखिर में मैं बतौर अभिनेता बीस साल पूरे कर लूंगा। अब तक के हिसाब से ये एक रोमांचक यात्रा रही है। हालांकि मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो मुड़ मुड़कर देखे और अतीत में खोया रहे लेकिन कभी कभार बीता हुआ अच्छा और बुरा समय याद कर ही लेना चाहिए। रोड टू 20 एक कोशिश है आपको मेरे जीवन के बतौर अभिनेता इन बीस सालों से होकर ले चलने की। शायद मैं कुछ यादों और अनुभवों को फिर से जी सकूं। ये उन सभी लोगों का जलसा है जिन्होंने इसे मुमकिन किया। वे अनगिनत लोग जिन्हें एक लंबे, थोड़ा सा अजीब लगने वाले विदेश से लौटे 22 साल के लड़के के देखे गए सपने में भरोसा था, वह सपना जिसे वह पिछले 20 साल से जी रहा है।” इसी साल 10 जून को अभिषेक बच्चन ने ये पोस्ट अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर डाली।
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अभिषेक बच्चन का फिल्मी सफर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सफर 20 साल का
अभिषेक बच्चन हिंदी सिनेमा में अपने आगमन के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं और पुरानी यादें ताजा कर रहे हैं, तो मुझे भी वे घटनाएं धीरे धीरे याद आती जा रही हैं जो अभिषेक बच्चन के शुरुआती दिनों से जुड़ी हैं। और, इनमें शामिल है एक जीवनपर्यंत न भुलाई जा सकने वाली रोड ट्रिप जो हुई थी उनके करियर की दूसरी फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ के लिए। यही फिल्म हमारे आज के बाइस्कोप की फिल्म भी है। साल 2000 अभिषेक बच्चन के लिए उनके करियर का सबसे उमंगों भरा साल रहा। इस साल उन्होंने फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से अपना डेब्यू किया। फिल्म में उनके साथ करीना कपूर ने भी अपने करियर की बोहनी की थी।
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उमराव जान
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘आखिरी मुगल’ के बाद
फिल्म निर्देशक जेपी दत्ता ने योजना तो बनाई थी अभिषेक के साथ ‘आखिरी मुगल’ बनाने की लेकिन बनी फिल्म ‘रिफ्यूजी’। ‘आखिरी मुगल’ में दिलीप कुमार को बहादुर शाह जफर का किरदार करना था और अभिषेक को बनना था उनका बेटा। लेकिन, लोगों को लगा ये कि दिलीप कुमार के होते हुए शायद ही अभिषेक की तरफ लोगों का उतना ध्यान जाए जितना कि किसी हीरो की डेब्यू फिल्म में दर्शकों का जाना चाहिए। लिहाजा ये फिल्म ठंडे बस्ते में चली गई। साल 2007 में जेपी दत्ता ने अपनी फिल्म ‘उमराव जान’ के फ्लॉप होने के तुरंत बाद ‘आखिरी मुगल’ फिर से शुरू करने की बात की थी, लेकिन फिर बात शायद बनी नहीं।
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तेरा जादू चल गया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
प्रोड्यूसर नंबर वन का जलवा
जेपी दत्ता की फिल्म ‘रिफ्यूजी’ की दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही अभिषेक बच्चन की उत्तर भारत के पत्रकारों से पहली मुलाकात हुई। दूसरी मुलाकात उनकी तय हुई उस समय प्रोड्यूसर नंबर वन के नाम से मशहूर रहे निर्माता वाशू भगनानी की फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ के लिए। लेकिन, अभिषेक बच्चन तब तक काफी बिजी हो चुके थे। उनके पास मनाली से दिल्ली आने तक का समय नहीं था अपनी ही फिल्म की प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए। बारिश का मौसम था, जुलाई की बात है। मनाली में उन दिनों राज कंवर की फिल्म ‘ढाई अक्षर प्रेम के’ की शूटिंग चल रही थी। जया बच्चन भी अपने बेटे के साथ मौजूद थीं। तो जब वाशू को ये लगा कि अभिषेक उनकी फिल्म का प्रचार करने दिल्ली नहीं आएंगे तो उन्होंने अपनी टीम को ये पता करने के लिए लगाया कि अगर वह दिल्ली और आसपास के पत्रकारों को मनाली लेकर आएं तो कितने लोग आ सकते हैं।
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तेरा जादू चल गया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बारिश का मौसम और 70 पत्रकार
यहां काम आया उस समय दिल्ली के पीआरओ नंबर वन हरीश शर्मा का नेटवर्क और उनका सौम्य व्यवहार। हरीश शर्मा इतने मिलनसार और लोगों को सम्मान देने वाले पीआरओ रहे हैं कि उनको कोई आसानी से ना नहीं कर पाता था। पहले एक बस तय हुई फिर लोग बढ़े तो दूसरी बस भी आ गई। करीब 70 लोग बारिश के मौसम में जान हथेली पर लेकर दिल्ली से सड़क के रास्ते मनाली जाने को तैयार हो गए। रास्ते में खराब सड़कें, किसी भी मोड़ पर बस के किसी खाई में समा जाने का अंदेशा लेकिन रुकते रुकाते किसी तरह लोग मनाली पहुंच ही गए। अभिषेक बच्चन और जया बच्चन दोनों हैरान कि कोई निर्माता उत्तर भारत की पूरी प्रेस कैसे मनाली में लाकर खड़ी कर सकता है, और वह भी इस मौसम में। लेकिन वाशू भगनानी को उन दिनों वही सब करने में मजा आता था जो पहले किसी ने न किया हो। उन्होंने माधवन और दीया मिर्जा की फिल्म ‘रहना है तेरे दिल में’ का म्यूजिक रिलीज धरती से हजारों फिट ऊपर आसमान में किया था, भारत से न्यूजीलैंड के रास्ते में।
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तेरा जादू चल गया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म एडिटर से डायरेक्टर
मनाली पहुंचने से पहले रास्ते में तमाम किस्से हुए। पैक्ड फूड तब इतना प्रचलन में था नहीं और जहां भी दोनों बसें एक साथ खड़ी होतीं तो न तो किसी ढाबे वाले के पास 70 लोगों को खाना खिलाने का इंतजाम होता और न ही किसी होटल में इतने सारे लोगों के नित्यक्रिया से निवृत्त होने का इंतजाम। राम राम करते हुए सब मनाली पहुंचे। शाम को प्रेस कांफ्रेस थी। डेविड धवन की फिल्में एडिट करते रहे ए मुथु को वाशू ने इस फिल्म से डायरेक्टर बना दिया था। वैसे डेविड खुद भी फिल्में एडिट करते करते ही डायरेक्टर बने हैं, लेकिन मुथु अपने उस्ताद से ज्यादा कुछ सीख नहीं पाए। वाशू को लगा था कि वह नया डायरेक्टर लाकर डेविड के सामने चुनौती खड़ी कर सकेंगे। लेकिन, वाशू का ये भाव उनके लिए ही नुकसानदायक रहा। और, मनाली में पत्रकारों की फौज देखकर माथा कुछ न कुछ अभिषेक बच्चन का भी चढ़ गया। प्रेस कांफ्रेस के बाद तय हुए इंटरव्यूज में भी वह देरी से आए थे।
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बस इतना सा ख्वाब है
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जब अभिषेक को हुआ बच्चन होने का गुमान
प्रेस का कारवां तो वाशू भगनानी ने जुटा था लेकिन अभिषेक को शायद लगा कि ये सब उनके नाम का करिश्मा है। और, इसी खुशफहमी में वह दिल्ली में अपनी अगली फिल्म ‘बस इतना सा ख्वाब है’ की शूटिंग के दौरान प्रेस से हाथापाई भी कर बैठे थे। इस मामले में उनके और दो और लोगों के खिलाफ बाकायदा एफआईआर दर्ज हुई थी। अभिषेक के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने वाले फोटोग्राफर उमेश पुरी और मुस्तफा कुरैशी पर बहुत दबाव भी पड़ा। उमेश पुरी तो तब कई रातें अपने घर में ही नहीं रुके थे। पूरे मामले की परिणति अदालत में दोनों शिकायतकर्ताओं के अपनी शिकायत वापस लेने के बयान के साथ हुई। उस दिन अमर सिंह ही अभिषेक बच्चन को अपने साथ लेकर दिल्ली की अदालत में पहुंचे थे। दिल्ली में शूटिंग के दौरान जो कुछ हुआ था, उसकी खबर उसी दिन मुंबई की प्रेस को निर्देशक महेश भट्ट ने बताई और मेरा फोन नंबर भी लोगों के साथ शेयर कर दिया। राजीव मसंद तब इंडियन एक्सप्रेस में थे और इस मामले की जानकारी के लिए उनका पहला फोन मेरे पास ही आया।
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तेरा जादू चल गया
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
वाशू के करियर की पहली फ्लॉप
खैर, हम लौटते हैं अपनी आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ की तरफ। वाशू भगनानी साल 1995 में फिल्म ‘कुली नंबर वन’ से शुरू करके पांच लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्में बना चुके थे। इन फिल्मों में शामिल रहीं फिल्में हैं, ‘हीरो नंबर वन’, ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘बड़े मियां छोटे मियां’ और ‘बीवी नंबर वन’। ‘तेरा जादू चल गया’ बतौर प्रोड्यूसर उनके करियर की पहली फ्लॉप फिल्म रही। हालांकि, फिल्म का म्यूजिक जरूर खूब बिका लेकिन उसकी वजह थी इसके संगीतकार इस्माइल दरबार। इस्माइल को साल 1999 में रिलीज हुई फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में संगीत देने के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मफेयर ने भी उन्हें इसी पुरस्कार से सम्मानित किया। इस्माइल ने उन दिनों के एक के बाद एक तमाम फिल्में साइन कर ली थीं। लेकिन, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ के तुरंत बाद रिलीज होने वाली ये उनके करियर की दूसरी फिल्म रही। फिल्म का टाइटल सॉन्ग उन दिनों खूब लोकप्रिय हुआ था।
कहानी बनी सबसे कमजोर कड़ी
फिल्म ‘तेरा जादू चल गया’ की तमाम कमजोर कड़ियों में से सबसे कमजोर कड़ी रही इसकी कहानी। वाशू भगनानी ने अजय देवगन और काजोल की हिट फिल्म ‘प्यार तो होना ही था’ के राइटर इकराम अख्तर को इस फिल्म के लिए बड़ी उम्मीदों के साथ साइन किया था। लेकिन, फिल्म रिलीज हुई तो पता चला कि ये कहानी तो हॉलीवुड फिल्म ‘पिक्चर परफेक्ट’ का मुंबइया वर्जन है। ‘प्यार तो होना ही था’ भी इकराम ने हॉलीवुड फिल्म ‘फ्रेंच किस’ जैसी ही लिखी थी। ‘तेरा जादू चल गया’ की कहानी कुछ यूं है कि अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में पूजा (कीर्ति रेड्डी) आगरा में मिले कलाकार कबीर (अभिषेक बच्चन) से प्यार करने का नाटक करती है। चाहती असल में वह अपने बॉस के बेटे राज ओबेरॉय (संजय सूरी) को है। इस प्रेम त्रिकोण को लिखने में इकराम अख्तर का कोई कमाल काम न आया। हां, फिल्म में जावेद सिद्दीकी के संवाद लोगों को जरूर भाए। संतोष थुंडियल की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का हाइलाइट प्वाइंट रही लेकिन अभिषेक बच्चन इस फिल्म में अपना वैसा करिश्मा दिखा नहीं पाए जैसा उनसे उम्मीद की जा रही थी। हीरोइन कीर्ति रेड्डी का फिल्म में होना भी इसके लिए नुकसानदायक ही रहा। फिल्म में उनकी डबिंग पद्मिनी कोल्हापुरे की बहन तेजस्विनी कोल्हापुरे ने की है। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।