सुचित्रा सेन
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सुचित्रा सेन का करियर बहुत अच्छा चल रहा था। लेकिन जब उनकी फिल्म 'प्रोनॉय पाशा' फ्लॉप साबित हुई, तो उन्हें इसका बहुत धक्का लगा। उन्होंने उसी समय फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कहने का मन बना लिया। इसी चक्कर में राजेश खन्ना के साथ बनने वाली फिल्म 'नटी विनोदिनी' भी इन्होंने बीच में ही छोड़ दी। बाद में यह फिल्म भी नहीं बनी। वर्ष 1978 में सुचित्रा सेन फिल्म इंडस्ट्री से एकदम गायब ही हो गईं। फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कहने के बाद सुचित्रा सेन को वर्ष 2005 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया जाना तय किया गया। पुरस्कार वितरण समारोह में सुचित्रा गई ही नहीं। उन्होंने कहा कि मैं लाइमलाइट में फिर से आना नहीं चाहती। उन्होंने कहा, 'अगर आप यह पुरस्कार मुझे देना ही चाहते हैं, तो घर आकर ही दे दीजिए।' सुचित्रा के वक्तव्य का ऐसा असर हुआ कि उन्हें यह पुरस्कार बाद में दिया ही नहीं गया।