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Heera Mandi: पिता को याद कर भंसाली बोले, ‘उन्होंने कहा- यहां बैठो हिलना मत और तब से मैं वहीं बैठा हूं’

Sun, 26 Sep 2021 04:31 PM IST
विजयाश्री गौर अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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संजय लीला भंसाली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपनी पहली फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ से लेकर अपनी पिछली फिल्म ‘पद्मावत’ तक निर्माता, निर्देशक संजय लीला भंसाली ने भारतीय कहानियों को ही अपने सिनेमा का केंद्र बिंदु रखा है। वह भारतीय सिनेमा के मौजूदा शो मैन तो हैं ही, वह अपनी इन कहानियों के जरिये दुनिया को भारतीय सभ्यता, संस्कृति और विरासत से भी लगातार परिचित करा रहे हैं। उनकी एक फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ जल्द रिलीज होने वाली है और उनकी पहली वेब सीरीज ‘हीरा मंडी’ की चर्चा अब पूरी दुनिया में हो रही है। इस सीरीज का एलान नेटफ्लिक्स ने अपने ग्लोबल इवेंट ‘टुडुम’ में किया और भंसाली ने अब ये खुलासा किया है कि ‘हीरा मंडी’ की कहानी उनके पास पिछले 14 साल से मौजूद रही है।

भारतीय फिल्म जगत में 25 साल पूरे कर चुके निर्देशक संजय लीला भंसाली को सिनेमा अपने पिता से विरासत में मिला और ये बात अब वह खुलकर बताने से हिचकते भी नहीं हैं। वह बताते हैं, "मुझे याद है कि जब मैं चार साल का बच्चा था, मेरे पिता जी मुझे एक शूटिंग दिखाने ले गए थे। वह अपने दोस्तों से मिलने चले गए और मुझसे बोले कि मैं वहीं एक जगह पर बैठूं। कहने लगे कि अपने दोस्तों से मिल कर बस अभी लौटते हैं। उनके जाने के बाद मैं स्टूडियो में बैठा-बैठा सोच रहा था कि मेरे लिए इस जगह से ज्यादा सुकून भरी कोई और जगह हो ही नहीं सकती।”
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संजय लीला भंसाली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
भंसाली ये भी बताते हैं कि आखिर उस दिन का उनका एहसास कैसे उनके बचपन के दूसरे एहसासों से बिल्कुल भिन्न रहा। वह कहते हैं, “ये स्टूडियो मुझे स्कूल, खेल के मैदान, किसी हमउम्र रिश्तेदार या दुनिया की किसी भी जगह से ज्यादा आरामदायक लगा। मेरे सामने एक कैबरे डांस की शूटिंग चल रही थी और वे इसे बार-बार दोहराते रहे। मुझे उस शाम की सबसे गहरी जो चीज याद है, वह है मेरे पिता का आदेश- ‘यहां बैठो और हिलना मत, और कहीं मत जाना।’ आज जब मैं उस घटना को पीछे मुड़कर देखता हूं तो पाता हूं कि मैं तो बीते 25 साल से वहीं बैठा हूं क्योंकि उसके बाद से पूरी जिंदगी मैं वहीं रहने का सपना देखता रहा और मुझे खुशी है कि मैं वहीं बैठा हुआ हूं और मुझे जो करना है वह कर रहा हूं।"
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संजय लीला भंसाली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
संजय लीला भंसाली के सिनेमा में दिखने वाली भव्यता दरअसल उनके साथ बचपन की यादों के साथ चली आई है। वह कहते हैं, 'मुझे अब भी याद है, बचपन में किसी थिएटर में जाना और उन प्रोजेक्टर को देखना जो परदे पर रोशनी की बौछार किया करते थे। यह बौछार मेरे दिमाग पर भी पड़ती थी और मेरा हमेशा फिल्म से ध्यान उचट जाता था। मेरा दिमाग किरणों की शक्ल में उड़ती उन नन्हीं परियों की तरफ चला जाता था और मुझसे कहता था- ठीक है, एक दिन मेरी कहानी भी इसी तरह लहराएगी।'

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संजय लीला भंसाली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
संजय लीला भंसाली को सबसे ज्यादा खुशी इस एहसास में मिलती है कि वह अपने बचपन का सपना पूरा कर सके। दुनिया भर में अपनी फिल्मों से भारतीय सिनेमा का स्तर ऊंचा करने वाले निर्देशक संजय लीला भंसाली कहते हैं, “ये तमाम चीजें जो मैंने बनाई हैं, मुझे लगता है कि मैं नौ फिल्में बना चुका हूं और 10वीं बनाने जा रहा हूं और इसमें 25 साल बीत गए। मुझे यही करते अभी 25 साल और बिताने हैं।”
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संजय लीला भंसाली - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नेटफ्लिक्स ने हाल ही में ‘हीरामंडी’ को अपनी वैश्विक कार्यक्रम सूची का स्पॉटलाइट शो घोषित किया है। इसके बारे में संजय लीला भंसाली दिलचस्प खुलासा करते हुए बताते हैं, "ये कहानी मेरे दोस्त मोइन बेग 14 साल पहले लेकर मेरे पास आए थे। जब हमने इसे नेटफ्लिक्स के सामने पेश किया तो उनकी बांछे खिल गईं! उन्हें लगा कि इसको एक मेगासीरीज में तब्दील करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यह बहुत बड़ी है, विराट है। यह आजादी से पहले की तवायफों की कहानी है। वे अपने हुनर से संगीत, शायरी और नृत्य को जिंदा रखती थीं और कोठों के भीतर चलने वाली राजनीति के बीच जीने की कला के दम पर विजेता बन कर उभरती थीं।"
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