फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ranjeet Exclusive Interview: रमेश सिप्पी मेरे पास गब्बर का रोल लेकर आए थे, अमिताभ को रोज सुबह गीता पढ़ते देखा

विज्ञापन
1 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपने जमाने के दिग्गज अभिनेता रंजीत अपने करियर में 500 फिल्मों में काम कर चुके हैं, लेकिन उन्हें खुद फिल्में देखने का शौक नहीं है। उन्होंने अपनी सिर्फ 10-15 फिल्में देखी होगी। देव आनंद की फिल्म 'गाइड' उनकी सबसे फेवरेट फिल्म है। इस फिल्म को उन्होंने करीब 10 बार देखा है। रंजीत ने अपने दौर के सभी टॉप कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन वह दिलीप कुमार के साथ काम नहीं कर पाए। रंजीत से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।
विज्ञापन

2 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपको सुनील दत्त की खोज कहा जाता है, सुनील दत्त से पहली मुलाकात कब हुई और उनकी फिल्म 'रेशमा और शेरा' में काम करने का मौका कैसे मिला ? 
मैं मुंबई एक्टर बनने नहीं आया था, क्योंकि एक्टर वाली कोई बात मेरे अंदर नहीं थी। दिल्ली में मेरी मुलाकात रणवीर सिंह से हुई जिन्हें इंडस्ट्री में सब रॉनी के नाम से जानते थे। उन्होंने मुझे बॉम्बे (मुंबई) बुलाया था। वह हॉलीवुड की फिल्मों से जुड़े थे और हिंदी में 'जिंदगी की राहें' का निर्माण कर रहे थे। मैं मुंबई आया तो रॉनी मुझे देव आनंद साहब के बड़े भाई चेतन आनंद के घर पर मिले। मैं भी पहली रात वहीं सोया। मैंने अपनी जिंदगी में वहां पहली हीरोइन प्रिया राजवंश को देखी। प्रिया राजवंश को भी लंदन से रॉनी ही  लेकर आए थे। दूसरे दिन मुझे सन एंड सैंड होटल में शिफ्ट कर दिया गया। वहां पर मेरी मुलाकात सुनील दत्त साहब से हुई। बाद में रॉनी के साथ दत्त साहब के घर भी गए। वहां नर्गिस दत्त से भी मुलाकात हो गई। दत्त साहब रोज समुद्र तट पर आते थे और मैं सन एंड सैंड में ही ठहरा हुआ था तो हमारी रोज मुलाकाते होती रहीं। रॉनी की इंडस्ट्री में अच्छी पहचान थी जिस भी एक्टर के घर जाते, मुझे भी लेकर जाते। 10- 15 दिनों में मेरी मुलाकात इंडस्ट्री के सभी बड़े कलाकारों से हो गई। 
विज्ञापन

3 of 12
देव आनंद, अमजद खान के साथ रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यानी आपको पहला मौका रॉनी की फिल्म 'जिंदगी की राहें' में मिला? 
लेकिन यह फिल्म शुरू नहीं हो पाई। इस फिल्म की कहानी एक ट्रक ड्राइवर की थी। अमजद खान के पिता जयंत साहब  ट्रक ड्राइवर की भूमिका निभा रहे थे। इस फिल्म में मैं हीरो था जो क्लीनर होता है। यह फिल्म शुरू होने से पहले ही रॉनी और फायनेंसर के बीच कुछ अनबन हो गई और फिल्म बंद हो गई। रॉनी लंदन चले गए। मुंबई में किसी को पता नहीं था कि रॉनी मुझे लेकर फिल्म बना रहे थे। सब सोचते थे कि कोई रिश्तेदार होगा और प्रोडक्शन के काम में मदद करने आया है। मैंने भी सोचा कि वापस दिल्ली चला जाता हूं। तभी मुझे पता चला कि सुनील दत्त साहब 'रेशमा और शेरा' बना रहे हैं। मैं सुनील दत्त साहब के ऑफिस गया। वहां दत्त साहब के मैनेजर मेनन ने बताया कि 'रेशमा और शेरा' में वहीदा रहमान जी के भाई का रोल है। दत्त साहब ने आपको यह रोल देने के लिए बोला है। अगले दिन दत्त साहब को धन्यवाद बोलने गया तो मेनन ने बताया कि जैसे ही कल आप ऑफिस से निकले मोहन सहगल का आपके लिए फोन आया था।

4 of 12
'सावन भादों' में रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब दो दिन के अंदर ही आपको दो फिल्में मिल गई?
मोहन सहगल अपनी फिल्म 'सावन भादों' में रेखा के भाई के रोल के लिए मुझे ढूंढ रहे थे। मोहन सहगल को पता था कि सुनील दत्त साहब से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई है और मैं उनके ऑफिस में आता जाता हूं। कहां मेरी शुरुआत हीरो के रूप में हो रही थी और कहां फिल्मों में एक दो सीन के रोल मिल रहे थे। मोहन सहगल का ऑफिस पांचवें मंजिल पर था और लिफ्ट में ही मैंने फैसला कर लिया कि फिल्में करनी हैं। 'सावन भादो' की शूटिंग पहले शुरू हुई । इस फिल्म का शेड्यूल खत्म हुआ तो 'रेशमा और शेरा' की शूटिंग शुरू हो गई। वहीं राखी से मुलाकात हुई और उनकी वजह से फिल्म 'शर्मीली' में काम करने का मौका मिला। इस तरह से तीसरी फिल्म मिल गई।
विज्ञापन

5 of 12
अमिताभ बच्चन-रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना की भी शुरुआत विलेन से हुई। बाद में वह हीरो बनकर आए। आपने सोचा नहीं कि हीरो बनने का जो अधूरा काम कर गया था उसे पूरा किया जाए?
मैंने कभी हीरो बनने के बारे में सोचा ही नहीं। विलेन में भी मुझे अच्छी भूमिकाएं मिल रही थी और पैसे भी हीरो के जितने भी मिलते थे। मैने इंडस्ट्री के सभी टॉप स्टार्स राज कपूर, सुनील दत्त, देव आनंद, राजेश खन्ना, फिरोज खान, अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। अमिताभ बच्चन 'रेशना और शेरा' से पहले 'सात हिंदुस्तानी' में काम कर चुके थे तो वह मुझसे एक फिल्म सीनियर हैं। मैं दिलीप कुमार के साथ एक फिल्म 'आग का दरिया' करने वाला था लेकिन एक बार उसकी शूटिंग कैंसिल हो गई तो फिर मैं दूसरी फिल्मों की शूटिंग में व्यस्त हो गया और इस फिल्म के लिए वक्त नहीं निकाल पाया।
विज्ञापन

6 of 12
रेशमा और शेरा में रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमिताभ बच्चन के साथ काम करने की कोई खास याद..
एक किस्सा मैं ‘रेशमा और शेरा’ की शूटिंग के दौरान का बताना चाहूंगा। इस फिल्म की शूटिंग राजस्थान में हुई तो फिल्म के सभी कलाकार टेंट में ही रहते थे। मेरे बगल वाले टेंट में अमिताभ बच्चन ठहरे हुए थे। मैं रोज सुबह उनको देखता था कि कुछ पढ़ते थे और रात में कुछ लिखते थे। एक दिन मैंने पूछ लिया कि रोज सुबह-सुबह क्या पढ़ते रहते हो और रात को लिखते क्या रहते हो? अमिताभ ने कहा, सुबह  गीता का पाठ पढ़ता हूं। और, रात को हर दिन की दिनचर्या अपने माता पिता को चिट्ठी लिखता हूं। अब भी अमिताभ बच्चन से मुलाकात होती रहती है और हम खूब मजाक मस्ती करते रहते हैं।
विज्ञापन

7 of 12
देव आनंद-रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
देव आनंद के 100वें जन्मदिन पर उनकी फिल्मों का एक खास महोत्सव होने जा रहा है। आपने देव आनंद साहब की कौन सी फिल्म देखी है?      
वैसे तो मैं फिल्में बहुत काम देखता हूं। मैंने अपने करियर में सभी भाषाओं को मिलाकर करीब 500 फिल्में की हैं, जिसमें से मुश्किल से 10-15 ही देखी होंगी। लेकिन, देव साहब की फिल्में मैंने सबसे ज्यादा देखी है। उनकी फिल्म गाइड ही करीब मैंने 10 बार देखी होगी।  देव आनंद साहब से जुड़ा एक बहुत ही मजेदार किस्सा शेयर करना चाहूंगा। देव साहब की फिल्मों की शूटिंग के दौरान हमेशा मजाक मस्ती चलती रहती है। एक बार उनके डायरेक्शन में काम कर रहा था। मैंने 'गाइड' और 'हम दोनो' के डायलॉग  उसी अंदाज में मजाक में बोल दिए। देव साहब बोले, कट, कट, कट, गोली तुम ऐसा बोलेगा तो मैं कैसा बोलूंगा। देव साहब मुझे हमेशा गोली ही कहकर बुलाते थे।  

8 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपने अपनी पहली फिल्म कौन सी देखी?
मेरी फिल्म 'शर्मीली' का  दिल्ली में प्रीमियर था। इस फिल्म को देखने अपने माता-पिता के साथ गया। फिल्म में जैसे ही मैंने राखी के कपड़े फाड़ने शुरू किए तो वे फिल्म छोड़कर घर चले गए और बोले कि अब दोबारा कभी घर में आना मत। मैने उनको बहुत मनाया, फिर उनको पता चला कि यह तो एक्टिंग होती है, फिल्म लाइन में ऐसे ही होता है। उन दिनों जब भी कोई फिल्म शुरू होती थी तो पहली चॉइस मैं ही रहता था। एक समय ऐसा आया कि 80 फिल्मों की शूटिंग एक साथ कर रहा था। हर रोज सुबह श्रीनगर शूटिंग करने जाता था। श्रीनगर में शूटिंग करके चार बजे की फ्लाइट पकड़कर मुंबई महबूब स्टूडियो में शूटिंग करता था। जिसके भी साथ काम किया, बहुत प्यार मिला। इसलिए सबने अपनी फिल्मों में बार बार रिपीट किया।

9 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कभी ऐसा भी हुआ कि किसी डिस्ट्रीब्यूटर ने निर्माता-निर्देशक के सामने यह शर्त रखी हो कि फिल्म में रंजीत को लेना ही है ?
एक बार हुआ है जब पंजाब के एक बड़े डिस्ट्रीब्यूटर वकील सिंह ने ऋषिकेश मुखर्जी के सामने यह शर्त रख दी थी। ऋषि दा महबूब स्टूडियो में शूटिंग कर रहे थे। मैं भी वहीं दूसरी फिल्म की शूटिंग कर रहा था। ऋषि दा को शतरंज खेलने का बहुत शौक था। जब लंच ब्रेक हुआ तो मुझे चेस खेलने के बुला लिया। उस फिल्म में धरम जी और हेमा जी काम कर रही थी। पंजाब के एक बहुत बड़े डिस्ट्रीब्यूटर वकील सिंह भी किसी काम से महबूब स्टूडियो में आए थे। जब हम शतरंज खेल रहे थे तो उन्होंने ऋषि दा से कहा कि आपकी फिल्म में रंजीत भी है? ऋषि दा ने कहा कि हम ऐसे  कैरेक्टर के साथ फिल्म नहीं बनाते हैं।

10 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कहते हैं कि आपको रमेश सिप्पी की फिल्म 'शोले' में गब्बर सिंह की भूमिका ऑफर हुई थी। इसके लिए न करने की कोई खास वजह?
दरअसल, मुझसे पहले यह फिल्म डैनी डेन्जोंगपा को ऑफर हुई थी। गब्बर की भूमिका वही करने वाले थे। उन दिनों डैनी बेंगलुरु में फिरोज खान की फिल्म 'धर्मात्मा की शूटिंग कर रहे थे। फिरोज खान ने डैनी को बोला कि फिल्म में इस फिल्म में तुमको गाना भी दे रहा हूं। 'शोले' में तुम्हारे लायक क्या होगा? उसमे धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन, संजीव कुमार सभी तो हैं ऐसे में विलेन का क्या रोल होगा? डैनी डेन्जोंगपा मान गए और 'शोले' की शूटिंग छोड़कर 'धर्मात्मा' की शूटिंग पूरी की। उस समय तो पता नहीं था कि 'शोले' इतनी बड़ी हिट फिल्म हो जाएगी। रमेश सिप्पी मेरे पास आए और बोले, अगर मुझे दिन के दो -दो घंटे भी दे देंगे तो मुझे चलेगा। मैंने उनसे इतना ही कहा, डैनी मेरा दोस्त है। उसकी फिल्म मैं नहीं करूंगा। लेकिन, उन्होंने मुझे ये नहीं बताया कि डैनी फिल्म छोड़ चुके हैं।
Jawan 500 Cr: घरेलू बॉक्स ऑफिस पर ‘जवान’ के 500 करोड़ पूरे, ‘गदर 2’ को फिलहाल इसलिए नहीं खतरा

11 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
प्रकाश मेहरा के साथ आपने कई फिल्में की हैं, क्या खास बात नजर आती थी आपको उनके निर्देशन में ?
प्रकाश जी के साथ मैंने  बहुत काम किया। उन्होंने न तो मुझे कभी कहानी सुनाई और न ही कभी मेरे रोल के बारे में बताया। और, ना ही मैं उनसे फिल्म की कहानी और अपने किरदार के बारे में पूछता था। मुझे इतना विश्वास होता था कि जो भी होगा अच्छा ही होगा। कभी-कभी ऐसा होता था कि अगर शूटिंग शेड्यूल से पहले शूटिंग खत्म हो जाती थी। तो वह कहते थे कि रंजीत की भी डेट बची हुई है और अमिताभ बच्चन की भी, तो क्यों न एक रोमांटिक गाने की शूटिंग कर ली जाए। वह तुरंत  एक गाना रिकॉर्ड करवाते थे और बची डेट को यूज कर लेते थे। इस तरह का कोई न कोई उनकी फिल्म में गाना होता ही था कि रोमांटिक गाना चल रहा है और विलेन की एंट्री हो रही है। 
Parineeti-Raghav Wedding: परी की शादी में कब आएंगी उनकी मिमी दीदी? इस दिन शामिल होंगी प्रियंका चोपड़ा
विज्ञापन

12 of 12
रंजीत - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, मनमोहन देसाई के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
वह तो खुले आसमान की तरह थे। मन मोहन देसाई की फिल्मों में कोई लॉजिक नहीं होता था। उनका मानना था कि दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होनी चाहिए। उनकी फिल्में पूरी तरह से मनोरंजक और मसालेदार होती है। मैंने अपने करियर में जिस निर्देशक के साथ एक बार काम कर लिया वह अपनी हर फिल्मों में मुझे रिपीट करता था। लेकिन, सुभाष घई की फिल्म 'कालीचरण' में काम किया और बाद में अपनी दूसरी फिल्म में उन्होंने किसी और को विलेन ले लिया।

ये पूरा इंटरव्यू आप यहां सुन सकते हैं:
जानिए बॉलीवुड के फेमस विलेन रणजीत को उनकी पहली फिल्म के बाद घर से किसने निकाल दिया था? सुनिए दिलचस्प किस्से
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें