ओटीटी प्लेटफॉर्म्स
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अगर आप बीते तीन साल से लगातार सफर में यात्रियों के मोबाइल पर नजर रखे हुए हैं, तो एक दिलचस्प तथ्य आपने ये देखा होगा कि अब लोग मोबाइल पर फिल्में और वेब सीरीज डाउनलोड करके देखना कम कर चुके हैं। लोग अब सफर में अपना समय अपनी नींद पूरी करके बिता रहे हैं और साथ ही ओटीटी पर फिल्में देखने की बजाय सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं। कारोबारी भाषा में इसे डिजिटल फैटीग यानी डिजिटल थकान का नाम मिला है। और, इसी के चलते न सिर्फ भारत में ओटीटी की बढ़ोत्तरी इस साल काफी घटने की आशंका जताई जा रही है बल्कि इसका असर ओटीटी पर प्रसारित होने वाली सामग्री पर भी दिखने लगा है।