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Isha Talwar Interview: संस्कृत चित्त को शांत करने वाली भाषा, इसे सीख लिया तो हर भाषा का अभिनय आसान हो जाएगा

Thu, 23 Nov 2023 10:21 AM IST
रुपाली रामा जायसवाल अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
केरल से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और राजस्थान होते हुए अभिनेत्री ईशा तलवार अब पंजाब पहुंची हैं। पंजाब की पृष्ठभूमि पर बनी सीरीज 'चमक' में वह एक संघर्षरत कलाकार की भूमिका निभा रही हैं। ईशा तलवार ने हाल ही में अमर उजाला से खास बातचीत की। उनका मानना है कि अभिनय में भाषा की जानकारी का बहुत बड़ा योगदान होता है। और, चूंकि संस्कृत सारी भाषाओं की जननी है तो इसका ज्ञान अभिनय को बहुत आसान बना देता है। इसके अलावा वह संस्कृत को चित्त को शांत करने वाली भाषा भी मानती हैं।
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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आपका संघर्ष काफी लंबा रहा है। अपने अभिनय में अपने संघर्ष की याद से कितनी मदद मिलती है?

हां, निजी जीवन के प्रसंग हमें अपने अभिनय में काम तो आते ही हैं। ऐसे बहुत सारे किस्से हैं जब लोग कहते थे कि हम आप को लांच कर रहे हैं। छह महीने के बाद न्यूजपेपर में पढ़ती थी कि फिल्म में तो और किसी की शक्ल आ गई। मुझे न्यूज पेपर के माध्यम से पता चलता था कि फिल्म से निकाल दिया गया है। जिंदगी में ऐसे झटके बहुत मिले। यह सिलसिला सात-आठ तक चलता ही रहा। फिर, मैंने तीन साल तक सब छोड़कर इत्मीनान से सोचा कि गलती कहां हो रही है, उस पर काम किया फिर नए सिरे से अपने करियर की शुरुआत की।
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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, शुरुआत हुई मलयालम सिनेमा से...

मेरा मानना है कि जहां आप को पहुंचना है आप पहुंच ही जाते हैं। मुझे केरल  में ही एक विज्ञापन फिल्म मिली। उसके कैमरामैन जोमन टी जान ने मुझे मलयालम फिल्म 'तट्टतिन मरयाद' के बारे में बताया। उनके कहने पर ही उस फिल्म के लिए ऑडिशन दिया और सेलेक्ट हो गई। मैं खुद को भाग्यशाली मानती हूं कि मलयालम में मुझे इतना बड़ा मौका मिला। यह फिल्म वहां ब्लॉकबस्टर रही। जोमन टी जान साउथ के बहुत बड़े डायरेक्टर हैं, रोहित शेट्टी की फिल्मों के कैमरामैन वही रहते हैं। 'तट्टतिन मरयाद' के बाद तो साउथ की और भी कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला। 

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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

लेकिन, मलयालम समझने में तो बहुत दिक्कत हुई होगी?

शुरू में बहुत दिक्कत हुई। दरअसल, मलयालम संस्कृत से निकली हुई भाषा है। संस्कृत हम लोग स्कूल में पढ़ना और पढ़ाना  भूल चुके हैं। हम इतनी आधुनिक सोच के हो गए हैं कि अपने बच्चों को फ्रेंच और इटैलियन तो पढ़ाना चाहते हैं, लेकिन संस्कृत नहीं। मुझे लगता है कि अगर संस्कृत  भाषा का ज्ञान हमें दूसरी भाषाएं समझने में बहुत मदद करता है। आप जिस भाषा में काम कर रहे हैं एक्टिंग करते वक्त आपको उस भाषा में सोचना पड़ेगा। अगर मैं हिंदी फिल्म में काम कर रही हूं और अंग्रेजी में सोच रही हूं तो चेहरे के भाव वैसे ही निकलेंगे। भाषा से एक्टिंग आती है, इसलिए आप जिस भाषा में काम कर रहे हैं। उसकी भाषा सीखनी बहुत जरूरी होती।

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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

तो इसका मतलब आपने संस्कृत पढ़ी है?

मैं भी मुंबई में ही कान्वेंट स्कूल कल्चर में पढ़ी हूं। लेकिन, मैंने अलग से संस्कृत सीखी हैं। पुणे से एक नीलोफर मैडम आती थीं, उन्होंने मुझे संस्कृत में गीता पढ़नी सिखाई। पिछले 12 वर्षों से मैं गीता का नियमित पाठ करती हूं। संस्कृत देव भाषा तो है ही, इसका इसका वैज्ञानिक महत्व भी बहुत है। इसे पढ़ने से चित्त हमेशा  शांत रहता है। मैंने यह अनुभव किया है कि हर कलाकार को संस्कृत थोड़ी बहुत तो जरूर आनी चाहिए, इससे आपका उच्चारण सही होता है।  

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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी सिनेमा में आपकी शुरुआत सलमान खान की फिल्म 'ट्यूबलाइट' से हुई। इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास यादें?

'ट्यूबलाइट' का नाम सुनते ही मेरी बत्ती गुल हो जाती है। मेरे हिसाब से वह अच्छी फिल्म बिलकुल भी नहीं है। हर किसी के लिए फिल्म का चलना बहुत जरूरी होता है। फिल्म बनाने में बहुत मेहनत लगती है और फिल्म नहीं चलती है तो दिल बहुत टूटता है। 'ट्यूबलाइट' से बेहतर अनुभव मुझे अनुभव सिन्हा की फिल्म 'आर्टिकल 15' में काम करने का रहा। इस फिल्म के एक ही सीन में आयुष्मान खुराना के साथ आमना सामना हुआ था। बाकी उनके साथ सारे सीन फोन पर ही थे। मैंने अनुभव सिन्हा जी को रिक्वेस्ट की थी कि आयुष्मान खुराना के जितने भी सीन शूट हो चुके हैं, वह दिखाएं। ताकि उसी हिसाब से अपनी प्रतिक्रिया दे सकूं। अनुभव सिन्हा ने मुझे सारी सहूलियत दी।  
 

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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

और, ‘मिर्जापुर’ की माधुरी यादव के लिए किस तरह खुद को तैयार किया?

माधुरी यादव की भूमिका निभाने के लिए मैंने तीन महीने तक वर्कशॉप किया और उत्तर प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा के लहजे को सीखा ताकि माधुरी यादव के बातचीत में वहां की फीलिंग आ सके। अभी जो मेरी नई सीरीज ‘चमक’ आ रही है, उसकी शूटिंग से पहले मैं पंजाब के मोगा में एक हफ्ते तक रही। मैंने ढोल बजाना सीखा। इस सीरीज में गाने हैं तो उसे भी समझना पड़ा।

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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

'सास बहू और फ्लेमिंगो' के एक्शन सीन के लिए क्या तैयारी करनी पड़ी? इस सीरीज की शूटिंग के दौरान डिंपल कपाड़िया से क्या कुछ सीखा आपने?

इस सीरीज के लिए राजस्थानी लहजे को समझने की कोशिश की थी। डिंपल जी के बारे में क्या बोलें, वह तो लेजेंडरी हैं। पूरी जिंदगी ही उनकी फिल्मों में बीत गई। वह बहुत ही दिलचस्प इंसान हैं अपनी जिंदगी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेती हैं। यह उनकी सबसे खास बात है। उनसे मैंने यही बात सीखी की जिंदगी को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। करियर ही सब कुछ जिंदगी में नहीं होता है। जिंदगी बहुत बड़ी है, उसका आनंद लेना चाहिए।
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ईशा तलवार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

आने वाली सीरीज 'चमक' के बारे में कुछ बताएं? 

इस सीरीज में मैं एक संघर्षरत आर्टिस्ट जसविंदर कौर की भूमिका निभा रही हूं, जिसका स्टेज नाम जैस है। जैस का यह किरदार मेरे जीवन के काफी करीब है, क्योंकि काफी समय से जीवन में संघर्ष चल ही रहा है। जीवन का जो सारा संघर्ष चल रहा था वह जसविंदर कौर के किरदार ने डाल दिया। वह ढोल बजाती है, गाना गाती है और चमक की दुनिया में खो जाती है।
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