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Hashiye Ke Superstar 8: बिजनौर की बिटिया का मुंबई में बजा डंका, काजोल की कमाल मिमिक्री करने वाली सीमा की कहानी

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सीमा परी - फोटो : अमर उजाला
बात 21 नवंबर की शाम की है। फोन आया कि अगले दिन अभिनेता, निर्देशक अजय देवगन अपनी नई फिल्म ‘भोला’ का टीजर मीडिया के मित्रों के साथ रिलीज करना चाहते हैं। जुहू पीवीआर में मजमा लगा। सबने अपने अपने थ्रीडी चश्मे लिए और सीटों पर जम गए। जैसे ही ‘भोला’ का टीजर शुरू हुआ, सुनाई दी एक परिचित आवाज और अगले कुछ सेकंड में जो पहला चेहरा पूरे परदे पर नजर आया, वह था सीमा परी का। सीमा परी से मेरी पहली मुलाकात जी नेटवर्क के लिए एक रियलिटी शो ‘नकली नंबर वन’ का निर्देशन करते हुई थी। सितारों की मिमिक्री करने वाले कलाकारों का ये मुकाबला था और सीमा परी उसमें शामिल हुई थीं काजोल की बेहतरीन मिमिक्री की अपनी काबिलियत के चलते। और, अब उसके कोई दो दशक बाद उन्हें निर्देशित कर रहे थे काजोल के पति अजय देवगन। सीमा परी से वैसे तो छिटपुट बातें लगातार होती रहीं लेकिन छोटे परदे से लेकर बड़े परदे तक सीमा ने अभिनय का जो लंबा सफर तय किया है, उस पर बात पहली बार हुई। आगे की कहानी, खुद सीमा परी की जुबानी...
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सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
10वीं से ही उठा ली घर की जिम्मेदारी
अपनी राम कहानी मैं शुरू से शुरू करती हूं। मशहूर निर्माता निर्देशक प्रकाश मेहरा के जिले बिजनौर से मेरा ताल्लुक है। वहां के चांदपुर कस्बे में मैं पैदा हुई। पता नहीं मेरी मेहनत को देखकर ऊपरवाला खुश था या कि शुरू से मुझे मजबूत इरादों वाला इंसान बनाना चाहता था, मेरे ऊपर 10वीं कक्षा से ही अपनी मां और तीन छोटी बहनों की जिम्मेदारी डाल दी। अब सोचती हूं तो जो बीत गया वह एक सपना सा लगता है। घर घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना, बच्चियों को नाचना सिखाना और मौका मिला तो ऑडियो विज्ञापन भी रिकॉर्ड करना। आवाज मेरी कुछ अलग थी, ये मेरी समझ में शुरू से ही आ गया। मिमिक्री वगैरह तो खैर बहुत बाद में शुरू की लेकिन बिजनौर में नौकरी और पढ़ाई के बीच में ही मुझे स्थानीय न्यूज चैनल और आकाशवाणी केंद्र पर काम मिलने लगा था। न्यूज एंकरिंग का किस्सा आंखों देखी की रिपोर्टिंग से होता हुआ ही रियलिटी शो ‘नकली नंबर वन’ तक आया।
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'मेरे साईं' में सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दिल्ली में मिले दूरदर्शन धारावाहिक
मेरठ से दिल्ली आ ही गई थी तो पहला ख्याल तो यही आया कि मीडिया की अपनी स्नातक की पढ़ाई का उपयोग करते हुए किसी न्यूज चैनल में काम करूं। पर मौका मुझे मिला दूरदर्शन के धारावाहिकों में अभिनय का। इतने धारावाहिक किए कि न अब मुझे उनके नाम याद हैं और न गिनती। इसी दौरान ‘गालिब की वापसी’ नामक एक नाटक में भी काम किया और मेरे करियर का पहला टर्निंग प्वाइंट आया साल 2012 में जब सैटेलाइट चैनल स्टार प्लस पर मिला मुझे धारावाहिक ‘एयरलाइंस’। निर्देशक सुपवित्रो बाबुल के इस धारावाहिक ने मेरी पहचान गाढ़ी करने में मेरी बहुत मदद की और आमिर खान की फिल्म ‘पीके’ में काम करने का बुलावा आया। बड़े परदे के लिए ये मेरा पहला ब्रेक था लेकिन शूटिंग के बाद जितनी मैं खुश थी, फिल्म की रिलीज के बाद उतना ही मुझे रोना आया। और, वह इस वजह से कि फाइनल एडिट में मेरा किरदार ही फिल्म में नहीं रहा। ऐसा ही किस्सा मेरे साथ फिल्म ‘पिंक’ में भी हो चुका है। शूटिंग हुई लेकिन परदे तक मेरा किरदार नहीं पहुंचा। किसी भी कलाकार के लिए ये बेहद दुखद होता है जब निर्देशक आपके चेहरे के क्लोज अप शॉट तक ले ले और फिर फाइनल एडिट में उसे फिल्म से ही हटा दे।
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सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सैटेलाइट चैनलों पर भी खूब मिला काम
खैर, गाड़ी आगे बढ़ती गई। पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘मुख्त्यार चड्ढा’ में काम मिला। और, साथ ही सैटेलाइट चैनलों के धारावाहिकों का सिलसिला शुरू हो गया। ‘अगर तुम साथ हो’, ‘दहलीज’, ‘शास्त्री सिस्टर्स’ में काम करने के अलावा ‘अलादीन नाम तो सुना होगा’, ‘शादी के सियापे’, ‘मेरे साईं’, ‘कहत हनुमान जय श्री राम’ में भी काम किया। ‘क्राइम पेट्रोल’, ‘सावधान इंडिया’, ‘क्राइम अलर्ट’, ‘मौका ए वारदात’, ‘लाल इश्क’ और ‘डर की दस्तक’ की कहानियों में भी खूब काम किया। लेकिन, टेलीविजन पर मैंने जो भी काम किया वह हमेशा अपनी शर्त पर किया। मुझे शुरू से बहुत ज्यादा काम करने में यकीन नहीं रहा। मैंने बस उतना ही काम किया जितने में मेरी गरिमा बनी रहे और मेरी काबिलियत का सही सम्मान आर्थिक रूप से हो सके।
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विज्ञापनों में सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मुंबई के घर घर पहुंचाया इस विज्ञापन ने
एक दिलचस्प बात और आपको बताती हूं और वह ये कि छोटे परदे और बड़े परदे से ज्यादा लोग मुझे मेरे विज्ञापनों से पहचानते हैं। माइक्रोसॉफ्ट की विज्ञापन फिल्म मेरा टीवी कमर्शियल में पहला ब्रेक था। इसके बाद से तो मैंने इतने उत्पादों और कंपनियों के विज्ञापनों में काम किया है कि याद रखना मुश्किल हो जाता है। गूगल पे, फेवीक्विक, स्पॉटीफाई, ग्रोफर्स, कौन बनेगा करोड़पति, यारी ऐप, एडेलवीज म्यूचुअल फंड, एसबीआई, सिडबी, अपोलो म्यूनिख, कुपोषण भारत छोड़ो, जियो डिजिटल के प्रिंट विज्ञापन भी किए। लेकिन जिस विज्ञापन के चलते मुंबई के घर घर तक मैं पहुंची, वह विज्ञापन था अडानी इलेक्ट्रिसिटी का जिसे बिजली कंपनी ने अपने बिल पर छाप दिया। और, उस विज्ञापन का हल्ला तो पूरी दुनिया में हुआ जो मैंने बिग बॉस 11 के लिए किया था। अभिनेता जतिन सरना ने एक दिन मुझे एक होर्डिंग का फोटो खींचकर भेजा, जिसमें मैं सलमान खान के साथ दिख रही थी। और, फिर तो ये फोटो मेरे पास कहां कहां से नहीं आए।
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बिग बॉस के विज्ञापन में सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
अपनी शर्तों पर ही करती हूं काम
लौटकर फिल्मों की बात करूं तो मेरे लिए फिल्म ‘फुल्लू’ हमेशा एक यादगार फिल्म रहेगी। इस फिल्म के निर्देशक अभिषेक सक्सेना को मेरा काम इतना अच्छा लगा कि उन्होंने इस किरदार पर एक गाना ही फिल्मा लिया। परदे पर किसी गाने पर लिप सिंक करना ही किसी कलाकार के लिए कमाल अनुभव होता है। मुझे दिल्ली से मुंबई आए अभी पांच साल ही हुए हैं लेकिन इतने कम समय में भी मुंबई ने मुझे बहुत कुछ दे दिया है। हालांकि, संघर्ष अब भी जारी है और अब भी मैं अपने फोटो लोगों के साथ साझा करती रहती हूं। ऑडिशन देने जाती हूं। बस काम अपनी शर्त पर करती हूं। और, मेरी पहली शर्त ये है कि मैं मुफ्त में काम नहीं करती और कोई बजट का रोना रोए तो वहां तो मैं बिल्कुल काम नहीं करती। मेरा मानना है कि दुनिया आपके साथ उसी तरह पेश आती है जितनी छूट आप उसे देते जाते हैं। वेब सीरीज के बारे में पूछें तो मेरी पहली वेब सीरीज ‘स्टिल अबाउट सेक्शन 377’ है जिसे अमित खन्ना ने निर्देशित किया है। जो रोल मुझे मिला, वह पहले जरीना वहाब और उसके बाद शीबा चड्ढा करने वाली थीं, लेकिन दोनों की डेट्स न मिलने के चलते ये मौका मेरी झोली में आया।
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आलिया भट्ट और विक्की कौशल के साथ सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
राजी’ की शूटिंग का अनुभव बेमिसाल
किसी फिल्म की शूटिंग का मेरा अब तक का बेहतरीन अनुभव धर्मा प्रोडक्शंस की फिल्म ‘राजी’ के लिए रहा। इसकी निर्देशक मेघना गुलजार की मैं मुरीद हूं। वह इतने अच्छे से सब कुछ करके समझाती थीं कि कभी कोई दिक्कत ही नहीं हुई। फिल्म के सितारे आलिया भट्ट और विकी कौशल थे। आलिया भट्ट के पास में ही मुझे कमरा मिला था और अक्सर आलिया फोन करते करते या वर्जिश करते करते मेरे कमरे के दरवाजे तक आ जाती थीं। दोनों बेहतरीन कलाकार हैं। साथ में खाना खाना, साथ में वक्त बिताना। दोनों बेहतरीन इंसान भी हैं। फिल्म ‘मोक्ष टू माया’ में भी बहुत अच्छा काम मिला। निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म ‘अनेक’ में काम करने का बहुत मजा आया। और, फिर मिली फिल्म ‘भोला’। आप यकीन नहीं करेंगे कि फिल्म के 22 नवंबर को रिलीज हुए टीजर की शूटिंग इससे ठीक 20 दिन पहले हुई थी। अजय देवगन इतने जमीन से जुड़े इंसान हैं कि पूछो मत। उनके साथ काम करना मेरे अभिनय जीवन का एक यादगार पल है।
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'भोला' में सीमा परी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
चौपायों से प्यार, हिम्मत बेशुमार
फिल्म ‘भोला’ के टीजर में आपने मेरे हाथों में प्यारा सा पिल्ला देखा होगा। चौपायों के साथ शूटिंग करना आसान नहीं होता लेकिन एक तो उसका काला रंग, दूसरे शिवभक्त अजय देवगन की फिल्म और उस पर से साथ में मेरा सीन। सब ईश्वर की कृपा हो रही थी। जब मैं शूटिंग नहीं कर रही होती हूं तो फिल्मी कलाकारों के रहने के इलाकों वर्सोवा, अंधेरी, जुहू आदि की गलियों में मैं इन बेजुबानों की सेवा में लगी रहती हूं। बिल्लियों से मुझे खास तौर से प्यार है। बस दुख ये होता है कि इनकी देखरेख की कोई योजना मुंबई में नहीं है। इनकी आबादी पर नियंत्रण पा लिया जाए तो इनकी देखरेख आसान हो सकती है। मैं कहीं भी जाऊं मेरे पास एक बैग में डॉग और कैट फूड हमेशा रहता है।
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