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Film Review : ऐक्टरों की मिली भगत ने बचा ली ये फिल्म

Fri, 10 Feb 2017 03:16 PM IST
रवि बूले / अमर उजाला, मुंबई ब्यूरो
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निर्माताः फॉक्स स्टार स्टूडियोज
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निर्देशकः सुभाष कपूर
सितारे अक्षय कुमार, अन्नू कपूर, सौरभ शुक्ला, हुमा कुरैशी
रेटिंग***


जो केस ओपन एंड शट जैसा दिखे, जिसमें समझने को कुछ खास न हो, उसे कितनी देर चलना चाहिए? 'जॉली एलएलबी-2' का कथानक ऐसा ही है, जो मिनट-दर-मिनट सवा दो घंटे से अधिक खिंचता है। एंटरनमेंट की हवा धीरे-धीरे खिसकती जाती है। कॉमिक शुरुआत वाली फिल्म अंत आते-आते शिक्षाप्रद बन जाती है। फर्जी एनकाउंटर की कहानियां दर्जनों फिल्मों में दर्ज हैं। यहां भी शुरुआत से सारी परतें खुली हैं और किसी राज से पर्दा उठने को बाकी नहीं रहता जिससे बड़ा ट्विस्ट आए।

इसके बावजूद अगर फिल्म में कुछ देखने लायक बचता है तो अक्षय कुमार, अन्नू कपूर और सौरभ शुक्ला का परफॉरमेंस। तीनों किरदारों का आपसी तालमेल फिल्म को देखने योग्य बनाता है। खास तौर पर सौरभ हर मौके पर छाप छोड़ते हैं।
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चुटकुलेबाजी से माहौल बनाने की कोशिश की गई

अक्षय कुमार और हुमा कुरैशी
फिल्म की कहानी लखनऊ में एक फर्जी एनकाउंटर की है जिसमें एक विधवा न्याय चाहती है। परंतु हमारी व्यवस्था में गरीबों के लिए न्याय पाना आसान नहीं है इसलिए जॉनी (अक्षय कुमार) जैसा हीरो उभरता है। शुरुआत में वह गंभीर नहीं दिखता परंतु संजीदगी आते ही दिग्गज प्रतिद्वंद्वी वकीलों, बड़े पुलिस अफसरों के छक्के छुड़ा देता है। वह लखनऊ-कानपुर-बनारस से जम्मू तक मिनटों में पहुंचते हुए कामयाब होता है। पीड़ित को न्याय और दोषी को सजा दिलाता है।

निर्देशक सुभाष कपूर अरशद को जॉली बनाकर इससे पहले न्याय व्यवस्था पर फिल्म बना चुके हैं। इसके बावजूद फ्रेंचाइजी में वह नए सिरे से न्यायालयों की कार्यपद्धति को स्थापित करने की कोशिश करते हैं। नए जॉली को पुराने की तरह जमाने में वक्त लगाते हैं। चुटकुलेबाजी से माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। मुद्दे की बात सीधे नहीं करते। इसमें काफी वक्त खराब हुआ है। अक्षय की पत्नी की भूमिका में हुमा कुरैशी हैं। एक बेटा है। मगर इन किरदारों की क्या जरूरत, यह कहीं साफ नहीं होता। उनके बगैर भी कहानी पूरी है।
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सही-गलत का फैसला करना मुश्किल है

अक्षय कुमार
कपूर ने आतंकवाद के नाम पर फर्जी एनकाउंटर और इस बहाने हिंदू-मुस्लिम विमर्श को उठाया है। वह कहते हैं कि यह सही नहीं कि इश्क और जंग में सब जायज है। इस तर्क से लड़कियों पर तेजाब फेंकने और सीमा पर सैनिकों का सिर काट लेने वालों को भी गलत नहीं कहा जा सकता। वह सही-गलत के बीच स्पष्ट चमकती रेखा खींचने की वकालत करते हैं। फिल्म को यूपी में शूट किया गया है और कुछ हिस्से खूबसूरती से उभरे हैं। मगर इसके संगीत में ऐसी कोई बात नहीं जो जिसमें वहां की मिट्टी की महक हो।

अदालत में तीनों कलाकारों की नोंक-झोंक समेत इस जिज्ञासा से भी फिल्म देखी जा सकती है कि जॉली एलएलबी का पार्ट टू कैसा बना होगा।
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