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Durga Khote: मिलिए बॉलीवुड की पहली बागी हीरोइन से, स्पॉट दादा को बचाने के लिए भिड़ गईं दहाड़ते शेर से

Fri, 22 Sep 2023 09:10 PM IST
पलक शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

भारतीय सिनेमा की पहली पढ़ी लिखी अभिनेत्री दुर्गा खोटे को दर्शकों की एक पीढ़ी ने शक्ति के रूप में देखा, दूसरी ने आदर्श पत्नी माना और तीसरी पीढ़ी ने उन्हें परदे पर आदर्श माता के रूप में अपनाया। जरा रुकिये, सिलसिला चौथी पीढ़ी तक जारी रहा और इस पीढ़ी ने उन्हें आदर्श दादी की तरह स्वीकार किया। स्टूडियो सिस्टम (मासिक वेतन पर फिल्मों में काम करने का अनुबंध) नाता तोड़ कर फ्रीलांस अभिनेत्री के तौर पर काम करने वाली दुर्गा खोटे भारतीय सिनेमा की पहली अभिनेत्री हैं। दुर्गा खोटे का फिल्मी सफर बहुत ही प्रेरणा दायक रहा है। उनकी पुण्य तिथि पर आएए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़े 10 खास किस्से...

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

फिल्म 'मुगल -ए -आजम' में सलीम की मां जोधबाई की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री दुर्गा खोटे की कम उम्र में ही शादी हो गई थी। उनकी वैवाहिक जिंदगी बहुत अच्छी चल रही थी  लेकिन अचानक ही उनके पति का निधन हो गया। उस समय दुर्गा खोटे की उम्र महज 26 साल की थी। पति के निधन से दुर्गा खोटे को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा, और ना चाहते हुए भी फिल्मों में काम करना पड़ा। उनकी पहली फिल्म रीलीज हुई तो लोगों ने कड़ी निंदा की। साथ ही उनकी फिल्म भी फ्लॉप रही। लोगों की आलोचना और पहली ही फिल्म फ्लॉप होने पर उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली।

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वी शांताराम के कहने पर दोबारा दुर्गा खोटे ने इंडस्ट्री में कदम रखा और पांच दशकों तक इस इंडस्ट्री का हिस्सा बनी रही, फिल्मों में काम करने के दौरान उन्होंने खुद का बेटा भी खोया और फिल्म इंडस्ट्री में मां भी बनी। दुर्गा खोटे ने अपनी निडरता के जरिए फिल्म इंडस्ट्री की पहली फ्रीलांस करने वाली अभिनेत्री बनी । यह दादा साहब फाल्के पुरस्कार हासिल करने वाली चौथी अभिनेत्री हैं।

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दुर्गा खोटे का जन्म 14 जनवरी 1905 को एक ब्राह्मण परिवार में गोवा में हुआ था। बचपन में उनका नाम वीटा लाड था। उनके पिता का नाम  पांडुरंग शामराव लाड और उनकी माता का नाम मंजुलाबाई था। उनके पिता उस जमाने के जाने माने वकील थी। गोवा से उनका परिवार मुंबई (बॉम्बे) शिफ्ट हो गया। वह अमीर खानदान से ताल्लुक रखती थी। और, जिस समय महिलाओ को पढ़ने नहीं दिया जाता था उस समय उन्होंने मुंबई के कैथेड्रल हाई स्कूल प्रारंभिक शिक्षा और सेंट जेवियर्स कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जब दुर्गा खोटे कॉलेज में पढ़ाई कर रही थी तभी उनके परिवार वालों ने उनकी शादी एक अमीर खानदान में विश्वनाथ खोटे से कर दी। उनके पति पेशे से मकैनिकल इंजीयर थे । दोनों का वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा चल रहा था। दोनो के दो बेटे भी हुए, लेकिन दुर्गा खोटे की यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी। पति के गुजर जाने के बाद उनका और उनके बच्चों का पालन उनके ससुर ने किया, लेकिन कुछ ही दिनों के बाद ससुर का भी निधन हो गया । इसके बाद परिवार के कुछ लोगों ने दुर्गा खोटे की मदद की, लेकिन उनको लगा कि वह दूसरों पर आश्रित नहीं रह सकती हैं। 

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दुर्गा खोटे को लगा कि घर चलाने के लिए उन्हें कुछ ना कुछ काम करना पड़ेगा , पढ़ी लिखी वह थी ही, तो वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगी। जिससे परिवार का गुजरा चलने लगा । दुर्गा खोटे की बहन शालिनी के एक परिचित जे वी एच वाडिया  अपनी फिल्म में एक रोल के लिए किसी नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। उन्होंने शालिनी से कहा कि वो उनकी फिल्म करें, लेकिन शालिनी ने मना कर दिया और उस रोल के लिए अपनी बहन दुर्गा खोटे का नाम सुझाया। जब जे वी एच वाडिया ने दुर्गा से मुलाकात की और उन्हें फिल्मों में काम करने का ऑफर दिया तो उन्होंने हामी भर दी क्योंकि उन्हे पैसों की जरूरत थी । इस तरह से उन्होंने पहली बार मूक फिल्म 'फरेबी चाल' में काम किया। यह फिल्म 1931 में रिलीज हुई। 

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शशि कपूर, दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दुर्गा खोटे ने उस जमाने मे फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था, जब लड़कियों के रोल भी लड़के ही किया करते थे। फिल्मों में काम करने से दुर्गा खोटे की खूब आलोचना हुई। लोगों के तानों से वह बुरी तरह से टूट गई और इस वजह से उन्होंने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी पहली फिल्म की एक्टिंग से वी शांताराम बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी फिल्म 'आयोध्याचा राजा' में तारामती का किरदार उन्हें दे दिया।

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अयोध्या का राजा फिल्म पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

पहले तो दुर्गा खोटे ने वी शांताराम के इस ऑफर को ठुकरा दिया था लेकिन बाद में वह वी शांताराम के बहुत समझने के बाद उन्होंने इस फिल्म में वापसी की। इस फिल्म की रिलीज से पहले वह बहुत ही घबराई हुई थी, उन्हें डर था कि कहीं लोग उनकी फिल्म का फिर बहिष्कार ना कर दें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ उनका यह किरदार लोगों को खूब पसंद आया। इस फिल्म के बाद दुर्गा खोटे स्टार बन गई। फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और पांच दशक तक करीब 200 फिल्मों में काम किया।  

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दुर्गा खोटे हिन्दी सिनेमा की पहली ऐसी अभिनेत्री थी, जिन्होंने स्टूडियो सिस्टम को खत्म कर दिया और फ्री लांस काम करने वाली पहली अभिनेत्री बन गई। असल में पहले जो एक्टर थे, वह किसी न किसी स्टूडियों में महीने के वेतन पर काम करते थे ,और वहां बनने वाली फिल्मों में काम करते थे। लेकिन दुर्गा खोटे ने इस चलन को तोड़ दिया। दुर्गा खोटे का एक और किस्सा बहुत मशहूर है कि वह एक फिल्म की शूटिंग कोल्हापूर में कर रही थी। वहां शूटिंग के दौरान कुछ शेरो को लाया गया था। उनके साथ शेरों का ट्रेनर भी था, तभी अचनक एक शेर ने एक कर्मचारी को दबोच लिया और उस आदमी को बचाने के लिए दुर्गा खोटे उस शेर से भीड़ गई। थोड़ी देर के बाद ट्रेनर ने शेर को शांत कराया और दुर्गा भी बाल बाल बच गईं।

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

दुर्गा खोटे ने फिल्म निर्देशन में भी हाथ आजमाया। उन्होंने फैक्ट हाऊस प्रोडक्शन के तले कई शॉर्ट फिल्में बनाई जिसके लिए उन्हें काफी सराहा गया। वह विदेशी फिल्म फेस्टिवल में भी जाया करती थी, जिसकी वजह से उन्हे फिल्म प्रोडक्शन में काफी मदद मिलती थी। उन्होंने एक फिल्म 'साथी' बनाई थी, जो बॉक्स ऑफिस पर असफल रही, जिसके बाद उन्होंने कोई फिल्म नहीं बनाई।

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दुर्गा खोटे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

जब दुर्गा खोटे फिल्मों में सक्रिय थी. तभी उनके बेटे का निधन हो गया । बेटे के चले जाने से उन्हें गहरा सदमा लगा। खुद के बेटे को खोने के बाद वह ऑनस्क्रीन मां बनकर उभरीं। उन्होंने फिल्म 'मुगल - ए -आजम' में सलीम की मां जोधाबाई की भूमिका निभाई, जो आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। दुर्गा खोटे ने फिल्म इंडस्ट्री में पांच दशकों तक काम किया, उनकी आखिरी फिल्म 1980 में सुभाष घई की 'कर्ज' रिलीज हुई थी। इसके बाद खराब स्वास्थ्य की वजह से फिल्मों में काम करना बंद कर दिया और 22 सितंबर 1991 को 86 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

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