अरविंद अकेला 'कल्लू'
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एक रात की कहानियां
हिंदी सिनेमा मेँ एक रात की कहानी पर ‘अनोखी रात’,‘जागते रहो’,‘इत्तेफाक’,‘ओह डार्लिंग ये है इंडिया’,‘इस रात की सुबह नहीं’,‘चमेली’,‘फरार’,‘कौन’, ‘एक चालीस की लास्ट लोकल’ और ‘माय फ्रेंड पिंटो’ जैसी कई फिल्में बन चुकी हैं। इन फिल्मों में से ‘जागते रहो’, ‘अनोखी रात’ और ‘माय फ्रेंड पिंटो’ में एक रात के दौरान दुनिया अपनी हकीकत में खुलती है कि रात के अंधेरे में किस तरह इंसान अपने असली रूप में प्रकट होता है, ये इन फिल्मों में नजर आता है। इन तीनों फिल्मों का नजरिया बहुत हद तक दार्शनिक