चार हजार गाने, 40 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन और करीब चार दशकों तक सिनेमा पर संगीत का जादू बिखेरने वाले जादूगर आनंद आनंद बक्शी ने जो कलम से लिखा वो संगीत की दुनिया में सुनहरा इतिहास बनकर दर्ज हो गया। शमशाद बेगम, अलका याग्निक, मन्ना डे और कुमार सानू जैसे गायक आते- जाते रहे लेकिन शब्दों को संगीत में पिरोने वाले आनंद बक्शी हमेशा मैदान में खड़े रहे। आनंद आनंद बक्शी का जन्म 21 जुलाई साल 1930 में मौजूदा पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में हुआ था।
जब मन कुछ ऐसा सुनने को करता है, जो दिल को छुए तो ऐसे में याद आते हैं आनंद बक्शी के गीत। गीतकार तो बहुत हुए हैं, लेकिन आनंद बक्शी के गीतों की खासियत उनकी सादगी ही रही। उनके गाने के बोल इतने सरल होते हैं कि आम आदमी की जुबान उन शब्दों के साथ पल भर में ही सहज महसूस करती है। हर गाने में एक फलसफा और फलसफे का अपना अलग अंदाज। यही वजह रही है कि उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। शब्दों के बाजीगर आनंद आनंद बक्शी की जन्म तिथि पर आज हम आपको उनके कुछ यादगार गीत सुनाते हैं।