सबा सहर
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ऐसे हिंसक माहोल में सबा को देश छोड़कर पाकिस्तान जाना पड़ा था। पाकिस्तान में रहते हुए सबा ने अमेरिका में पनाह मांगी और साल 2001 में उन्हें वीजा मिल गया। जब तालिबान की तानशाही ढह गई तो सबा फिर से अपने देश लौट आईं और अपनी प्रोडक्शन कंपनी स्थापित की। उनके इस सफर में कुछ और निर्देशकों ने उनका साथ दिया और अफगान फिल्म इंडस्ट्री का पुनर्जन्म हुआ। 2004 में सबा की पहली फिल्म 'द लॉ' को काबुल में प्रीमियर किया गया। थिएटर के मालिक को डर था कि दंगा हो सकता है लेकिन जब फिल्म दिखाई गई तो लोगों को ये बहुत पसंद आई और फिल्म हिट साबित हुई। सबा ने कहा था कि, 'मैं ये दिखाना चाहती हूं कि अफगानिस्तान में जंग, ड्रग्स और आतंकवाद के अलावा भी बहुत कुछ है'। सबा ने बताया था कि उनकी फिल्मों के लेकर तालिबान के कमांडर ने उन्हें जान के मारने की धमकी दी थी। उनसे कहा गया था कि ये फिल्में शरिया के खिलाफ हैं और अगर ये बंद नहीं हुई तो उन्हें शरिया के मुताबिक सजा दी जाएगी।