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सबा सहर: कहानी अफगानिस्तान की पहली फिल्म निर्देशक की, जिस पर तालिबान ने चलाई थीं गोलियां

Wed, 18 Aug 2021 05:06 PM IST
विजयाश्री गौर एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
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सबा सहर - फोटो : सोशल मीडिया
अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा जमा लिया और इस देश का हर एक शख्स दहशत में हैं। लोग अपनी जान बचाने के विमानों से भागने की कोशिश कर रहे हैं। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पहले ही देश छोड़ दिया और अब वहां के लोग बेबस महसूस कर रहे हैं। हर जगह अफगानिस्तान के लोगों की सुरक्षा के लिए लोग दुआ मांग रहे हैं और इसे लेकर जोरदार बहस हो रही है। ये भी सवाल उठ रहे हैं कि वहां की महिलाओं का क्या होगा और अपनी सख्ती के लिए मशहूर तालिबान वहां के फिल्म उद्योग के साथ क्या करेगा।

जब सबा सहर पर तालिबान ने किया हमला

अफगानिस्तान में महिलाओं ने सिर्फ अभिनय ही नहीं बल्कि निर्देशक और निर्माता को रोल में भी अपनी प्रतिभा साबित की है। आज आपको बताते हैं अफगानिस्तान की पहली महिला फिल्म निर्देशक और निर्माता सबा सहर के बारे में जिन्होंने अपने सपनों को उड़ान देने के लिए परिवार और तालिबान तक से लड़ाई तक लड़ी है।
 
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सबा सहर - फोटो : सोशल मीडिया
28 अगस्त 1975 को काबुल में सबा सहर का जन्म हुआ था। वो अफगानिस्तानी अभिनेत्री हैं और वहां की पहली फिल्म निर्देशक और निर्माता हैं। सबा को बचपन से ही फिल्मों में काम करने का शौक था वो हमेशा से अभिनेत्री बनने का सपना देखती थी। सबा महज आठ साल की थीं जब उन्होंने पहला स्टेज अपीयरेंस दिया था। उनके परिवार वाले इस फैसले के खिलाफ थे। हालांकि जब उनके पिता ने उनकी परफॉरमेंस देखी तो उनके अभिनय के कायल हो गए।
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तालिबान - फोटो : twitter
आज जो अफगानिस्तान में माहौल है वो 24-25 साल पहले भी हुआ था। जब 1996 में सबा अपना पहला स्क्रीनप्ले लिख रही थीं जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था तालिबानियों ने अफगानिस्तानी सिनेमा को लोगों को नैतिकता के रास्ते से भटकाने वाला बता दिया था। उस साल अफगानिस्तान द्वारा चलाई जा रही फिल्म कंपनी के कई दफ्तर तबाह कर दिए गए थे।

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सबा सहर - फोटो : सोशल मीडिया
ऐसे हिंसक माहोल में सबा को देश छोड़कर पाकिस्तान जाना पड़ा था। पाकिस्तान में रहते हुए सबा ने अमेरिका में पनाह मांगी और साल 2001 में उन्हें वीजा मिल गया। जब तालिबान की तानशाही ढह गई तो सबा फिर से अपने देश लौट आईं और अपनी प्रोडक्शन कंपनी स्थापित की। उनके इस सफर में कुछ और निर्देशकों ने उनका साथ दिया और अफगान फिल्म इंडस्ट्री का पुनर्जन्म हुआ। 2004 में सबा की पहली फिल्म 'द लॉ'  को काबुल में प्रीमियर किया गया। थिएटर के मालिक को डर था कि दंगा हो सकता है लेकिन जब फिल्म दिखाई गई तो लोगों को ये बहुत पसंद आई और फिल्म हिट साबित हुई। सबा ने कहा था कि, 'मैं ये दिखाना चाहती हूं कि अफगानिस्तान में जंग, ड्रग्स और आतंकवाद के अलावा भी बहुत कुछ है'। सबा ने बताया था कि उनकी फिल्मों के लेकर तालिबान के कमांडर ने उन्हें जान के मारने की धमकी दी थी। उनसे कहा गया था कि ये फिल्में शरिया के खिलाफ हैं और अगर ये बंद नहीं हुई तो उन्हें शरिया के मुताबिक सजा दी जाएगी।
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सबा सहर - फोटो : सोशल मीडिया
जब तालिबान ने उस वक्त अफगानिस्तान पर कब्जा किया था तो घरों को काले रंग से रंग दिया था जिससे महिलाओं को बाहर के लोग ना देख पाएं। जब तालिबान का कहर खत्म हुआ तो सबा सहर ने घर के बाहर कदम रखे और पूरे ढके लेकिन मॉडर्न अवतार के कपड़ो में नजर आईं। सबा जो भी फिल्में बनाती हैं उनकी कहानियां पुलिस पर आधारित होती हैं। जब सबा 14 साल की थी तो उन्होंने देश के आंतरिक मंत्रालय से ट्रेनिंग ली थी। सबा के दो बेटे और दो बेटियां हैं। उन्हे अपनी जान का खतरा रहता है। उन्हें कई बार धमकी दी गई थी उन्हें जान से मार दिया जाएगा। जब आंतरिक मंत्रालय को इस बात की जानकारी हुई तो इन नंबर्स को ट्रेस किया गया जो कि कंधार में पाए गए थे। हालांकि धमकी भरे कॉल्स का सिलसिला यहीं नहीं रुका और उन्हें और भी धमकियां मिलने लगीं। वो कहते थे हम तुम्हें गली में जनता के बीच मार देंगे। इसके बाद सबा एक बंदूक और हथियारों से लैस बॉडीगार्ड रखने लगीं।
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सबा सहर - फोटो : सोशल मीडिया
सबा की आवाज को दबाने के लिए साल 2020 में उन पर तालिबान ने हमला किया। वो अपनी बेटी के साथ कार में थीं जब उनके ऊपर गोलियां चला दी गईं। उनके पेट में चार गोलियां लगी थीं लेकिन सबा घबराई नहीं और वहां से भाग निकलीं थीं। सबा का कहना है कि, 'अगर मुझे मेरे हक और महिलाओं को प्रेरित करने के लिए मरना पड़े तो मैं इसके लिए भी तैयार हूं'। 
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