सचिन विद्रोही
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
मतलब, थियेटर के साथ साथ पढ़ाई भी चलती रही?
जी, जिस दिन इंजीनियरिंग का फाइनल एग्जाम दिया। पापा ने कहा कि चलो अब ट्रेनिंग शुरू करो। हमें तो लग रहा था कि थियेटर ही करना है। पापा कहां जाने को बोल रहे हैं। मैने पापा से कहा कि दो साल का समय मुझे दे दें। अगर एक्टिंग में कुछ नहीं हुआ तो सिविल इंजीनियरिंग की जॉब कर लेंगे। मैंने कई लोगों को मैसेज किया कि मेरे एग्जाम खत्म हो गए है। अगर कोई काम हो तो बताइए, उनमें से कुलजीत का जवाब आया कि आ जाओ। उन्होंने कहा कि अभी एक्टिंग में कोई जगह खाली नहीं है, वर्कशॉप में असिस्ट कर सकते हो। कुछ दिनों तक असिस्ट किया। तीन साल तक थियेटर किया। 2017 से लेकर 2020 तक वहां नाटक किए। मैंने वहां आखिरी नाटक ‘आषाढ़ का एक दिन’ किया।