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Omicron in India: ओमिक्रॉन की भारत में दस्तक, एक्सपर्ट बोले- स्कूलों को बंद करने से पहले सोच-समझकर योजना बनाए सरकार

Fri, 03 Dec 2021 08:10 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

New Covid Variant Omicron Virus in India: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ऐसे में विभिन्न राज्यों में स्कूल खुले होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है। अधिकतर अभिभावक यह सोचकर चिंतित हैं कि क्या फिर से लॉकडाउन होगा, क्या स्कूल बंद हो जाएंगे।
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ओमिक्रॉन की भारत में दस्तक - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कोरोना वायरस के प्रकोप के लंबे समय बंद पड़े स्कूल विभिन्न राज्यों में खुलने ही लगे थे कि फिर से वायरस का नया स्ट्रेन ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 का यह नया वैरिएंट भारत में भी प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इसके दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ऐसे में विभिन्न राज्यों में स्कूल खुले होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है।
अधिकतर अभिभावक यह सोचकर चिंतित हैं कि क्या फिर से लॉकडाउन होगा, क्या स्कूल बंद हो जाएंगे। हालांकि, अभी स्कूल बंद होने और दोबारा लॉकडाउन लगने के आसार कम हैं। इस बीच, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने सरकारों को कुछ सुझाव दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है, लंबे समय तक स्कूलों को बंद करने से पहले सरकारों को सोच-समझकर योजना बनाने की जरूरत है। 



विशेषज्ञों के अनुसार, ओमिक्रॉन को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में नामित किया गया था, जो कोरोनो वायरस वैरिएंट की चिंता के लिए शीर्ष श्रेणी में शामिल है। बीते साल भी कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन से पहले पिछले साल मार्च में देश भर के स्कूल बंद कर दिए गए थे। कई राज्यों ने लंबे समय तक बंद रहने के बाद विभिन्न कक्षाओं के लिए आंशिक रूप से स्कूल फिर से खोल दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय है जब हम भविष्य की शिक्षा प्रणाली की ओर आगे बढ़ें। 
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school reopeing - फोटो : istock

स्कूलों में कोविड-19 बचाव निर्देशों का सख्ती से हो पालन : प्रोफेसर प्रज्ञा

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर प्रज्ञा शर्मा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की रिपोर्ट, जिसने सबसे पहले कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन संस्करण की सूचना दी थी, यह सुझाव देती है कि यह एक हल्के संक्रमण का कारण बनता है और दिल्ली में 97 प्रतिशत की उच्च सीरो-पॉजिटिविटी है।
बच्चों में भी नवीनतम सीरो-सर्वेक्षण के दौरान 80 प्रतिशत से अधिक की सीरो सकारात्मकता की जानकारी मिली थी। इसलिए, इससे दिल्ली में बड़ी लहर नहीं आनी चाहिए।
शर्मा ने कहा, हमें शारीरिक तौर पर कक्षाएं फिर से शुरू करनी चाहिए, लेकिन बहुत सावधानी के साथ और स्कूलों में कोविड-उपयुक्त व्यवहार का सख्ती से पालन करना चाहिए।
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school shimla - फोटो : अमर उजाला

बच्चों को घर पर ही रखना भी सुरक्षा की गारंटी नहीं : प्रो अरुण

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर अरुण शर्मा के अनुसार, अभी ओमिक्रॉन की संक्रामकता, ट्रांसमिसिबिलिटी और मौजूदा प्रतिरक्षा स्थिति के साथ इसका संबंध के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने कहा, इसलिए, अब हम जो कुछ भी कहेंगे वह अनुमान होगा, लेकिन सरकार जीनोमिक सीक्वेंसिंग के लिए अधिक नमूने एकत्र करने, हवाईअड्डे पर जांच लागू करने आदि के लिए सभी कदम उठा रही है। 
स्कूलों को फिर से खोलना या बंद करना यह एक कठिन निर्णय है। लेकिन, बच्चों को घर पर ही रखना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि वे संक्रमित नहीं होंगे।

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यूपी में स्कूल खुले - फोटो : अमर उजाला

कक्षाएं सावधानीपूर्वक शुरू की जा सकती हैं : डॉ मदान

एम्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ करण मदान का कहना है कि स्कूलों में शारीरिक कक्षाएं सावधानीपूर्वक निगरानी के तहत फिर से शुरू की जा सकती हैं। फिलहाल दिल्ली में कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या ज्यादा नहीं है। यदि रोगसूचक मामले बढ़ने लगते हैं, तो हमें उसके अनुसार कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि अभी के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी और निगरानी में चीजों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

शिक्षा क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित : सीमा कौर

पैसिफिक वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल सीमा कौर ने कहा कि जैसे ही स्कूलों को खोलना शुरू किया था, नए वायरस से आने वाले खतरे ने अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है।  शिक्षा क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसमें बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक और मानसिक कौशल प्रभावित हुए हैं। कोरोना की वास्तविक चुनौती स्थिति को समझना और सभी की सुरक्षा के लिए सावधानी जरूरी है।
भारत में, मामलों की वृद्धि दर की तुलना में रिकवरी दर बहुत अधिक है। इसलिए, उपयुक्त निर्णय लिया जाना चाहिए। कौर ने कहा, जैसे-जैसे मामले बढ़ते हैं, शिक्षा के ऑनलाइन मोड पर स्विच करना सही है; लेकिन जब संख्या नियंत्रण में होती है, तो हमें इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए और जो ऑनलाइन मोड के कारण पिछड़ गए हैं, उन्हें स्कूल बुलाना शुरू कर देना चाहिए। 

 

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school reopen - फोटो : अमर उजाला

सीखने के स्तर में एक बड़ा अंतर पैदा किया : अंशु मित्तल

वहीं, एमआरजी स्कूल, रोहिणी की प्रिंसिपल अंशु मित्तल का मानना है कि स्कूल को फिर से खोलना अब महत्वपूर्ण है क्योंकि छात्र पिछले 18 महीनों से अपने सक्रिय सीखने और सामाजिक जीवन से वंचित हैं, जिसने निश्चित रूप से उनके लिए सीखने के लिए एक बड़ा अंतर पैदा किया है। मित्तल ने कहा, स्कूलों को माता-पिता के साथ लगातार संपर्क रखना चाहिए और अभिभावक भी अपनी यात्राओं या संक्रमित क्षेत्रों में आवागमन की जानकारी भी दें तो बेहतर रहेगा। 
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