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तस्वीरें: साहब! मेरा बच्चा बीमार है, इलाज कर दो, गोद में मासूम को लिए गिड़गिड़ाती रही मां

Fri, 02 Aug 2019 03:06 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान मां अपने बच्चों को लेकर जाती हुई - फोटो : अमर उजाला
साहब! मेरा बच्चा बीमार है। इसका इलाज कर दो, बुधवार रात से इसने कुछ नहीं खाया है। बड़ी दूर से आई हूं। इसे कुछ दवा दे दो। यह पीड़ा थी 12 वर्षीय आमिर की मां की। वह अपने बेटे को गोद में लेकर लोकनायक अस्पताल में इधर- उधर दौड़ रही थी और डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़कर बच्चे के इलाज के लिए मिन्नतें कर रही थीं।
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डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान लोग - फोटो : अमर उजाला
ठीक ऐसा ही हाल जसप्रीत का था, जिनके हाथ में पिता का अंबु बैग था। पिता-पुत्र दोंनों अंबु बैग के साथ ही इधर- उधर भाग रहे थे। बृहस्पतिवार जब रोहिणी से डीडीयू और वहां से लोकनायक पहुंचे जसप्रीत अपने पिता को लेकर आपातकालीन वार्ड पहुंचा तो वहां मौजूद डॉक्टरों ने उसे एम्स ले जाने की सलाह दी। मरीज की स्थिति काफी गंभीर थी। जसप्रीत ने डॉक्टरों से कहा कि वह अंबु बैग के साथ अब तक कई अस्पतालों के चक्कर लगा चुका है, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि इलाज कराने अब सरकार के पास जाओ।
 
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डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान मरीज और उनके परिजन - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक को लेकर सरकार के खिलाफ हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों में इस कदर नाराजगी थी कि उसके आगे मरीजों की पीड़ा भी कोई मायने नहीं रख रही थी। राजधानी के करीब 50 से ज्यादा सरकारी अस्पतालों में हड़ताल होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए दिनभर भटकना पड़ा। वहीं करीब 80 हजार से ज्यादा मरीजों को उपचार नहीं मिल सका। 

आरएमएल अस्पताल, सुबह 8: 30 बजे

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डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान मरीज और उसके परिजन - फोटो : अमर उजाला
बृहस्पतिवार सुबह नई दिल्ली स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल। ओपीडी काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन। कई मरीजों को बाहर गेट पर ही सुरक्षा गार्ड डॉक्टरों की हड़ताल के बारे में कहते हुए वापस लौटा रहे थे, पर अधिकतर मरीजों को सुरक्षा गार्डों की बातों पर भरोसा नहीं था। ओपीडी के बाहर मुख्य गेट बंद होने के कारण मरीज आरएमएल परिसर में ही एकत्रित होने लगे। इसके बाद कुछ डॉक्टर बाहर आए और उन्होंने सोमवार को अस्पताल आने के लिए कहा। उधर आपातकालीन विभाग में एक या दो डॉक्टर जरूर दिखाई दिए, लेकिन यहां उपचार के लिए मरीजों को खासी परेशानी हुईं। 
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जीटीबी अस्पताल, सुबह 9 बजे 

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डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में हर रोज औसतन पांच से सात हजार मरीज आते हैं। यहां रेजिडेंट से लेकर वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी ओपीडी में मरीज नहीं देखे। अस्पताल में ओपीडी के लिए आने वाले सभी मरीजों को निराशा मिली। मरीजों का कहना था कि दवाओं के काउंटर खुले रहने से कम से कम फॉलोअप मरीजों को दवाएं तो मिल सकती थीं। लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इसका भी ध्यान नहीं रखा। यहां मातृ- शिशु वार्ड में महिला मरीज और उनके तीमारदार डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। सुनीता ने बताया कि उन्हें देखने के लिए सुबह से कोई डॉक्टर नहीं आया हालांकि नर्सिंग स्टाफ उनकी देखरेख के लिए उपलब्ध थे।  
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लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, सुबह 10 बजे

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डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में सुबह 10 बजे मरीजों की काफी भीड़ थी। इसी अस्पताल परिसर में केंद्र सरकार का सुचेता कृपलानी बाल चिकित्सालय भी होने के कारण मरीजों की संख्या काफी थी। यहां दिल्ली के रवि कुमार ने बताया कि वे अपनी पत्नी के ऑपरेशन  के लिए अस्पताल आए थे। ऑपरेशन की तारीख देने के बाद दोबारा बुलाया गया था लेकिन भारी भीड़ और डॉक्टरों की कमी के चलते उन्हें परामर्श नहीं मिल सका। इसी तरह बदरपुर से आए सुनील कुमार का कहना था कि कमर में दर्द की शिकायत थी लेकिन उनका पंजीकरण नहीं हो सका। 
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जीबी पंत अस्पताल सुबह 11.20 बजे

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डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर निवासी सत्येंद्र चौहान का कहना है कि उन्होंने पिछले वर्ष ही हार्ट सर्जरी कराई थी। बीते कुछ दिन से वह अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं। डॉक्टरों ने उसे बृहस्पतिवार को बुलाया था लेकिन यहां दो घंटे से लाइन में खड़े होने के बाद भी उनका नंबर नहीं आया। बाद में डॉक्टर ही कमरा छोड़कर चले गए। 
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लोकनायक अस्पताल दोपहर 12.10 बजे

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डॉक्टरों की हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
लोकनायक अस्पताल पहुंचे विमल कुमार ने बताया कि उनका चार साल के बेटे को पैर में तकलीफ है। काफी अस्पतालों में दिखाने के बाद वे यहां पहुंचे थे। डॉक्टरों ने 1 अगस्त को ऑपरेशन की तारीख दी थी, लेकिन हड़ताल के चलते अब उन्हें फिर से यहां आना पड़ेगा। ऐसा ही हाल गीता कॉलोनी निवासी विश्वजीत वर्मा का था। विश्वजीत अपनी भतीजी को लेकर अस्पताल आए थे। उसके पेट में हमेशा ही दर्द रहता है। भतीजी बुलंदशहर के पास एक गांव में रहती है। उन्होंने बताया कि काफी कोशिशें के बावजूद उनकी भतीजी का इलाज नहीं हुआ।
 
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