दिल्ली के पब्लिक ट्रांसपोर्ट में पहली बैट्री चालित बस सेवा बृहस्पतिवार को शुरू हो गई है। छह महीने के ट्रायल रन पर परिवहन मंत्री गोपाल राय ने दिल्ली सचिवालय से इसे हरी झंडी दिखाई। एक निजी कंपनी के खर्च पर सरकार एक बस से एक रूट पर यह ट्रायल कर रही है। फूल एसी इस बैट्री चालित बस में 31 लोगों के बैठने की जगह है, जिसकी कीमत तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है। परिवहन मंत्री ने कहा कि अगर यह ट्रायल रन सफल रहा तो इसे डीटीसी खरीदेगी।
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Electric Bus in Delhi
- फोटो : Anil Kumar
परिवहन मंत्री गोपाय राय ने बताया कि यह ट्रायल रन दिल्ली डायलॉग कमीशन की पहल पर कंपनी की ओर से किया जा रहा है। बस की कीमत तीन करोड़ है, जिसे खुद कंपनी उठा रही है। सरकार कंपनी को सिर्फ बस की पार्किंग और एक चार्जिंग स्टेशन के अलावा बस चालक व कंडक्टर उपलब्ध करा रही है जो कि मिलेनियम डिपो में है। उन्होंने कहा कि बस दिल्ली सचिवालय से केंद्रीय सचिवालय के बीच चलेगी। गोपाल राय ने कहा कि इस बस में दूसरे डीटीसी बस के नियम ही लागू होंगे। इसमें एसी बस की ही तरह किराया लगेगा। इसमें सभी तरह के बस पास मान्य होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रायल रन सफल रहा तो हम जो एक हजार प्रीमियम बसें दिल्ली में लाएंगे उसमें बैट्री चालित बसों को भी शामिल करेंगे।
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कंपनी प्रतिनिधि ने दावा किया है कि यह देश की पहली फुली इलेक्ट्रिक बस है जो कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में प्रयोग की जाएगी। कंपनी के मुताबिक, यह बस चीन से आयात की गई है। इसलिए इसकी कीमत ज्यादा है। अगर यह भारत में बनाई जाती है तो इसकी कीमत मौजूदा सामान्य एसी बसों के बराबर होगी।
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बस की खासियत : बस को हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसमें 31 लोग बैठ सकते हैं। इसमें सीसीटीवी कैमरा, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के साथ एफएम की भी सुविधा दी गई है। अगर कोई बीमार हो जाता है तो एक हाफ बेड भी इस बस में उपलब्ध है। बस हाइड्रोलिक बेस्ड है यानी बस को सड़क के लिहाज से ऊपर नीचे किया जा सकता है। बस के सभी सीट पर इमरजेंसी के दौरान हथौड़ा उपलब्ध है। बस की बैट्री 4-5 घंटे में फुल चार्ज हो जाती है। एक बार फुल चार्ज होने पर यह 280 किलोमीटर तक चल सकती है।
गुजरात में रजिस्टर्ड है बस : दिल्ली में चल रही बैट्री चालित बस गुजरात नंबर की है। बस का परमिट भी गुजरात का है। दिल्ली में उसे चलाने के लिए अस्थायी परमिट जारी किया गया है। इस पर कंपनी का कहना है कि बस को बाहर से आयात किया गया है। चूंकि पोर्ट (बंदरगाह) गुजरात में ही है तो बस वहीं पर पहुंची। बिना रजिस्ट्रेशन पर सड़क पर नहीं चल सकती थी इसलिए वहीं का पंजीकरण कराना पड़ा।