दीप्ति का अपहरण कर गाजियाबाद में हड़कंप और लखनऊ तक गूंज मचाने वाले साइको लवर देवेंद्र को दीप्ति का नाम तक मालूम नहीं था। एक साल तक उससे दीवानगी का दावा करने वाले देवेंद्र ने अपने दोस्तों को भी उसका नाम गलत बताया था। उसने स्नेहा नाम बताया था। उसे दीप्ति का नाम स्नेहा पता था। उससे पूछा गया तो हकलाते हुए बोला, ‘स्नेहा।’ तब पुलिसवालों ने उसे उसी के लहजे में बताया कि नाम ‘द द दीप्ति’ है। देवेंद्र ने दावा किया कि वह शाहरुख का फैन है। उसने डर, दीवाना और अंजाम 100 से ज्यादा बार देखी। उसे शाहरुख का प्यार करने का अंदाज बहुत पसंद है।
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असल जिंदगी के सनकी आशिक ने 'डर' के शाहरुख को भी पीछे छोड़ा
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देवेंद्र के ड्रामे में दीप्ति इस कदर उलझ गई थी कि वह विलेन देवेंद्र को ‘हीरो’ समझने लगी थी। देवेंद्र ने 36 घंटे के भीतर दीप्ति के सामने खुद को ऐसा शो किया कि वह उसके लिए कुछ भी कर सकता है, दीप्ति को असुरक्षित महसूस न होने दिया, इसलिए दीप्ति ने देवेंद्र को न पकड़ने के लिए एसएसपी से कहा था। बकौल एसएसपी, देवेंद्र ने रेलवे स्टेशन पर छोड़ते वक्त दीप्ति से कहा था कि वह अब उसे दोस्त समझेगी या दुश्मन। देवेंद्र का कहना है कि उसने कहा था कि दोस्त। मगर पुलिस और दीप्ति का कहना है कि उसने कोई जवाब नहीं दिया था।
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देवेंद्र ने कहा कि दीप्ति का अपहरण करने के बाद बदमाशों ने उसे अपनी मर्जी से छोड़ भी दिया। उन पर किसी का कोई दबाव नहीं था। अपहरण कि वजह देवेंद्र ने बताया कि वह दीप्ति के दिल में जगह बनाना चाहता था, इसलिए अपहरण किया था, जबकि एसएसपी का दावा है कि पुलिस के दबाव में किडनैपर ने दीप्ति को छोड़ा।
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पुलिस ने अपहरण के करीब 113 घंटे खुलासा किया। पुलिस और देवेंद्र के मुताबिक, 10 फरवरी को पौने आठ बजे वैशाली मेेट्रो स्टेशन से दीप्ति ऑटो में बैठ गई। प्लानिंग के तहत ऑटो में माजिद और फहीम भी बैठे थे। ऑटो का पीछा करने के लिए देवेंद्र दूसरे ऑटो में प्रदीप के साथ था। उनके पीछे कार में मोहित था। दीप्ति जिस ऑटो में थी, उसे बदमाशों ने मोहननगर के पास पंचर कर दिया। इसके बाद पीछे से आ रहे देवेंद्र ने ऑटो में बैठा लिया, दीप्ति के साथ ही एक और लड़की, फहीम, माजिद भी देवेंद्र के ऑटो में बैठ गए।
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राजनगर एक्सटेंशन कट पर बदमाशों ने दीप्ति को चाकू के बल पर अगवा कर दूसरी लड़की को उतार दिया। यहां से बदमाश उसे मोरटी ले गए, जहां ऑटो खराब हो गया। ग्राम प्रधान को आता देख दीप्ति को एक निर्माणाधीन बिल्डिंग के पीछे छिपा दिया। यहीं पर दीप्ति का मोबाइल तोड़कर रेत में दबा दिया। लैपटॉप और बैग को वहां ईंटों के नीचे छिपाकर रख दिया। ऑटो को बदमाशों ने ही सही किया और दीप्ति को मोरटी के जंगलों के रास्ते लेकर पाइप लाइन मार्ग पर पहुंचे। यहां ऑटो की सीएनजी खत्म हो गई।
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दीप्ति ने बताया कि जो खुलासा पुलिस ने बताया वह सही है, अब वह चाहती है कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि दोबारा किसी लड़की का अपहरण न किया जा सके। उसने यह भी कहा कि अब ऑटो और मेट्रो में सफर वह दोबारा करेगी या नहीं इसके बारे में अभी कोई कमेंट भी नहीं कर सकती है। उसने कहा कि जो हुआ वह उसने एसएसपी सर को बता दिया है, एसएसपी ने आप लोगों को बता दिया। सुबह दीप्ति के परिजनों ने बताया कि जो अपहरण का खुलासा हुआ, वही सच है। उन्होंने कहा कि एक बात साफ है कि अपहरणकर्ता परिवार का कोई करीबी नही निकला।
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देवेंद्र ने बताया कि उसकी ख्वाहिश दीप्ति के साथ शादी कर काठमांडू जाने की थी, उसके नाम 30 केस दर्ज हैं, ‘मोहब्बत’ की खातिर एक केस और दर्ज करवा लेगा। लेकिन अब पुलिस ने उसे पकड़ लिया तो वह कह रहा था कि जेल जाने के बाद दीप्ति को भूलने की कोशिश करूंगा। वहीं, देवेंद्र ने दोस्तों से कहा था कि दीप्ति रिसर्र्चर है, वह हवाला का कारोबार करती है। कमरे की चाभी लेकर घूमती है, पकडे़ जाने पर तीन से चार करोड़ रुपये की फिरौती मांगने पर मिल जाएगी।
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तीन लाख का इनामी देवेंद्र तीन माह से गाजियाबाद की सड़कों पर ऑटो चलाता रहा। खोड़ा में रहकर ‘डर’ फिल्म की स्क्रिप्ट लिखता रहा और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। वह नाम बदलकर रहता था, किसी को राजीव बताता था, किसी को लीलू। इसका पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया हुआ था। वह और भी बड़ा क्राइम कर सकता था, या हो सकता है किया भी हो। यानि तमाम इनामी देवेंद्र खुले शहर में घूम रहे हैं। अगर यह फिल्मी अपहरण कांड नहीं होता तो शायद पुलिस उस तक पहुंच भी नहीं पाती। पुलिस को शाम को पता चला कि वह तीन लाख का इनामी है, दोपहर तक उसे 20 हजार रुपये का इनामी ही बता रही थी।
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गांव कामी के कई युवक पहले भी अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते कुख्यात रहे हैं। हालांकि आपराधिक गलियारों में देवेंद्र उर्फ लीलू की जो पहचान थी, वो अन्य किसी की नहीं थी। उसकी दहशत का आलम यह है कि पिछले तीन सालों के दौरान गांव में होने वाले विवाह समारोह में घुड़चढ़ी की रस्म नहीं हुई। इसके पीछे वजह यह थी कि एक शादी समारोह में घुड़चढ़ी के दौरान एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। मुखबिरी के शक में वारदात को अंजाम देने की चर्चा रही, लेकिन पुलिस के यहां यह मामला दर्ज नहीं हुआ था। अपराधियों की दहशत के आगे परिजनों ने पुलिस को शिकायत तक नहीं दी। उस दिन के बाद से गांव कामी में या तो घुड़चढ़ी होती ही नहीं है और अगर होती है तो एक-दो गली में घुमाकर इतिश्री कर ली जाती है।
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पुलिस से देवेंद्र का दावा है वह ‘शोला और शबनम’ फिल्म की तर्ज पर दीप्ति केदिल में प्यार जगाना चाहता था। फिल्म में गोविंदा दिव्या भारती को किडनैप करता है, इसके बाद दिव्या उससे प्यार करने लगती है। हालांकि वह कह रहा है कि उसका प्यार ‘डर’ के शाहरुख खान की तरह का है, जो फिल्म में जूही चावला को पागलपन की हद तक ‘प्यार’ करता है। उसने अपहरण के बाद दीप्ति को अपना नाम राजीव बताया था। उसने अपने साथियों को दीप्ति का नाम स्नेहा बताया था। उधर, ऑटो यूनियन के जिलाध्यक्ष मोहम्मद दिलशाद ने बताया कि किसी ऑटो चालक देवेंद्र को उनकी यूनियन नहीं जानती है।
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दीप्ति के अपहरण की स्क्रिप्ट गाजियाबाद में ही लिखी गई थी। माजिद को पूरे प्लान के बारे में जानकारी थी। माजिद कई साल से गाजियाबाद में ही रहकर ऑटो रिक्शा चलाता है। करीब 15 दिन पहले माजिद ने अपने चाचा फहीम को भी गाजियाबाद बुला लिया था। अपहरण की वारदात को अंजाम देने के बाद फहीम 13 फरवरी को ही गाजियाबाद से ककराला लौटा था। देवेंद्र ने तीन फर्जी डीएल अलग-अलग नाम से बनवाए थे। एक गाजियाबाद और दो हरियाणा से थे। दो डीएल समीर और विनोद के नाम से थे पर फोटो देवेंद्र के ही थे। पुलिस के मुताबिक, दीप्ति से देवेंद्र ने वादा किया था कि जल्द उससे लूटा लैपटॉप और अन्य सामान लौटा देगा। देवेंद्र का प्लान था कि वैलेंटाइन डे पर राजीव चौक पर उसे शादी के लिए प्रपोज करेगा, लेकिन मामला मीडिया में होने पर फै सला बदलना पड़ा।