प्राइवेट अस्पतालों में मरीज की परवाह छोड़कर पैसे कैसे वसूल की जाए इस बात पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। उसकी ताजा मिसाल है डेंगू से 7 साल की आद्या की मौत। दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह की बेटी आद्या को डेंगू की वजह से पहले रॉकलैंड और बाद में फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उनकी बच्ची को नहीं बचाया जा सका और अस्पताल ने 18 लाख का बिल भी तैयार कर दिया। आद्या के पिता ने फोर्टिस अस्पताल पर लापरवाही बरतने का बड़ा आरोप लगाया है। बच्ची के पिता का कहना है कि फोर्टिस अस्पताल ने उन्हें धोखे में रखा और बेटी के मौत के बारे में नहीं बताया। इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
विज्ञापन
2 of 6
adya singh
- फोटो : अमर उजाला
आद्या के पिता जयंत सिंह ने बताया कि उनकी बेटी को 27 अगस्त की रात को तेज बुखार आया। जिसके बाद 29 अगस्त को उसे द्वारका सेक्टर 12 स्थित रॉकलैंड अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन बाद 31 अगस्त को पता चला कि बच्ची को डेंगू टाइप 4 है। तब अस्पताल ने जयंत को सलाह दी कि आद्या को पीडियाट्रिक आईसीयू वाले अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
विज्ञापन
3 of 6
adya singh
डॉक्टरों की सलाह के बाद जयंत अपनी बेटी को गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल ले गए जहां उसे बेहोशी की दवा देकर वेंटिलेटर पर रख दिया गया। आद्या वहां तीन दिन बेहोश रही। पांच दिन बाद भी डॉक्टर बात करने को तैयार ना हुए। जयंत का आरोप है कि अस्पताल ने सस्ता इलाज होने के बावजूद महंगा इलाज किया। उनके अनुसार अस्पताल ने आद्या को ऐसे-ऐसे इंजेक्शन दिए जिसकी कीमत 3100 रुपए प्रति वायल थी। जबकि 500 वायल वाला इंजेक्शन भी उपलब्ध था।
4 of 6
adya singh
शुगर टेस्टिंग स्ट्रिप जो 13 रुपए की थी उसके बदले अस्पताल ने 200 रुपए लिए। जयंत बताते हैं कि धीरे-धीरे 11 दिन बीत गए लेकिन कोई भी उनकी बेटी का हाल बताने को तैयार नहीं था। 14 सितंबर को डॉक्टरों ने उनसे कहा कि 70 से 80 पर्सेंट ब्रेन डैमेज हो चुका है। रिकवरी हो भी गई तो शरीर सही से काम नहीं करेगा।
विज्ञापन
5 of 6
adya
- फोटो : twitter
इसके बाद आद्या की मां को फुल बॉडी प्लाज्मा ट्रांसप्लांट कराने की बात कही गई जिसका खर्च 15-20 लाख बताया गया। जब अंत में जयंत ने अपनी बेटी को डिस्चार्ज कराने की बात कही तो अस्पताल ने उनसे कहा कि वो डिस्चार्ज अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (डॉक्टरों की बिना इजाजत डिस्चार्च) मांगें। यही नहीं अस्पताल ने आद्या को डायलसिस से उतार दिया और खाना देना भी बंद कर दिया।
जयंत आगे बोले कि वो फिर अपनी बच्ची को रॉकलैंड अस्पताल लेकर गए जहां काफी मिन्नतों के बाद उसका ईसीजी कराया गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। जयंत कहते हैं कि उनकी बच्ची की त्वचा नीली पड़ चुकी थी और वह सिकुड़ चुकी थी। मगर डॉक्टर कह रहे थे, ऐसा होता है। मुझे लगता है मेरी बेटी तभी मर चुकी थी जब वह फोर्टिस के आईसीयू में थी। जयंत अब फोर्टिस पर इस प्रताड़ना के लिए मुकदमा दायर करने की सोच रहे हैं। बीमारी के समय जयंत की पत्नी गर्भवती थीं मगर सदमे में उनका गर्भ गिर गया।