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दिल्ली में मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या: आरोपियों के इलाके में पसरा सन्नाटा, पड़ोसियों ने भी साधी चुप्पी

Sat, 07 Aug 2021 10:01 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

-सागरपुर स्थित अपने मकान में पुजारी सपरिवार रहता था, श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कराना पुस्तैनी पेशा
-पुजारी के साथ तीन आरोपियों की है पुरानी दोस्ती, हर दिन घंटों श्मशान घाट पर गुजारते थे वक्त
-घटना के वक्त चारों मौके पर थे मौजूद, पीड़ित परिवार ने धमकाकर अंतिम संस्कार कराने का लगाया आरोप 
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मासूम से दरिंदगी मामले में प्रदर्शन कर रहे परिजन और घटनास्थल की जांच करती पुलिस और फोरेंसिक की टीम - फोटो : किशन कुमार
दिल्ली कैंट में बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या के चारों आरोपियों  के इलाके में घटना के पांच दिन बाद भी सन्नाटा पसरा हुआ है। पड़ोसी समेत स्थानीय दुकानदार भी आरोपियों के बारे में ज्यादा कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। नाम पूछने पर आरोपियों की थोड़ी जानकारी देने के बाद वह उनके घर की तरफ इशारा कर देते हैं। वहीं, घर तक पहुंचने पर परिवार के सदस्य किसी आगंतुक को देखकर बड़ी बेरूखी से घर का दरवाजा बंद कर लेते हैं। शुक्रवार दिनभर आरोपियों के मोहल्ले में यही नजारा देखने को मिला। चारों आरोपियों का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। नौ वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसमें श्मशान का पुजारी राधेश्याम, सलीम, कुलदीप और लक्ष्मीनारायण है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पंडित राधेश्याम का श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार कराने का पुस्तैनी पेशा है। आगे पढ़ें पूरी स्टोरी और देखें तस्वीरें...
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घटनास्थल की जांच करती पुलिस और फोरेंसिक की टीम - फोटो : किशन कुमार
सागरपुर स्थित अपने मकान से वह हररोज सुबह श्मशान घाट आ जाते थे और देर शाम घर लौटते थे। दिनभर श्मशान घाट पर ही उनका रहना होता था। एक स्थानीय महिला ने बताया कि पंडित का भरापूरा परिवार है। वह अपने बेटे-बहु व उनके बच्चों के साथ रहते हैं। स्थानीय निवासी  बताते हैं कि 55 वर्षीय राधेश्याम का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
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श्मशान घाट - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ,  चारों आरोपियों की आपस में गहरी दोस्ती है। प्रतिदिन इनकी आपस में श्मशान घाट स्थित पुजारी के बैठक पर मुलाकात होती थी। सलीम अपने कारोबार के सिलसिले में आता था। लेकिन, लक्ष्मीनारायण और कुलदीप हर दिन शाम को राधेश्याम के पास जाते थे। इनकी बीच घंटों आपस में बातचीत चलती रहती थी। इस तरह की मुलाकातें इनके रूटीन में शामिल हो गई थी। अंधेरा होने पर करीब सात बजे श्मशान का दरवाजा बंद हो जाता था। इसके बाद राधेश्याम सागरपुर दो आरोपी आरोपी नांगल गांव व सलीम सदर स्थित अपने घर लौट जाता था। वारदात के दिन भी चारों आरोपी मौके पर मौजूद थे और पीड़ित परिवार को बच्ची के करंट लगने से मृत होने की सूचना दी थी।

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प्रदर्शन करते परिजन - फोटो : किशन कुमार
आरोपियों का प्रोफाइल
सलीम(49)
सलीम पिछले चार-पांच सालों से श्मशान घाट में लकड़ियों के आपूर्ति कर रहा था। वह यहां शवों के लिए लकड़ियां उठाने का काम करता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह यहां नाम बदलकर रामू नाम से रह रहा था। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि सलीम श्मशान पर अपने साथियों के लिए शराब लाया करता था।
 
कुलदीप(63)
यह नांगल गांव में रहता है। अक्सर शाम के समय अपने तीन दोस्त यानी आरोपियों से मिलने के लिए श्मशान में पहुंचता था। चारों आरोपियों में सबसे अधिक उम्र कुलदीप की है। वह देर तक यहां बैठा रहता था। श्मशान का दरवाजा बंद होने के बाद वह वापस अपने घर लौटता था।
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पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे रामदास अठावले - फोटो : अमर उजाला
लक्ष्मी नारायण(48)
लक्ष्मी नारायण नांगल गांव में ही परिवार के साथ रहता है। परिवार में माता-पिता भी हैं। वह आसपास के इलाकों में रंग-पुताई का काम करता है। काम खत्म करने के बाद वह भी शाम को श्मशान में मिलने के लिए पहुंचा करता था।
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